नयी दिल्ली, 14 फरवरी (भाषा) कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने पूर्व सैनिकों के लिए स्वास्थ्य बीमा योजना और विकलांगता पेंशन से जुड़े मुद्दे का हवाला देते हुए शनिवार को आरोप लगाया कि दूसरों को देशविरोधी कहने वाली सरकार देश के सैनिकों की सुरक्षा और सम्मान से खिलवाड़ कर रही है, जो उसका नैतिक पतन भी है।
राहुल ने अपने जनसंसद कार्यक्रम में पूर्व सैनिकों के एक समूह से मुलाकात के बाद सरकार पर निशाना साधा।
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष पिछले कुछ महीनो से समाज के अलग-अलग वर्गों के प्रतिनिधियों से मुलाकात करते हैं और इस मुलाकात को उन्होंने जनसंसद कार्यक्रम नाम दिया है।
राहुल गांधी ने पूर्व सैनिकों से मुलाकात का वीडियो साझा करते हुए फेसबुक पर पोस्ट किया, ‘जनसंसद में भारत के पूर्व सैनिकों के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात हुई, उनकी पीड़ा सुनकर मन व्यथित है। जब कोई जवान देश के लिए अपना शरीर और जीवन दांव पर लगाता है, उसकी सेहत की जिम्मेदारी देश की होती है। हर सरकार ने यह कर्तव्य पूरी शिद्दत से निभाया, सिवाय इस मोदी सरकार के।’
उन्होंने कहा, ‘हमारे सामने दो उदाहरण हैं, ईसीएचएस (पूर्व सैनिक अंशदायी स्वास्थ्य योजना) और विकलांगता पेंशन। ईसीएचएस को जानबूझकर फंड की कमी में रखा गया है। मोदी सरकार अस्पतालों को 9-9 महीने तक भुगतान नहीं करती, और कम पैसे देने के हर तरीके अपनाए जा रहे हैं।’
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि पिछले 3-4 वर्षों का बकाया लगभग 12,000 करोड़ रुपये का है, इसी वजह से अस्पताल सिस्टम से बाहर हो रहे हैं, जिससे लाखों से ज़्यादा पूर्व सैनिकों के इलाज पर सीधा असर पड़ रहा है।
उनका कहना है कि कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों से जूझ रहे जवानों को भी समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा, ‘1922 से लेकर आज़ादी के बाद हर सरकार ने युद्ध में घायल सैनिकों की विकलांगता पेंशन पर आयकर नहीं लगाया। अब पहली बार इस परंपरा को मोदी सरकार में तोड़ा जा रहा है।
बजट में कहा गया कि लड़ते हुए घायल होकर भी सेवा जारी रखने वाले पूर्व सैनिकों से कर वसूला जाएगा, जिन्होंने हर चोट खाकर भी देश की सेवा की, आज उन्हीं से उनकी तकलीफ़ पर कर मांगा जा रहा है।’
उन्होंने आरोप लगाया कि ये दोनों फैसले वित्तीय नहीं हैं, नैतिक पतन है।
राहुल गांधी ने दावा किया, ‘जो सरकार दूसरों को देशविरोधी कहने में आगे रहती है, वही हमारे सैनिकों की सुरक्षा और सम्मान से खिलवाड़ कर रही है। ये वो सैनिक हैं जो हमें सुरक्षित रखने के लिए कभी बलिदान देने से पीछे नहीं हटते।’
भाषा हक माधव रंजन
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