नयी दिल्ली, 28 जनवरी (भाषा) केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने फार्मा उद्योग को सुदृढ़ बनाने के मकसद से नए औषधि एवं क्लीनिकल परीक्षण नियमों, 2019 में संशोधनों को अधिसूचित किया है।
नए नियमों के तहत अब दवा कंपनियों को अनुसंधान और विश्लेषण के सिलसिले में कम मात्रा में दवाओं के निर्माण के लिए परीक्षण लाइसेंस लेने की आवश्यकता नहीं होगी। हालांकि, इसके लिए उन्हें कुछ मामलों को छोड़कर केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) को ऑनलाइन सूचना देनी होगी।
मंत्रालय ने कहा कि ये संशोधन नियामकीय बोझ को कम करने और व्यापार सुगमता को बढ़ावा देने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निर्देशों के अनुरूप किए गए हैं।
मौजूदा नियामकीय ढांचे के तहत दवा कंपनियों को परीक्षण, अनुसंधान या विश्लेषण के उद्देश्य से कम मात्रा में दवाओं के निर्माण के लिए केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) से परीक्षण लाइसेंस लेना अनिवार्य होता है।
मंत्रालय को उम्मीद है कि इस संशोधन से दवा तैयार करने की प्रक्रिया में कम से कम 90 दिन की बचत होगी, जिससे औषधि अनुसंधान और नवाचार को उल्लेखनीय बढ़ावा मिलेगा। वहीं, जिन श्रेणियों में परीक्षण लाइसेंस की आवश्यकता बनी रहेगी, उनके लिए वैधानिक प्रसंस्करण अवधि को 90 दिनों से घटाकर 45 दिन कर दिया गया है।
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जोहेब धीरज
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