अगर आप आत्महत्या के विचारों से जूझ रहे हैं या बहुत उदास महसूस कर रहे हैं, तो कृपया अपने राज्य में उपलब्ध किसी हेल्पलाइन नंबर पर कॉल करें.
नई दिल्ली: “हम अपने परिवार वालों से उतना प्यार नहीं करते थे, जितना कोरियन एक्टर्स और के-पॉप ग्रुप्स से करते थे…आप कभी समझ ही नहीं पाए कि हम उनसे (कोरियंस से) कितना प्यार करते थे. अब सबूत देख लिया? क्या अब आपको यकीन हो गया कि कोरियन (कल्चर) और के-पॉप ही हमारी पूरी दुनिया थे?” ये लाइनें उस आखिरी नोट का हिस्सा थीं, जो बुधवार तड़के गाजियाबाद की एक इमारत की नौवीं मंज़िल से कूदकर जान देने वाली तीन बहनों ने छोड़ा था.
आखिरी नोट में यह लाइन भी मिली: “कोरियन (पॉप कल्चर) ही हमारी ज़िंदगी था. आपने उसे हमसे छीनने की कोशिश कैसे की?” आखिरी नोट की बातें दिखाती हैं कि 12, 14 और 16 साल की ये लड़कियां कोरियन पॉप कल्चर को लेकर किस हद तक जुनूनी थीं.
शुरुआती जांच में पता चला कि घर में कुल नौ लोग रहते थे—पिता, उनकी दो पत्नियां (जो आपस में बहनें हैं), एक तीसरी महिला जो पत्नियों की बहन है और पांच बच्चे.
पुलिस को दिए शुरुआती बयानों में परिवार ने कहा कि घर के पांचों बच्चे स्कूल नहीं जाते थे. बुधवार को जान देने वाली 16-वर्षीय लड़की सबसे बड़ी थी. 14 और 12 साल की लड़कियां पिता की दूसरी पत्नी से हुई बेटियां थीं.

पुलिस ने किसी भी तरह की साज़िश या गड़बड़ी से इनकार किया है और तीनों बच्चों के शवों को मौत के सही कारणों का पता लगाने के लिए जांच के लिए भेज दिया गया है. गाजियाबाद ट्रांस-हिंडन के डीसीपी निमिष पाटिल ने दिप्रिंट को बताया कि बहनें कोरियन पॉप कल्चर से “इन्फ्लुएंस” थीं.
उन्होंने कहा, “तीनों बहनें कोरियन कल्चर से काफी इन्फ्लुएंस थीं, जिसमें गाने, फिल्में, टीवी शो और कुल मिलाकर पूरा पॉप कल्चर शामिल था. जब परिवार को इसकी गंभीरता समझ में आई—यहां तक कि वे कोरियन कल्चर अपनाने लगी थीं, जैसे अपने नाम—तो करीब पांच दिन पहले उन्हें मोबाइल फोन इस्तेमाल करने से रोक दिया गया.”
उन्होंने आगे कहा, “आत्महत्या नोट और परिवार के बयानों के मुताबिक यही एकमात्र वजह थी, जिसके चलते उन्होंने यह कदम उठाया. फिलहाल किसी तरह की साज़िश नहीं है और यह साफ तौर पर आत्महत्या का मामला लगता है.” हालांकि, लड़कियों का कोरियन कल्चर को लेकर जुनून शायद सिर्फ ऊपर से दिखने वाली बात हो, जैसा कि उनके कमरे की दीवार पर लिखे शब्दों से भी साफ होता है.
‘हम खुद को अकेला महसूस करते हैं’
गाजियाबाद के भारत सिटी रिहायशी परिसर के फ्लैट नंबर 907 में उनके कमरे की एक दीवार पर लिखा था: “We are alone” और “we feel lonely” (हम अकेले हैं और हमें अकेलापन महसूस होता है). एक सूत्र के मुताबिक, जो आखिरी नोट से वाकिफ है, उसमें यह लाइन भी लिखी थी: “क्या हम इस दुनिया में सिर्फ इसलिए आए हैं कि आप हमें मारें-पीटें? नहीं, हमें ऐसा व्यवहार सहने से बेहतर मौत मंज़ूर है.”
परिवार को जानने वाले लोगों ने बताया कि बच्चों की भावनात्मक और मानसिक स्थिति पर परिवार का ध्यान शायद नहीं गया. वहीं पिता उस स्टॉकब्रोकिंग के कारोबार से जूझ रहे थे, जिसे उन्होंने कुछ समय पहले ही शुरू किया था.

यूपी पुलिस सूत्रों ने बताया कि सबसे बड़ी लड़की कोविड-19 महामारी से पहले चौथी क्लास की परीक्षा पास नहीं कर पाई थी. एक पुलिस अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “न तो बच्चे महामारी के बाद स्कूल लौटे और न ही पिता के पास, जैसा कि उन्होंने शुरुआती बयानों में खुद माना—उनकी पढ़ाई का खर्च उठाने की क्षमता थी.”
औपचारिक शिक्षा और किसी रोज़मर्रा की दिनचर्या की कमी के कारण बच्चों का परिवार के बाहर लोगों से मेलजोल बहुत कम था. उन्होंने यह कमी अपने माता-पिता के मोबाइल फोन पर देखे जाने वाले कंटेंट से पूरी की. पुलिस को शक है कि पिछले कुछ सालों में वे कोरियन पॉप कल्चर के प्रति जुनूनी हो गए और इसके अलग-अलग पहलुओं में डूबते चले गए.
उनके कमरे से मिले कथित आखिरी नोट में बहनों ने कोरियन ड्रामा के अलावा उन टीवी शोज़ और कार्टूनों की एक सूची भी छोड़ी थी, जिन्हें वे देखा करती थीं. इसमें “The Baby In Yellow” और “Evil Nun: Scary Horror Game” जैसे गेम्स, साथ ही डोरेमॉन और शिनचैन जैसे कार्टून शामिल थे. सूची में हॉलीवुड गानों के साथ-साथ चीनी और थाई सिनेमा का भी ज़िक्र था.
पुलिस सूत्रों ने आगे बताया कि बहनें घर में कोरियन पॉप कल्चर को पूरी तरह अपनाना चाहती थीं, जिसमें उनका भाई भी शामिल हो, लेकिन माता-पिता को यह मंज़ूर नहीं था.
सूत्रों के मुताबिक, बहनों ने भारतीय पुरुषों से शादी करा दिए जाने के डर और बॉलीवुड फिल्मों व गानों से अपनी नापसंदगी के बारे में भी लिखा था. एक अन्य पुलिस अधिकारी ने कहा, “फोन छीनने के बाद उन्हें यह धमकी भी दी गई थी कि कोरियन कल्चर और उससे जुड़े शोज़ का जुनून छुड़ाने के लिए उनकी शादी कर दी जाएगी.” अधिकारी ने बताया कि शायद इसी वजह से उन्होंने आखिरी नोट में शादी वाली बात भी शामिल की.
आधी रात का शोर, फिर अफरा-तफरी
4 फरवरी की रात करीब 2 बजे कुमार ओंकारेश्वर ने चीखें सुनीं, इसके बाद एक तेज़ आवाज़ आई, जिसे उन्होंने पहले पटाखा समझा. घटना को याद करते हुए उन्होंने दिप्रिंट से कहा, “जब एक मिनट के भीतर चीखें और तेज़ हो गईं, तो मुझे शक हुआ और मैंने बालकनी से देखा. मैंने देखा कि ग्राउंड फ्लोर पर कुछ लोग दर्द से रो रहे थे और मदद मांग रहे थे.”
पेशे से वकील कुमार बी-1 टॉवर की चौथी मंज़िल पर रहते हैं. लड़कियां और उनका परिवार इसी टॉवर की नौवीं मंज़िल पर रहता था.

कुमार ने बताया कि परिवार बहुत कम बोलने वाला था, लेकिन यह “सबको पता” था कि उनकी आर्थिक हालत अच्छी नहीं थी. हाउसिंग सोसायटी के संयुक्त सचिव राहुल झा के मुताबिक, करीब 15 टावरों वाली इस सोसायटी, जहां हर टावर में लगभग 12 मंज़िलें हैं, में यह परिवार करीब तीन साल पहले शिफ्ट हुआ था. एक निवासी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “परिवार का सोसायटी के किसी और सदस्य से बहुत कम या बिल्कुल भी संपर्क नहीं था.”
उस निवासी ने यह भी दावा किया कि लड़कियों के पिता सोसायटी के व्हाट्सऐप ग्रुप का भी हिस्सा नहीं थे.
घटना के शायद इकलौते चश्मदीद, पास के टॉवर की 10वीं मंज़िल पर रहने वाले अरुण सिंह ने बताया कि तीनों में सबसे बड़ी लड़की सबसे पहले खिड़की से पीठ के बल गिरी. उन्होंने बुधवार को मीडिया से कहा, “इसके बाद बीच वाली बहन खिड़की से गिरी और आखिर में सबसे छोटी भी उसी जगह से नीचे गिरी.”
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