scorecardresearch
Saturday, 21 February, 2026
होमदेशलोन फ्रॉड मामले में अनिल अंबानी का ED जांच में सहयोग का वादा, SC से कहा—देश छोड़कर नहीं भागूंगा

लोन फ्रॉड मामले में अनिल अंबानी का ED जांच में सहयोग का वादा, SC से कहा—देश छोड़कर नहीं भागूंगा

रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन ने हलफनामा दायर कर कहा कि वह सुप्रीम कोर्ट की अनुमति के बिना भारत नहीं छोड़ेंगे. उन्होंने यह भी कहा कि आरोपित कंपनियों के रोजमर्रा के कामकाज में वह शामिल नहीं थे.

Text Size:

नई दिल्ली: कारोबारी अनिल अंबानी ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर किया है, जिसमें उन्होंने वादा किया है कि वह कोर्ट की अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ेंगे और उनके रिलायंस ग्रुप की कंपनियों से जुड़े कथित बैंक लोन फ्रॉड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की जांच में पूरा सहयोग करेंगे.

इस हलफनामे में उनके वकील मुकुल रोहतगी द्वारा कोर्ट में पहले दिए गए बयान को आधिकारिक रूप से दर्ज किया गया है, जिसमें कहा गया था कि अंबानी “इस कोर्ट की अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ेंगे.”

अंबानी ने शपथ लेकर कहा कि जुलाई 2025 में जब यह जांच शुरू हुई, तब से उन्होंने भारत नहीं छोड़ा है और उनका “विदेश जाने का कोई प्लान या इरादा नहीं है.” उन्होंने कहा कि अगर भविष्य में विदेश जाने की ज़रूरत पड़ी, तो वह पहले कोर्ट से अनुमति लेंगे. उन्होंने कहा कि इस हलफनामे से यह “साफ है कि मैं भागने वाला नहीं हूं और कानून की प्रक्रिया से बचने का मेरा कोई इरादा नहीं है.”

जांच में शामिल कंपनियों में अपनी भूमिका के बारे में, रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर अंबानी ने साफ किया कि उनकी “भूमिका सिर्फ नॉन-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर की थी.” उन्होंने यह भी कहा कि वह “इन कंपनियों के रोजमर्रा के कामकाज या संचालन में शामिल नहीं थे.”

हलफनामे में कहा गया कि ईडी ने अंबानी को 26 फरवरी 2026 को पेश होने के लिए बुलाया है. उन्होंने उस दिन जांच में शामिल होने और “पूरी तरह सहयोग करने” का वादा किया है.

हलफनामे में कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई के साथ-साथ “PMLA 2002 की धारा 50 के तहत जांच” चल रही है, जिससे ईडी गवाहों और दस्तावेज़ को बुला सकती है.

अंबानी ने कहा कि वह “जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रहे हैं” और उन्होंने यह हलफनामा यह दिखाने के लिए दिया है कि उनका व्यवहार “पारदर्शी और सहयोग करने वाला” रहा है, जबकि सुप्रीम कोर्ट इस मामले की निगरानी कर रहा है.

66 साल के अंबानी ने कहा कि यह हलफनामा “न्यायिक रिकॉर्ड में स्पष्टता, पूर्णता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने” के लिए दिया गया है.

पिछली सुनवाई

4 फरवरी को जब इस जनहित याचिका पर आखिरी सुनवाई हुई थी, तब सुप्रीम कोर्ट ने रिलायंस ग्रुप की कंपनियों के 40,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के कथित बैंक लोन फ्रॉड की जांच में ईडी की “बिना कारण देरी” की आलोचना की थी.

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जे. बागची और जस्टिस वी. पंचोली की बेंच ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को भी फटकार लगाई थी कि उसने कई बैंकों की शिकायतों के बावजूद सिर्फ एक एफआईआर दर्ज की. कोर्ट ने सीबीआई और ईडी को तय समय में जांच पूरी करने का निर्देश दिया था.

बेंच ने ईडी को एसआईटी बनाने और सीबीआई को हर बैंक की शिकायत पर अलग-अलग एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था.

पिछली सुनवाई में रोहतगी ने सुप्रीम कोर्ट को भरोसा दिलाया था कि अंबानी कोर्ट की अनुमति के बिना देश नहीं छोड़ेंगे.

बेंच ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के इस आश्वासन को भी दर्ज किया था कि “चल रही जांच में कोई रुकावट न आए, इसके लिए सभी ज़रूरी कदम उठाए जाएंगे.”

यह मामला 2025 में दायर एक जनहित याचिका से जुड़ा है, जिसमें कहा गया था कि ईडी और सीबीआई की जांच अधूरी है और इसमें बैंक अधिकारियों और सरकारी कर्मचारियों की भूमिका को जानबूझकर शामिल नहीं किया गया, जबकि उनके शामिल होने के सबूत हैं. इस याचिका में कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग की गई थी.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


यह भी पढ़ें:


 

share & View comments