नई दिल्ली: अमेरिका यहां किसी को भी रूसी तेल खरीदते हुए नहीं देखना चाहता. यह बात यहां तैनात अमेरिकी दूत सर्जियो गोर ने शुक्रवार को कही. उन्होंने कहा कि भारत ने रूसी तेल को लेकर एक “प्रतिबद्धता” जताई है.
उनकी यह टिप्पणी अमेरिका के नेतृत्व वाले ‘पैक्स सिलिका’ समझौते पर हस्ताक्षर समारोह के दौरान आई. गोर ने इसे “रणनीतिक” बताया और कहा कि इसमें नई दिल्ली की एंट्री “जरूरी” है. अब भारत इस अमेरिकी पहल का सदस्य बन गया है.
मीडिया से बात करते हुए गोर ने कहा, “रूसी तेल पर एक समझौता है. हमने देखा है कि भारत ने अपने तेल के स्रोतों में विविधता लाई है. एक प्रतिबद्धता है. यह भारत के बारे में नहीं है. अमेरिका नहीं चाहता कि कोई भी रूसी तेल खरीदे.”
उन्होंने कहा, “हमारे रिश्ते बहुत अच्छे हैं. मुझे लगता है कि इसमें कई बातें हैं. पहली बात हमारे राष्ट्रपति और आपके प्रधानमंत्री के बीच गहरी दोस्ती है. व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर बहुत जल्द होंगे. शायद इसी हफ्ते. दोनों टीमें आपस में बात कर रही हैं और सक्रिय रूप से उस स्थिति तक पहुंच रही हैं जहां दोनों साइन कर सकें.” यह बात उन्होंने भारत के पैक्स सिलिका में औपचारिक प्रवेश के बाद प्रेस ब्रीफिंग में कही.
इस महीने की शुरुआत में दोनों देशों ने एक अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा पर संयुक्त बयान जारी किया था. इसके तहत अमेरिका में भारत के कुल निर्यात पर टैरिफ दर 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दी जाएगी. वहीं नई दिल्ली ने अमेरिकी सामानों पर कई टैरिफ घटाने का वादा किया है.
गोर ने पैक्स सिलिका हस्ताक्षर समारोह में कहा, “हमने उन अड़चनों को दूर किया जो हमें बहुत समय से रोक रही थीं. यह समझौता सिर्फ व्यापार या टैरिफ का नहीं था. यह दो महान लोकतंत्रों का यह कहना था कि हम साथ मिलकर निर्माण करेंगे, सिर्फ एक-दूसरे से खरीदेंगे नहीं. और आज हम अगला कदम उठा रहे हैं.”
भारत को 12 जनवरी को पैक्स सिलिका में शामिल होने का निमंत्रण दिया गया था. यह अमेरिका के नेतृत्व वाली एआई और महत्वपूर्ण खनिजों की पहल है. यह निमंत्रण गोर के राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना परिचय पत्र सौंपने से कुछ दिन पहले दिया गया था.
दिलचस्प बात यह है कि पहले भारत को इसमें शामिल नहीं किया गया था. इस गैर-बाध्यकारी घोषणा पर ऑस्ट्रेलिया, ग्रीस, इज़रायल, जापान, कतर, दक्षिण कोरिया, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात और यूनाइटेड किंगडम जैसे कई देशों ने हस्ताक्षर किए हैं.
हस्ताक्षर समारोह में गोर ने कहा, “मुझे सबसे ज्यादा जो बात प्रभावित करती है वह सिर्फ भारत का आकार नहीं है, हालांकि वह भी चौंकाने वाला है, बल्कि अपना रास्ता खुद तय करने का भारत का संकल्प है. मैं हमारे दोनों देशों के बीच असीम संभावनाओं की बात करता रहता हूं और सच में ऐसा मानता हूं. व्यापार समझौते से लेकर पैक्स सिलिका और रक्षा सहयोग तक, हमारे दोनों देशों के साथ मिलकर काम करने की संभावनाएं असीम हैं. मैं यहां अपने अगले तीन साल में इसे पूरा करने की कोशिश करूंगा.” यह कार्यक्रम राष्ट्रीय राजधानी में एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान हुआ.
गोर ने कहा, “यह एक रणनीतिक गठबंधन है जिसका मकसद पूरे सिलिकॉन स्टैक को सुरक्षित करना है. खदानों से जहां हम महत्वपूर्ण खनिज निकालते हैं, फैब्स तक जहां चिप बनती हैं, और डेटा सेंटर तक जहां उन्नत एआई तैनात होती है.”
पैक्स सिलिका का निमंत्रण गोर की शुरुआती पहलों में से एक था. उस समय भारत और अमेरिका व्यापार को लेकर मतभेद दूर करने की कोशिश कर रहे थे.
गोर ने आगे कहा, “यह क्षमताओं का गठबंधन है जो दबाव वाली निर्भरता को हटाकर भरोसेमंद औद्योगिक ढांचे वाले देशों का सकारात्मक गठबंधन बनाता है. पैक्स सिलिका ऐसे देशों का समूह होगा जो मानते हैं कि तकनीक को स्वतंत्र लोगों और मुक्त बाजारों को मजबूत करना चाहिए. पैक्स सिलिका में भारत की एंट्री सिर्फ प्रतीकात्मक नहीं है. यह रणनीतिक है. यह जरूरी है.”
रूसी तेल का सवाल
अमेरिका का कहना है कि व्यापार समझौते के तहत भारत ने रूसी तेल की अतिरिक्त खरीद बंद करने का वादा किया है.
हालांकि भारत का कहना है कि रूसी तेल खरीदना उसकी कंपनियों का व्यावसायिक फैसला है. भारत ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि वॉशिंगटन से कोई राजनीतिक प्रतिबद्धता की गई है या नहीं.
7 फरवरी से अमेरिका ने रूसी तेल खरीदने के कारण भारत पर लगाए गए 25 प्रतिशत दंडात्मक टैरिफ हटा दिए हैं. बाकी 25 प्रतिशत पारस्परिक टैरिफ को आने वाले कुछ दिनों में घटाकर 18 प्रतिशत किया जाएगा.
गोर ने कहा, “देखिए, असलियत यह है कि हजारों मुद्दे होते हैं. हम किसी छोटे देश से बात नहीं कर रहे. यह दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है. इसलिए हमें खुशी है कि अंतरिम समझौता हो गया है. कुछ छोटे बिंदु बाकी हैं जिन्हें ठीक करना है, लेकिन समझौता हो चुका है. इसलिए हस्ताक्षर जल्दी ही होंगे.”
पिछले साल नई दिल्ली और वॉशिंगटन के रिश्तों में तनाव आ गया था. इसकी वजह अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वे बार-बार दावे थे कि उन्होंने मई 2025 में 87 घंटे चले भारत-पाकिस्तान संघर्ष को खत्म कराने में मध्यस्थता की. भारत ने इस दावे को खारिज किया और कहा कि संघर्षविराम पाकिस्तान के साथ उचित स्तर पर द्विपक्षीय बातचीत से हुआ.
अमेरिका ने भारत पर रूस के बजाय वेनेजुएला से तेल खरीदने का दबाव डाला है. जनवरी में अमेरिका ने काराकास में देर रात छापे में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को पकड़ लिया था. मौजूदा व्यवस्था को वॉशिंगटन के साथ नजदीकी बढ़ाने के लिए ज्यादा तैयार माना जा रहा है ताकि उसका तेल ग्लोबल मार्किट में जाता रहे.
इस पर गोर ने कहा, “मैं उस विषय में नहीं जाना चाहता. उसके कुछ पहलुओं की अभी घोषणा नहीं हुई है. लेकिन सक्रिय बातचीत चल रही है. ऊर्जा विभाग यहां के ऊर्जा मंत्रालय से बात कर रहा है. हमें उम्मीद है कि इस पर बहुत जल्द कुछ खबर होगी. आप समय से आगे सवाल कर रहे हैं.”
गोर ने भारत के साथ बढ़ती साझेदारी को भरोसेमंद रिश्ता बताया. उन्होंने कहा कि अमेरिका एआई तकनीक साझा करने को तैयार है और यह आगे सहयोग का बड़ा क्षेत्र होगा.
पैक्स सिलिका घोषणा समारोह के बाद एक सवाल पर उन्होंने कहा कि वेनेजुएला का तेल खरीदने के मामले में भारत “समय से आगे” है.
उन्होंने कहा, “हम दुनिया के साथ भरोसेमंद एआई तकनीक साझा कर सकते हैं, खासकर भारत जैसे साझेदारों के साथ. और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत ताकत लेकर आता है. शांति इस उम्मीद से नहीं आती कि विरोधी निष्पक्ष खेलेंगे. हम जानते हैं कि वे ऐसा नहीं करेंगे. शांति ताकत से आती है. भारत इसे समझता है. भारत मजबूत सीमाओं को समझता है. भारत इस क्षेत्र को समझता है कि ताकत और संप्रभुता क्या होती है. यही पैक्स सिलिका का मकसद है.”
