नयी दिल्ली, नौ फरवरी (भाषा) उद्योग निकाय आईवीपीए के अनुसार, 2025-26 विपणन वर्ष में भारत में खाद्य तेल उत्पादन 96 लाख टन होने का अनुमान है, और घरेलू मांग को पूरा करने के लिए इसे लगभग 1.67 करोड़ टन खाद्य तेल का आयात करना होगा।
भारत मुख्य रूप से अर्जेंटीना और ब्राजील से सोयाबीन तेल आयात का करता है, जबकि देश मलेशिया और इंडोनेशिया से पाम तेल खरीदता है। कुल घरेलू मांग में से, देश को लगभग 60 प्रतिशत मात्रा का आयात करना पड़ता है।
कुआलालंपुर में एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए, भारतीय वनस्पति तेल उत्पादक संघ (आईवीपीए) के अध्यक्ष सुधाकर देसाई ने कहा कि ‘‘वैश्विक खाद्य तेल बाजार व्यापार पुनर्गठन और आपूर्ति की दिक्कतों के कारण संरचनात्मक अस्थिरता के दौर में प्रवेश कर गए हैं।’’
सोमवार को एक बयान में देसाई ने, जो इमामी एग्रोटेक लिमिटेड के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) भी हैं, ने कहा कि भू-राजनीतिक पुनर्गठन ने वैश्विक व्यापार गलियारों को बदल दिया है।
‘‘वैश्विक खाद्य तेल में संरचनात्मक बदलावों को समझना: भारत के लिए निहितार्थ’ विषय कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि ‘शुल्क या व्यापार प्रवाह में छोटे समायोजन अब आपूर्ति श्रृंखला में असमान मूल्य उतार-चढ़ाव पैदा कर रहे हैं।’’
देसाई ने अनुमान लगाया कि तेल वर्ष 2025-26 (अक्टूबर-सितंबर) में भारत का घरेलू खाद्य तेल उत्पादन 96 लाख टन होने का अनुमान है, जो भारतीय जरूरतों का केवल लगभग 40 प्रतिशत पूरा करता है। इसका मतलब है कि लगभग 1.67 करोड़ टन के लिए आयात पर निर्भरता होगी।
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसईए) के अनुसार, भारत ने अक्टूबर में समाप्त हुए विपणन वर्ष 2024-25 के दौरान लगभग 1.61 लाख करोड़ रुपये के 1.6 करोड़ टन खाद्य तेलों का आयात किया।
देसाई ने कहा कि विपणन वर्ष 2025-26 में, कुल आयात में 80-85 लाख टन पाम तेल, 50-55 लाख टन सोयाबीन तेल, 28-30 लाख टन सूरजमुखी तेल, और लगभग 2 लाख टन अन्य तेल शामिल होने की उम्मीद है, जिसमें नेपाल के माध्यम दो किए गए शून्य-मुक्त आयात भी शामिल हैं।
पाम तेल का आयात विपणन वर्ष 2021-22 में एक करोड़ टन से ज़्यादा से घटकर लगभग 80 लाख टन रह गया है।
देसाई ने कहा कि रिफाइनिंग मार्जिन पर दबाव बना हुआ है, जिससे मांग की गति धीमी हो रही है।
व्यापार नीति पर, देसाई ने कहा कि हाल ही में अमेरिका, ईयू, ऑस्ट्रेलिया, यूएई और साफ्टा सदस्यों जैसे साझेदारों के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) और द्विपक्षीय समझौते मूल्य निर्धारण और प्राप्ति के स्रोत के फैसलों का अहम हिस्सा बन गए हैं।
आईवीपीए एक पांच दशक पुरानी व्यापार निकाय है जो भारत की खाद्य तेल और तिलहन मूल्य श्रृंखला का प्रतिनिधित्व करता है।
भाषा राजेश राजेश अजय
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