नयी दिल्ली, 23 फरवरी (भाषा) सरकार ने खनन क्षेत्र को बड़ी राहत देते हुए मौजूदा खनन पट्टों के भीतर खनन अपशिष्ट (टेलिंग) के पुनर्चक्रण को नई पर्यावरणीय मंजूरी (ईसी) की अनिवार्यता से छूट दे दी है। सूत्रों ने यह जानकारी दी।
सूत्रों ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि सतत प्रथाओं को बढ़ावा देने और नियामकीय अड़चनों को कम करने के उद्देश्य से उठाए गए इस कदम से खनन कंपनियां अयस्क निष्कर्षण के बाद बचने वाले अपशिष्ट पदार्थ (टेलिंग) का प्रसंस्करण और पुन: उपयोग अतिरिक्त पर्यावरणीय मंजूरी का इंतजार किए बिना कर सकेंगी।
पुनर्चक्रण की इस प्रक्रिया में खनन अपशिष्ट का दोबारा प्रसंस्करण कर मूल्यवान खनिज, पानी या अन्य संसाधनों में तब्दील किया जाता है। इससे पर्यावरणीय प्रभाव कम होता है और संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव हो पाता है।
वेदांता समूह की कंपनी हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड के मुख्य परिचालन अधिकारी किशोर कुमार एस. ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि इससे उद्योग को निर्बाध रूप से काम करने में मदद मिलेगी।
उद्योग विशेषज्ञों ने कहा कि पहले स्वीकृत खनन क्षेत्रों के भीतर अपशिष्ट पदार्थ के पुनर्चक्रण जैसी गतिविधियों के लिए भी अलग से पर्यावरणीय मंजूरी की आवश्यकता होती थी जिससे परियोजनाओं में देरी होती थी।
यह निर्णय ऐसे समय आया है जब देश ऊर्जा बदलाव को समर्थन देने के लिए खनन गतिविधियों में तेजी ला रहा है।
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