नयी दिल्ली, 12 जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने उत्तर प्रदेश में अदाणी समूह के प्रस्तावित ताप विद्युत संयंत्र के खिलाफ कोई भी निर्देश देने से बृहस्पतिवार को इनकार कर दिया और राज्य तथा केंद्र सरकार से इस मामले में अपना जवाब दाखिल करने को कहा।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ ने कहा कि वह राज्य सरकार और केंद्र के जवाब को देखे बिना कोई आदेश पारित नहीं करेगी।
पीठ ने एक पर्यावरण कार्यकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता संजय पारिख से कहा, ‘‘राज्य में बिजली की कमी हो सकती है। हम इस तरह के आदेश पारित नहीं कर सकते। हमें पर्यावरण संबंधी चिंताओं और विकास के बीच संतुलन बनाने की जरूरत है।’’
पारिख ने दलील दी कि यह संयंत्र जंगलों से घिरा हुआ है तथा जंगली जानवरों को खतरा हो सकता है। उन्होंने कहा कि शीर्ष अदालत और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के समक्ष याचिका लंबित होने के बावजूद अदाणी समूह को पर्यावरण मंजूरी मिल गई।
वकील ने कहा, ‘‘वे वहां एक बड़े बिजली संयंत्र का निर्माण कर रहे हैं, और (यह) पर्यावरण और वन्य जीवन को प्रभावित कर सकता है।’’
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा कि मुश्किल यह है कि कभी बिजली संयंत्रों को लेकर, कभी जंगलों को लेकर और कभी नदियों को लेकर चिंता जताई जाती है, लेकिन विकास परियोजनाओं को इस तरह नहीं रोका जा सकता।
पीठ ने सुनवाई के दौरान मजबूत प्रवर्तन तंत्र और वैज्ञानिक मूल्यांकन की आवश्यकता पर जोर दिया। पीठ ने पारिख से कहा, ‘‘हम आपकी बातों पर संदेह नहीं कर रहे, लेकिन क्या इसे उचित सुरक्षा उपायों के साथ अनुमति दी जा सकती है?’’
प्रधान न्यायाधीश ने केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से अपना जवाब दाखिल करने को कहा। पीठ ने यह बताने को कहा कि पर्यावरणीय चिंताओं का संतुलन कैसे किया जाएगा और इसका समाधान क्या होगा।
अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार और अदाणी समूह को भी इस मामले में अपना जवाब दाखिल करने की अनुमति दी।
भाषा आशीष नेत्रपाल
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