प्रयागराज, 19 फरवरी (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 1987 में फर्रुखाबाद में हुई एक हत्या के मामले में 1989 में आजीवन कारावास की सजा काट रहे एक कैदी को दोषमुक्त कर दिया है।
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति प्रशांत मिश्रा की अगुवाई वाली खंडपीठ ने बुधवार को व्यवस्था दी कि अधीनस्थ अदालत द्वारा 17 मई 1989 को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) के तहत दर्ज की गई सजा और दोषसिद्धि त्रुटिपूर्ण थी और इसे रद्द किया जाना चाहिए।
अदालत ने कहा, “अधीनस्थ अदालत के समक्ष इस मामले में तीन आरोपी थे, जिनमें से एक को दोषी ठहराया गया जबकि समान साक्ष्यों के आधार पर दो अन्य को बरी कर दिया गया।”
अपने निर्णय में उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया कि अपीलकर्ता जेल में बंद खुन्नी लाल यदि किसी अन्य मामले में वांछित नहीं है तो उसे तत्काल रिहा किया जाए।
अभियोजन के अनुसार, खुन्नी लाल, भगवान दीन और जगदीश शिकायतकर्ता राम सिंह के परिवार से थे और उसके घर व जमीन के आधे हिस्से में साझेदार थे। तीनों पर आरोप था कि उन्होंने राम सिंह की जमीन पर कब्जा कर मकान बना लिया था।
नौ मई 1987 को शाम लगभग छह बजे राम सिंह की जमीन पर चबूतरा तोड़ने को लेकर विवाद हो गया। आरोप है कि खुन्नी लाल कथित तौर पर बड़े चाकू, भगवान दीन पिस्तौल और जगदीश भाला लेकर झगड़े में शामिल हुए, जिससे राम सिंह के भाई मौजी लाल की मौत हो गई।
अधीनस्थ अदालत ने सह-अभियुक्त भगवान दीन और जगदीश को बरी कर दिया था जबकि खुन्नी लाल को दोषी ठहराकर सजा सुनाई थी, जिसे अब उच्च न्यायालय ने रद्द कर दिया है।
भाषा सं जफर खारी
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