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Thursday, 5 February, 2026
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बुलडोजर बाबा से आर्थिक सुधारक तक—कैसे योगी आदित्यनाथ 2027 के चुनाव के लिए नया अवतार अपना रहे हैं

आज लखनऊ में सत्ता के गलियारे आपको हैरान कर सकते हैं. सीएम योगी आदित्यनाथ के पास हर डिपार्टमेंट के काम को ट्रैक करने के लिए एक डैशबोर्ड है.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उत्तर प्रदेश के एक अटल आवासीय विद्यालय के छात्र मुहम्मद इरफान के साथ एक दिलचस्प बातचीत हुई. इस स्कूल का उन्होंने 2023 में उद्घाटन किया था. बताया जाता है कि पीएम इन आवासीय स्कूलों से बहुत प्रभावित थे. यह स्कूल योगी आदित्यनाथ सरकार ने निर्माण श्रमिकों, मज़दूरों और कोविड-19 महामारी में अनाथ हुए बच्चों के लिए 1,100 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनवाए थे.

प्रधानमंत्री ने इरफान से पूछा, “तुम जीवन में क्या करना चाहते हो?” उसने जवाब दिया, “मैं योगीजी की पुलिस में शामिल होना चाहता हूं.” मोदी ने जिज्ञासु होकर पूछा, “योगीजी की पुलिस! क्यों?” इरफान ने कहा, “क्योंकि वह माफियाओं को खत्म करते हैं.” यह लड़का गाजीपुर का था, वही जगह जहां गैंगस्टर से नेता बने मुखतार अंसारी का कभी राज रहा था.

यह कहानी, जो मुझे पिछले सप्ताह लखनऊ में सुनाई गई, में हैरानी की कोई बात नहीं थी. अपराधियों का एनकाउंटर में मारा जाना और उनके अवैध निर्माण और घरों को ढहाना 2022 के विधानसभा चुनाव में बहुत असरदार रहा था. इसके कारण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लोग ‘बुलडोज़र बाबा’ बुलाने लगे.

चार साल बाद भी ये उपनाम लोगों की बातचीत में रहता है, लेकिन योगी नेतृत्व वाली सरकार आगे बढ़ चुकी है. आज लखनऊ की सत्ता गलियारों में अधिकतर बातचीत ‘रिफॉर्म्स एक्सप्रेस’ की गति के इर्द-गिर्द है. जब मैं पिछले हफ्ते मुख्यमंत्री योगी से उनके आवास पर मिलने गया, तो मैं सोच रहा था कि कई विवादों पर उनकी प्रतिक्रिया दिलचस्त होगी—जैसे यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन के नए इक्विटी नियम, जिनका कई ब्राह्मण नेताओं ने विरोध किया, खासकर यूपी में.

उत्तराखंड के ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद फिर सुर्खियों में थे. इसके अलावा, कई मजेदार राजनीतिक गॉसिप भी थे—जैसे कि उनके उपमुख्यमंत्री केशव मौर्य हमेशा अपने बॉस को कमज़ोर करने की कोशिश क्यों करते हैं. जब अविमुक्तेश्वरानंद, जिन्होंने पहले मोदी पर हमला किया था, योगी पर निशाना साधने लगे, मौर्य ने कहा कि वाह “भगवान शंकराचार्य” के चरणों में प्रार्थना करते हैं और उन्हें अपमानित नहीं किया जा सकता.

इसके अलावा योगी ने ‘उत्तर प्रदेश दिवस’ समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को मुख्य अतिथि के रूप में बुलाए जाने के बारे में भी काफी जिज्ञासा थी.

राजनीति पर बहुत कुछ चर्चा करने के लिए था, लेकिन जब मैं योगी आदित्यनाथ से मिला, उनकी राजनीति पर बात करने में कोई रुचि ही नहीं थी. वह केवल यूपी की अर्थव्यवस्था, उनकी सरकार द्वारा किए गए सुधार और राज्य को 2029-30 तक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की अपनी योजनाओं के बारे में ही बात करना चाहते थे. 2017 में जब उन्होंने राज्य की कमान संभाली, तब इसकी कुल अर्थव्यवस्था लगभग 12 लाख करोड़ रुपये थी. अनुमान है कि आज यह पहले ही 36 लाख करोड़ रुपये तक तीन गुना बढ़ चुकी है.

अर्थव्यवस्था, नीतियां और कार्यक्रम

उनसे मेरी बातचीत ने मुझे कुछ साल पहले की वह बैठक भी याद दिला दी, जब मैं एक चुनिंदा पत्रकारों के समूह के हिस्से के रूप में प्रधानमंत्री मोदी से अरुण जेटली के आवास पर मिला था. पीएम इतने उत्साह के साथ अपनी सरकार की योजनाओं और कार्यक्रमों के बारे में आंकड़े और तथ्य गिनाते हुए बात कर रहे थे कि हमारा सिर घूम गया. वह राजनीति के बारे में बात नहीं करना चाहते थे. मैंने उनसे पूछा कि क्या उन्होंने वह किताब पढ़ी है जो उनके पीछे बुकशेल्फ पर रखी थी—संजय बारू की ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’. उन्होंने ना में सिर हिलाया.

मैंने कहा कि लेखक उनके पूर्व प्रधानमंत्री, मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार थे. मैंने उनसे पूछा, “क्या आप उस पद के लिए किसी को नियुक्त करने का सोच रहे हैं?” पीएम मोदी ने लगभग मासूमियत से पूछा, “ये मीडिया एडवाइज़र क्या करते हैं जी?” हम सभी दंग रह गए. उस कमरे में कुछ कंधे झुकते नज़र आए. कई पत्रकारों के सपने बिखर चुके थे. पीएम मोदी ने अपनी योजनाओं और कार्यक्रमों की बात फिर से शुरू की. यह बातचीत दो घंटे से ज्यादा चली. सालों बाद भी, यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मुझे उसी बातचीत की याद दिलाई—कोई राजनीति नहीं, सिर्फ अर्थव्यवस्था, नीतियां और कार्यक्रम. दोनों स्पष्ट रूप से शासन की कला और तकनीक को पसंद करते हैं.

मैंने लखनऊ में तीन दिन वरिष्ठ यूपी सरकारी अधिकारियों से बातचीत में बिताए. 2022 में, जब योगी ने अपने दूसरे कार्यकाल की कमान संभाली थी, तब भी उनके दृष्टिकोण में बदलाव के संकेत साफ दिख रहे थे.

वह अपनी सरकार की छवि को नया रूप देने के लिए तैयार थे और पूरी तरह ध्यान अर्थव्यवस्था पर केंद्रित कर रहे थे. ढाई-तीन साल बाद, इसके परिणाम सभी के सामने हैं. उनके कार्यकाल में आए 45 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों में से, एक-तिहाई का शिलान्यास पहले ही हो चुका है और अतिरिक्त 6 लाख करोड़ रुपये के लिए अगला शिलान्यास अगले कुछ हफ्तों में निर्धारित है. इसका मतलब है कि कुल एमओयू का लगभग 50 प्रतिशत ज़मीन पर साकार हो चुका है, जो एक शानदार सफलता दर है. जबकि नई एमओयू भी हो रही हैं—पिछले महीने दावोस में विश्व आर्थिक मंच की बैठक के दौरान करीब 3 लाख करोड़ रुपये की—सरकार का ध्यान इन्हें ज़मीन पर उतारने पर है.

योगी जापान और सिंगापुर का दौरा करेंगे

लखनऊ की सत्ता गलियारों में आज आपको आश्चर्य हो सकता है. जब आप वरिष्ठ अफसरों से बातचीत करते हैं, तो उनमें एक उद्देश्य और तत्परता दिखती है. योगी के पास हर विभाग के काम को ट्रैक करने के लिए एक डैशबोर्ड है. वह इसे लगातार देखते रहते हैं. सुबह योग और प्रार्थना के बाद उनका पहला कॉल लगभग 6 बजे अपने अफसरों और मंत्रियों को होता है.

देखिए, यूपी को ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस में बेस्ट बनाने के लिए योगी सरकार ने क्या-क्या किया है. यूपी जनवरी 2026 में केंद्रीय सरकार के कंप्लायंस रिडक्शन अभ्यास के डीरगुलेशन फेज़-I में शीर्ष राज्य रहा. मैं सिर्फ कुछ उदाहरण देता हूं.

सरकार ने कई क्लियरेंस के लिए थर्ड-पार्टी मेकैनिज़म लागू किया है. बिल्डिंग प्लान्स को मंज़ूरी देने के लिए 3,000 से अधिक लाइसेंसधारी तकनीकी व्यक्तियों को रखा है, जिससे कई विभागीय निरीक्षण खत्म हो गए. प्रदूषण प्रमाणन के लिए 15 सरकारी संस्थानों को पैनल में शामिल किया गया. फायर सेफ्टी का निरीक्षण मान्यता प्राप्त थर्ड पार्टी के जरिए किया गया. लेबर कोड्स के लागू होने के अलावा, कई अन्य महत्वपूर्ण सुधार हुए हैं, जो यूपी में निवेश का माहौल बदल रहे हैं.

सरकार ने महिलाओं को रात में काम करने की अनुमति दी है, जोखिम भरे सेक्टरों में भी. साप्ताहिक काम के घंटों की सीमा बढ़ाकर 10 घंटे प्रति दिन कर दी गई है. सभी विभागीय सेवाओं को सिंगल विंडो सिस्टम में शामिल किया गया, जिसे निबेश 3.0 में अपग्रेड किया गया है. यह प्लेटफॉर्म शिलान्यास से वाणिज्यिक उत्पादन तक निवेशक यात्रा की एंड-टू-एंड ऑनलाइन ट्रैकिंग और निश्चित सेवा समय प्रदान करता है.

असल में, अफसरों के अनुसार, यूपी को एक बड़ा निवेश केंद्र बनाने की ज़मीन तैयार हो चुकी है. अब ध्यान और अधिक निवेशक लाने पर है. दावोस में, यूपी के डेलिगेशन ने ग्लोबल कॉर्पोरेट जगत की जानी-मानी हस्तियों के साथ 151 मीटिंग्स कीं—इनमें से कुछ नाम हैं, गूगल क्लाउड के सीईओ थॉमस कुरियन, पेप्सिको की कैरोलिन बर्सन, लुई ड्रेफस कंपनी के ग्रुप सीएसओ थॉमस कुटोडियर और कल्ड्रन की सीईओ मिशेल स्टैनफील्ड.

उन्होंने नोबेल पुरस्कार विजेता और अर्थशास्त्री माइकल स्पेंस से भी मुलाकात की. उन्होंने यूपी प्रतिनिधिमंडल को कहा कि उन्हें इनोवेशन-बेस्ड डेवलपमेंट पर ध्यान देना चाहिए.

यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के अध्यक्ष और प्रोवोस्ट और स्टैनफोर्ड ग्रेजुएट स्कूल ऑफ बिज़नेस के पूर्व डीन स्पेंस ने कहा, अगर यूपी विश्व के रिसर्च संस्थान लाना चाहता है, तो इसे उद्योगों को शामिल करना चाहिए.

योगी इस महीने बाद में जापान और सिंगापुर जाएंगे ताकि निवेशकों को आकर्षित कर सकें. इसके बाद अगस्त में 200 जापानी सीईओ लखनऊ का दौरा करेंगे. मूल रूप से, हिंदुत्व के मास्कट और ‘बुलडोज़र बाबा’ अगले साल के चुनाव में एक नए रूप में आर्थिक सुधारक के तौर पर आगे बढ़ने की तैयारी कर रहे हैं. वह उम्मीद कर रहे हैं कि महत्वाकांक्षी यूपी जातिगत विचारों से ऊपर उठकर उन्हें नया जनादेश देगा.

डीके सिंह दिप्रिंट के पॉलिटिकल एडिटर हैं. उनका एक्स हैंडल @dksingh73 है. व्यक्त किए गए विचार निजी हैं.

(इस लेख को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)

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