नयी दिल्ली, नौ फरवरी (भाषा) ‘बाजार’ फिल्म का गीत ‘दिखाई दिए यूं कि बेखुद किया’, ‘एक नजर’ का लोकप्रिय गीत ‘पत्ता पत्ता बूटा बूटा’ और ‘पाकीजा’ फिल्म का रूह की गहराइयों में उतर जाने वाला नग्मा ‘ये धुआं कहां से उठता है’- ये सब उस जिंदगी, इश्क और मोहब्बत के सदके थे जो मीर को कभी नसीब नहीं हुए।
आज भी बहुत से लोग इस बात से बेखबर हैं कि जिस शायरी को बॉलीवुड फिल्मों ने अमर कर दिया, वो दरअसल करीब 300 साल पहले मीर तकी मीर की कलम से निकली थी। आगरा को छोड़कर दिल्ली की गलियों को अपना नसीब बनाने वाले मीर को एक पीढ़ी बाद चलकर खुद गालिब ने भी सराहा था।
मीर कभी (1722-1810) पुरानी दिल्ली की जिन गलियों से होकर गुजरे थे, उन्हीं गली कूचों में एक बार फिर से उनकी शायरी ने सरगोशियां कीं। शायद ये वही जगह थी, जहां मीर और उनकी शायरी का ठिकाना हुआ करता था।
पिछले दिनों इसी खूबसूरत और गहमागहमी भरी पुरानी दिल्ली में आसफ अली रोड पर स्थित होटल ब्रॉडवे में फिर से खोले गए रेस्त्रां ‘चोर बिजार’ में अनुवादक, शायर और विद्वान अनीसुर रहमान की नयी किताब ‘एसेंशियल मीर’ का लोकार्पण किया गया।
लोकार्पण के बाद शहर के सांस्कृतिक ताने-बाने में आज भी गूंजती मीर की शायरी पर गुफ्तगू हुई। आगरे से आने के बाद मीर ने अपनी जिंदगी का अधिकतर वक्त यहीं बिताया, लेकिन आखिरी दिनों में वह लखनऊ जा बसे, लेकिन उन्हें हमेशा इसका अफसोस रहा।
गालिब ने मीर के बारे में लिखा था,‘‘
रेख्ता क्या तुम्हीं उस्ताद नहीं हो गालिब,
कहते हैं, अगले जन्म में कोई मीर भी था।
इस मौके पर रहमान ने दास्तानगोई कलेक्टिव के दारैन शाहिदी के साथ चर्चा में शेरों के जरिए मीर की जिंदगी की एक शायराना तस्वीर बुनी। मीर की शायरी आज तक लोकप्रिय है, खासतौर पर उनकी वे बंदिशें जो धर्मनिरपेक्षता की पैरवी करती हैं।
मीर को जिस शाम याद किया गया, उसे जावेद अख्तर, वरिष्ठ अदाकारा शर्मिला टैगोर और शबाना आजमी जैसी हस्तियों ने रौशन किया।
रहमान की किताब में मीर के श्रेष्ठ 200 शेरों को शामिल किया गया है और साथ ही आज के दौर के पाठकों को समझने में मदद के लिए उन पर आलोचनात्मक टिप्पणियां भी की गई हैं।
‘राह ए दूर इश्क में रोता है क्या,
आगे आगे देखिए होता है क्या’
‘अब तो जाते हैं बुत कदे से मीर,
फिर मिलेंगे, अगर खुदा लाया।’
‘आग थे इब्तिदा ए इश्क में हम,
अब जो हैं खाक इम्तिहां है या।’
मीर की कुछ ही ऐसी ही उम्दा और बेहतरीन नज्मों, गजलों और शेरों को किताब में शामिल किया गया है।
इस रेस्त्रां को चलाने वाली कंपनी ओल्ड वर्ल्ड हॉस्पिटैलिटी के संस्थापक अध्यक्ष रोहित खट्टर ने बताया, ‘‘ चोर बिजार अपने 35 साल पूरे कर रहा है और इस मौके पर हम दिल्ली की संस्कृति को इसका अभिन्न हिस्सा बनाने पर काम कर रहे हैं, जहां भोजन, विचार, विरासत और साझा यादों का जश्न मनाया जा सके।’’
भाषा
नरेश दिलीप
दिलीप
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
