नयी दिल्ली, नौ फरवरी (भाषा) केंद्र ने सोमवार को उच्चतम न्यायालय को अवगत कराया कि जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की हालत ‘‘बिल्कुल ठीक’’ है और हिरासत में रहने के दौरान उन्हें अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, जोधपुर से सर्वोत्तम उपचार मिल रहा है।
केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल के. एम. नटराज ने न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति पी. बी. वराले की पीठ को यह जानकारी दी कि वांगचुक की हिरासत की समीक्षा के संबंध में अभी तक कोई प्रगति नहीं हुई है।
सुनवाई की शुरुआत में, न्यायमूर्ति कुमार ने नटराज से पूछा कि वांगचुक के बिगड़ते स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए, अदालत के अनुरोध पर उनकी हिरासत की समीक्षा करने में क्या कोई प्रगति हुई है।
न्यायमूर्ति कुमार ने नटराज से पूछा, ‘‘क्या हुआ? कोई प्रगति हुई? क्या यह कर लिया गया?’’
इसपर एएसजी ने उत्तर दिया, ‘‘… अभी तक कुछ नहीं हुआ है। उन्हें सर्वोत्तम उपचार मिल रहा है।’’
वांगचुक के वकील ने दलील दी कि उनकी हिरासत पर पुनर्विचार करने का समय आ गया है, क्योंकि उनकी तबीयत अब भी ठीक नहीं है।
न्यायमूर्ति वराले ने कहा कि पिछली बार जब अदालत ने यह सुझाव दिया था, उस वक्त भी यही दलील दी गई थी।
उन्होंने नटराज से कहा, ‘‘समस्याएं हैं, और ऐसा नहीं है कि आप इससे इनकार कर रहे हैं, और वह स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की भी शिकायत कर रहे हैं। डॉक्टर का कहना है कि हां, समस्या है, और अब इलाज चल रहा है। यह स्वीकार किया जाता है कि स्वास्थ्य समस्या है, और हमने पिछले दिन ही यह सुझाव दिया था।’’
एएसजी नटराज ने कहा, ‘‘जहां तक स्वास्थ्य का सवाल है, वह पूरी तरह स्वस्थ हैं… इलाज के लिए जयपुर, लद्दाख से बेहतर जगह है। राजस्थान में एम्स है, जबकि लद्दाख में ऐसा कुछ भी नहीं मिलेगा।’’
न्यायमूर्ति वराले ने कहा, ‘नहीं, नहीं, आप ऐसा नहीं कह सकते।’’
नटराज ने पीठ से अनुरोध किया कि इस मामले पर कल के बाद सुनवाई की जाए।
हालांकि, पीठ ने वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंग्मो द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर बुधवार को सुनवाई करने पर सहमति जताई, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका), 1980 के तहत उनकी हिरासत को अवैध घोषित करने की मांग की गई है।
पीठ ने स्पष्ट किया कि आगे कोई स्थगन नहीं दिया जाएगा।
वांगचुक जोधपुर केंद्रीय जेल में बंद हैं।
पिछले साल 26 सितंबर को वांगचुक को हिरासत में लिया गया था। इससे दो दिन पहले, लद्दाख को राज्य का दर्जा देने और छठी अनुसूची में शामिल करने की मांग को लेकर हुए हिंसक प्रदर्शनों में चार लोगों की मौत होने को लेकर सरकार ने उन पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया था।
भाषा सुभाष सुरेश
सुरेश
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
