देहरादून, नौ फरवरी (भाषा) भारतीय सैन्य अकादमी (आईएमए) के नजदीक करीब 20 एकड़ जमीन कथित तौर पर इस्लामिक शिक्षा संस्थान स्थापित करने के लिए हस्तांतरित किए जाने का प्रकरण जांच के घेरे में आ गया है।
यह जमीन करीब दो दशक पहले तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने कथित तौर पर आवंटित की थी।
विकासनगर के उपजिलाधिकारी विनोद कुमार द्वारा की गई शुरुआती जांच के मुताबिक आईएमए के पास धौलास क्षेत्र में स्थित इस 20 एकड़ जमीन को अब छोटे-छोटे भूखंडों में आवासीय उद्देश्यों के लिए बेचा जा रहा है, जिससे सैन्य प्रशिक्षण संस्थान की सुरक्षा को खतरा पैदा हो रहा है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस संबंध में मीडिया से बातचीत में कहा कि उनकी सरकार इस मामले में कड़ी कार्रवाई करेगी।
धामी ने कहा, ‘‘इस मामले के सामने आने से स्पष्ट है कि ये लोग (कांग्रेस) मुस्लिम विश्वविद्यालय बनाने की जो बात करते थे, अगर सरकार में आते तो उस दिशा में आगे बढ़ते। हम (धौलास जमीन के मामले में) कड़ी कार्रवाई करेंगे।’’
इस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि यह प्रकरण 2004 का है जब नारायण दत्त तिवारी प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। उन्होंने कहा, ‘‘यह 2004 का पुराना मामला है, जब तिवारीजी सरकार के मुखिया थे। उसके बाद कई बार भाजपा की सरकारें सत्ता में आईं और तब उन्हें इस भूमि आवंटन को रद्द कर देना चाहिए था।’’
इस बीच, भाजपा ने आईएमए की सुरक्षा को खतरा बताते हुए सरकार से भूमि आवंटन निरस्त कर उसे सरकार में निहित करने की मांग की है।
भाजपा विधायक और प्रदेश पार्टी प्रवक्ता विनोद चमोली ने कहा कि इस संबंध में आ रही खबरों ने एक बार फिर कांग्रेस और उनकी सरकारों की खतरनाक साजिशों को सामने ला दिया है।
उन्होंने सवाल उठाया कि क्या तिवारी सरकार द्वारा आवंटित इसी जमीन पर कांग्रेस अपने नेता हरीश रावत की देखरेख में मुस्लिम विश्वविद्यालय खोलना चाहती थी। चमोली ने कहा कि ‘‘2022 में भाजपा के विरोध और जनता द्वारा कांग्रेस को नकारे जाने के कारण उसकी यह मंशा पूरी नहीं हो पायी और अब भूमाफिया द्वारा उस जमीन को खुदबुर्द किया जा रहा है।’’
चमोली ने मांग की कि आईएमए की सुरक्षा को देखते हुए इस जमीन को सरकार में निहित किया जाए।
भाषा दीप्ति
धीरज
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