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नयी दिल्ली, 28 जनवरी (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को कहा कि सरकार सेमीकंडक्टर के अलावा महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में ‘मिशन मोड’ पर काम कर रही है।
राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन का मकसद इन खनिजों के लिए अन्य देशों पर निर्भरता को कम करना है। सरकार ने पिछले साल देश के भीतर एवं अपतटीय स्थानों पर महत्वपूर्ण खनिजों की खोज को बढ़ावा देने के लिए 16,300 करोड़ रुपये के राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन (एनसीएमएम) को मंजूरी दी थी।
संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘ चिप के अलावा एक और प्रमुख क्षेत्र है जिसके लिए मेरी सरकार ने ‘मिशन मोड’ में काम करना शुरू कर दिया है। राष्ट्रीय महत्वपूर्ण खनिज मिशन के माध्यम से महत्वपूर्ण खनिजों के लिए अन्य देशों पर निर्भरता कम की जा रही है।’’
राष्ट्रपति की टिप्पणियां लिथियम, कोबाल्ट, निकेल और दुर्लभ पृथ्वी तत्वों जैसे महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति सुरक्षित करने के लिए देश के रणनीतिक प्रयासों को रेखांकित करती हैं जो इलेक्ट्रिक वाहनों, हरित ऊर्जा, रक्षा एवं उच्च-प्रौद्योगिकी विनिर्माण के लिए महत्वपूर्ण हैं।
एनसीएमएम का उद्देश्य भारतीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों एवं निजी क्षेत्र की कंपनियों को विदेशों में महत्वपूर्ण खनिज संपदाओं का अधिग्रहण करने और संसाधन संपन्न देशों के साथ व्यापार बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित करना है। यह देश के भीतर महत्वपूर्ण खनिजों का भंडार विकसित करने का भी प्रस्ताव करता है।
महत्वपूर्ण खनिज किसी देश की आर्थिक वृद्धि और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए आवश्यक हैं और इनकी अनुपलब्धता या कुछ ही भौगोलिक स्थानों में इनका संकेंद्रण आपूर्ति श्रृंखला में कमजोरियों का कारण बन सकता है।
भाषा निहारिका रमण
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