नयी दिल्ली, तीन फरवरी (भाषा) उच्च आय वाले राष्ट्रों द्वारा मानवीय एवं विकास सहायता राशि में कटौती के ‘‘भयावह’’ परिणाम हो सकते हैं और इसके चलते 2030 तक निम्न एवं मध्यम आय वाले देशों में 54 लाख बच्चों सहित 2.26 करोड़ लोगों की मौत हो सकती है। ‘द लांसेट ग्लोबल हेल्थ’ पत्रिका में प्रकाशित एक विश्लेषण में यह दावा किया गया है।
स्पेन के बार्सिलोना इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल हेल्थ (आईएसग्लोबल) के शोधार्थियों सहित अन्य शोधकर्ताओं के अनुसार, 2023 में कुल 250 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक की वित्तीय सहायता, जिसे ‘सरकारी विकास सहायता’ कहा जाता है, में से लगभग 70 प्रतिशत योगदान अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, जापान और ब्रिटेन से आया था।
हालांकि, अध्ययन दल ने कहा कि 2024 लगभग तीन दशकों में ऐसा पहला साल था, जब जापान को छोड़कर प्रमुख दानदाता देशों ने अपनी वित्तीय सहायता में कमी की तथा 2025 के लिए भी कटौती की योजना बनाई।
शोधकर्ताओं ने कहा कि प्रारंभिक अनुमान प्रमुख दानदाता देशों द्वारा और भी कटौती किये जाने की ओर इशारा करते हैं और 2025 से 2026 तक इसमें कुल 11 प्रतिशत से अधिक की कमी किये जाने का अनुमान है।
अध्ययन में पाया गया कि अधिक मात्रा में वित्तीय सहायता सभी कारणों से होने वाली मृत्यु की दर में 23 प्रतिशत और पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर में 39 प्रतिशत की कमी से जुड़ी हुई है।
उच्च आय वाले देशों से मिलने वाली धनराशि एचआईवी/एड्स, मलेरिया और उष्णकटिबंधीय रोगों सहित प्रमुख संक्रामक रोगों से संबंधित मृत्यु दर में भारी गिरावट तथा तपेदिक, दस्त संबंधी रोगों और प्रसव के दौरान होने वाली मौतों में कमी से भी जुड़ी हुई है।
शोधकर्ताओं ने लिखा, ‘‘पिछले दो दशकों में निम्न और मध्यम आय वाले देशों में टाली जा सकने वाली मृत्यु दर को कम करने में सरकारी विकास सहायता (ओडीए) निधि ने निर्णायक भूमिका निभाई है, और इस सहायता राशि को अचानक रोके जाने से लाखों लोगों की मौत होने का खतरा है, जिससे वैश्विक स्वास्थ्य में दशकों में हासिल की गई प्रगति अत्यधिक प्रभावित होगी।’’
जुलाई 2025 में ‘द लांसेट’ पत्रिका में प्रकाशित अध्ययन में उल्लेख किया गया कि मानवीय और विकास सहायता के लिए दुनिया की सबसे बड़ी वित्त पोषण एजेंसी, यूनाइटेड स्टेट्स एजेंसी फॉर इंटरनेशनल डेवलपमेंट (यूएसएड) को भंग करने से 2030 तक दुनिया भर में 1.4 करोड़ टाली जा सकने वाली मौतें हो सकती हैं, जिनमें से एक तिहाई मौतें पांच साल से कम उम्र के बच्चों की हो सकती हैं।’’
शोधकर्ताओं ने कहा, ‘‘हमारे अनुसार, अत्यधिक वित्तीय कटौती की स्थिति में 2030 तक सभी आयु वर्ग में 2.26 करोड़ मौतें होंगी जिनमें पांच साल से कम आयु के 54 लाख बच्चे भी शामिल हैं।’’
भाषा सुभाष नरेश
नरेश
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
