हैदराबाद, दो फरवरी (भाषा) राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि देश में अवैध रूप से प्रवेश करने वाले बांग्लादेशियों और रोहिंग्या की पहचान करना और उन्हें वापस भेजना सरकार की जिम्मेदारी है।
भागवत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में देश अपने-अपने हितों से चलते हैं, भारत को भी बिना किसी समझौते के अपने हितों के अनुसार अपनी राह तय करनी चाहिए।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रमों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए देश को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत होना चाहिए।
आरएसएस की सोमवार को जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार, भागवत ने शहर की अपनी यात्रा के दौरान संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर रविवार को आयोजित ‘संघ यात्रा के 100 वर्ष – नए क्षितिज’ विषय पर एक कार्यक्रम में शिरकत की और फिल्मी हस्तियों तथा वरिष्ठ नौकरशाहों से मुलाकात की।
देश में बांग्लादेशियों और रोहिंग्या की अवैध घुसपैठ के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि अवैध प्रवासियों की पहचान करना और उन्हें वापस भेजना सरकार की जिम्मेदारी है और नागरिक इसे अधिकारियों के संज्ञान में ला सकते हैं।
भागवत ने कहा कि दुनिया में जारी ‘उथल-पुथल’ के परिणामों का भारत पर न्यूनतम प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि यहां की पारिवारिक व्यवस्था, सोने की बचत और आर्थिक गतिविधियां परिवार-उन्मुख हैं।
संघ प्रमुख ने कहा कि आरएसएस को समझने के लिए संघ का हिस्सा बनकर अनुभव प्राप्त करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि कोई आरएसएस को सतही तौर पर समझता है, तो उसे गलत समझा जा सकता है। उन्होंने कहा कि संघ इस बात पर जोर देता है कि राष्ट्र के विकास में नागरिकों को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है, जबकि सरकारें, पार्टियां और नेता अपनी भूमिका निभाते हैं।
विज्ञप्ति में उनके हवाले से कहा गया, ‘संघ का सिद्धांत उत्कृष्ट राष्ट्र-निर्माण के उद्देश्य के साथ व्यक्तिगत विकास है।’
उन्होंने राष्ट्र की व्यापक प्रगति के लिए आरएसएस द्वारा परिकल्पित ‘पंच परिवर्तन’ के बारे में विस्तार से चर्चा की।
भागवत ने इसके पांच घटकों – कुटुंब प्रबोधन (पारिवारिक जागरण), पर्यावरण संरक्षण, सामाजिक समरसता, स्वदेशी और नागरिक कर्तव्यों के बारे में जानकारी दी।
भाषा नोमान दिलीप
दिलीप
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