रांची, 19 फरवरी (भाषा) झारखंड विधानसभा में बृहस्पतिवार को नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने आरोप लगाया कि राज्य में आदिवासी विस्थापन का सामना कर रहे हैं और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार के तहत औद्योगिक और खनन परियोजनाओं के नाम पर उनकी जमीनें ‘लूटी’ जा रही हैं।
राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लेते हुए मरांडी ने सरकार पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने और किसानों और आदिवासी समुदायों की दुर्दशा को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया।
उन्होंने दावा किया कि संथाल परगना में औद्योगिक परियोजनाओं के लिए आदिवासियों को विस्थापित किया जा रहा है।
देवघर जिले के जसीडीह का जिक्र करते हुए वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा कि किसानों को उनकी वर्षों पुरानी कृषि भूमि से बेदखल किया जा रहा है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता ने कहा, ‘‘जब मैंने जिला परिषद के सदस्य से बात की, तो उन्होंने कहा कि जमीन 1974 में अधिग्रहित की गई थी। मुझे उद्योग स्थापित करने पर कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन कृषि भूमि पर क्यों? इन्हें बंजर भूमि पर स्थापित किया जा सकता है, जो राज्य में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध है।’’
मरांडी ने अमरापारा में कोयला खदान के लिए विस्थापन का आरोप लगाया और कहा कि गिरिडीह जिले के तिसरी प्रखंड में वन विभाग द्वारा 82 परिवारों को विस्थापित किया जा रहा है।
उन्होंने दावा किया कि रांची के नागरी क्षेत्र में राजेंद्र आयुर्वेद संस्थान के विस्तार (आरआईएमएस-2) के लिए आदिवासियों की कृषि भूमि का अधिग्रहण किया जा रहा है, जबकि पास में बंजर भूमि उपलब्ध है।
इन आरोपों का जवाब देते हुए राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि सरकार अस्पताल का निर्माण कर रही है, होटल का नहीं।
इससे पहले, धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलते हुए झामुमो के विधायक हेमलाल मुर्मू ने राष्ट्रगान से पहले ‘वंदे मातरम्’ गाने को अनिवार्य करने के केंद्र सरकार के फैसले की आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि इससे समाज में विभाजन पैदा हो रहा है।
कांग्रेस विधायक प्रदीप यादव ने भाजपा पर नफरत फैलाने का आरोप लगाया।
भाषा संतोष वैभव
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