(तस्वीरों के साथ)
जम्मू, 11 फरवरी (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक बुधवार को जम्मू कश्मीर विधानसभा में अध्यक्ष के आसन के पास आ गए और उनके खिलाफ की गयी ‘‘असंसदीय टिप्पणियों’’ को लेकर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से माफी की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए।
यह घटना भाजपा सदस्यों के सदन से बाहर चले जाने के कुछ ही समय बाद घटी, जिसमें विपक्ष के नेता सुनील शर्मा को छोड़कर बाकी सभी सदस्य प्रश्नकाल समाप्त होने पर सदन में वापस लौटे थे। वे पहले इसी मुद्दे पर सदन से बाहर चले गए थे।
भाजपा के सदस्य पहली पंक्ति में एकत्रित हुए और सरकार के खिलाफ नारे लगाते रहे तथा मुख्यमंत्री से माफी मांगने की मांग करते रहे।
हालांकि, अध्यक्ष ने कहा कि सदन से बहिर्गमन करने के बाद वे इस मुद्दे को दोबारा नहीं उठा सकते।
भाजपा ने दावा किया कि मुख्यमंत्री उन्हें विधानसभा में प्रवेश करते देख सदन से चले गए।
अध्यक्ष ने सदन को भाजपा के विरोध को दर्ज न करने का निर्देश दिया और कार्यवाही जारी रखी। बाद में, वे अध्यक्ष के आसन के पास जमा हो गए और धरने पर बैठ गए।
इससे पहले प्रश्नकाल के दौरान 30 मिनट से अधिक समय तक विधानसभा में हंगामा देखने को मिला।
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही भाजपा विधायक शाम लाल शर्मा खड़े हुए और मांग की कि सदन के नेता को माफी मांगनी चाहिए या मुख्यमंत्री की अनुपस्थिति में अध्यक्ष द्वारा एक बयान जारी किया जाना चाहिए।
शर्मा ने कहा, ‘‘ऐसी घटना पहले नहीं देखी गयी। मुख्यमंत्री और सदन के नेता द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा किसी भी सदन में इस्तेमाल करने योग्य नहीं है… मैं सदन के नेता से पूछना चाहता हूं कि क्या वे कल इस सदन में भाजपा विधायक दल के बारे में इस्तेमाल किए गए अपने शब्दों को वापस लेते हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘अगर वह इन्हें वापस नहीं लेते हैं, तो हम इसे उनकी अंतरात्मा पर छोड़ते हैं – उनकी अंतरात्मा उन्हें क्या कहती है – कि इस सदन में प्रयुक्त शब्द उचित थे या नहीं। यदि मुख्यमंत्री यहां उपस्थित नहीं हैं, तो मैं इसे अध्यक्ष पर छोड़ता हूं और उन्हें इस पर प्रतिक्रिया देनी होगी। इस मामले पर कुछ कहना आपकी जिम्मेदारी है।’’
अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने भाजपा सदस्यों को यह समझाने की कोशिश की कि प्रश्नकाल को जारी रहने दिया जाए और सदन के नेता के उपस्थित होने पर इस मुद्दे को उठाया जाए।
अध्यक्ष ने कहा, ‘‘कल (मंगलवार को) जो कुछ भी हुआ वह दुर्भाग्यपूर्ण था। मुख्यमंत्री को आने दीजिए और अगर वह चाहें तो बयान दे सकते हैं। मैं उनकी ओर से बयान नहीं दे सकता।’’
स्वास्थ्य मंत्री सकीना इटू ने भी विशेष रूप से उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी के खिलाफ असंसदीय शब्दों का प्रयोग करने का भाजपा सदस्यों पर आरोप लगाया।
चौधरी ने अध्यक्ष को सुझाव दिया कि दोनों पक्षों द्वारा प्रयुक्त सभी असंसदीय शब्दों की जांच की जाए और कार्यवाही को बिना किसी व्यवधान के जारी रखने के लिए इन्हें रिकॉर्ड से हटा दिया जाए।
विपक्ष के नेता सुनील शर्मा ने इस सुझाव का विरोध किया और बाद में ‘‘अपमानजनक सरकार है’’, ‘‘असंसदीय सरकार है’’ और ‘‘भारत माता की जय’’ जैसे नारे लगाते हुए सदन से बहिर्गमन किया।
मंगलवार को सदन में अब्दुल्ला के भाषण के दौरान उस समय हंगामा मच गया जब भाजपा सदस्यों ने उनकी कुछ टिप्पणियों पर आपत्ति जताई और माफी मांगने की मांग की।
अब्दुल्ला इस केंद्र शासित प्रदेश के छह फरवरी को पेश किए गए बजट पर चर्चा समाप्त कर रहे थे, तभी भाजपा सदस्यों ने उनके द्वारा की गई कुछ टिप्पणियों को ‘‘असंसदीय’’ करार दिया।
मुख्यमंत्री ने भाजपा सदस्यों से अपनी टिप्पणी के लिए माफी मांगने से इनकार कर दिया और कहा कि वह अपने शब्दों को वापस लेने को तैयार हैं, लेकिन बार-बार हो रहे व्यवधानों के कारण उन्हें बोलने नहीं दिया गया।
वहीं, शर्मा ने कहा कि जब तक मुख्यमंत्री सदन में बिना शर्त माफी नहीं मांग लेते, तब तक पार्टी सदन की कार्यवाही को जारी रखने नहीं देगी।
विधानसभा के बाहर शर्मा ने पत्रकारों से कहा, ‘‘आज तो उनके (मुख्यमंत्री) पास अपने शब्दों को वापस लेने का भी समय नहीं है। हमने उनसे यह भी कहा था कि अगर उन्होंने उचित शब्दों का प्रयोग किया है, तो उन्हें आगे आकर यह स्वीकार करना चाहिए कि वे उन शब्दों पर कायम हैं। लेकिन वह न तो उपस्थित हैं और न ही ऐसा करने को तैयार हैं। उन्हें शर्म आनी चाहिए।’’
उन्होंने कहा कि भाजपा इन टिप्पणियों पर स्पष्टीकरण मांगती रहेगी।
भाषा गोला सुरभि
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