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Thursday, 5 March, 2026
होमदेशअंधविश्वास को विज्ञान बताकर पेश करना वैज्ञानिक चेतना के लिए खतरा: पिनराई विजयन

अंधविश्वास को विज्ञान बताकर पेश करना वैज्ञानिक चेतना के लिए खतरा: पिनराई विजयन

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कोच्चि, एक फरवरी (भाषा) केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने रविवार को अंधविश्वास और प्रतिगामी परंपराओं को महिमामंडित करने के प्रयासों के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा कि मिथकों और किंवदंतियों की अतार्किक कहानियों को प्राचीन वैज्ञानिक खोज बताकर पेश करना समाज में वैज्ञानिक चेतना और तर्कशील सोच के लिए गंभीर खतरा है।

मुख्यमंत्री ने यहां 38वीं केरल विज्ञान कांग्रेस का उद्घाटन करते हुए कहा कि समाज को अंधविश्वास और अवैज्ञानिक प्रथाओं को पुनर्जीवित करने के प्रयासों का सक्रिय रूप से विरोध करना चाहिए।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि गैर-तार्किक पौराणिक दावों को ऐतिहासिक आविष्कारों के रूप में पेश करने वाले विमर्शों को खुले तौर पर बेनकाब करना जरूरी है।

विजयन ने कहा कि ऐसी प्रवृत्तियों का मुकाबला करने के लिए वैज्ञानिक ज्ञान और शोध का प्रभावी उपयोग करते हुए सार्थक चर्चाएं बेहद आवश्यक हैं।

उन्होंने कहा, “जो कोई भी समाज को प्रगतिशील दिशा में बदलने की विज्ञान की क्षमता में विश्वास करता है, उसे मानवतावाद के पक्ष में मजबूती से खड़ा होना चाहिए।”

मुख्यमंत्री के अनुसार, विज्ञान कांग्रेस जैसे कार्यक्रम तभी प्रासंगिक बनते हैं, जब यह दृष्टिकोण व्यापक समाज तक पहुंचे। इसके लिए केवल वैश्विक तकनीकी प्रगति की जानकारी पर्याप्त नहीं है, बल्कि विज्ञान के वास्तविक इतिहास की समझ भी उतनी ही जरूरी है।

विजयन ने कहा कि समाज को यह समझना होगा कि विज्ञान किन परिस्थितियों में विकसित हुआ, कैसे यह विभिन्न विषयों में विभाजित हुआ और किस प्रकार पीढ़ियों से वैज्ञानिक ज्ञान का उपयोग मानव जीवन को बदलने में किया गया।

उन्होंने कहा, “ऐसे समय में जब विज्ञान के इतिहास को मिथकों और अफवाहों से जोड़ने के प्रयास हो रहे हैं, प्रमाण-आधारित और सही ऐतिहासिक समझ विकसित करना अनिवार्य हो गया है।”

इस अवसर पर इसरो के अध्यक्ष वी. नारायणन ने अपने संबोधन में कहा कि केरल ने भारत के विकास में निर्णायक भूमिका निभाई है।

उन्होंने 1947 में स्वतंत्रता के समय की परिस्थितियों को याद करते हुए कहा कि उस समय देश गरीबी, कम औसत आयु, अधिक मृत्यु दर, सीमित औद्योगीकरण और कमजोर तकनीकी ढांचे जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा था।

नारायणन ने कहा कि उस समय भारत में औसत जीवन प्रत्याशा केवल 32 वर्ष थी, शिशु मृत्यु दर अत्यंत अधिक थी और लगभग 80 प्रतिशत आबादी गरीबी रेखा से नीचे जीवनयापन कर रही थी।

नारायणन ने कहा कि उन परिस्थितियों से निकलकर भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है और औसत जीवन प्रत्याशा बढ़कर लगभग 70 वर्ष हो गई है, मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी आई है तथा भारत दुनिया की प्रमुख आर्थिक शक्तियों में शामिल हो गया है।

उन्होंने कहा कि देश अब कई परमाणु ऊर्जा संयंत्र संचालित कर रहा है और इसने सुरक्षित एवं विश्वसनीय तकनीकी प्रणालियां विकसित की हैं।

उद्घाटन समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने वर्ष 2024 का केरल विज्ञान पुरस्कार डॉ. टेसी थॉमस को प्रदान किया।

मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पुरस्कार भी प्रदान किए, जिनमें केरल राज्य युवा वैज्ञानिक पुरस्कार, सर्वश्रेष्ठ वैज्ञानिक पुरस्कार तथा विज्ञान साहित्य और मीडिया से जुड़े पुरस्कार शामिल हैं।

राज्य के उद्योग मंत्री पी. राजीव ने स्वागत भाषण दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता केरल राज्य विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं पर्यावरण परिषद के कार्यकारी उपाध्यक्ष प्रो. के.पी. सुधीर ने की।

भाषा राखी नेत्रपाल

नेत्रपाल

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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