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Sunday, 25 January, 2026
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वेदांता ने बजट में निम्न-श्रेणी के लौह अयस्क के संवर्धन के लिए नीतिगत प्रोत्साहन का आग्रह किया

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नयी दिल्ली, 25 जनवरी (भाषा) वेदांता की लौह अयस्क खनन शाखा सेसा गोवा ने सरकार से निम्न-श्रेणी के लौह अयस्क के संवर्धन के लिए प्रोत्साहन देने का आग्रह किया है।

कंपनी ने जोर देकर कहा कि प्रसंस्करण को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाने और इस क्षेत्र का विस्तार करने के लिए लक्षित नीतिगत समर्थन और बुनियादी ढांचे में निवेश महत्वपूर्ण है।

लौह अयस्क संवर्धन वह प्रक्रिया है, जो सिलिका, एल्युमिना और फास्फोरस जैसी अशुद्धियों को दूर करके निम्न-गुणवत्ता वाले अयस्कों में लोहे की मात्रा को बढ़ाती है, जिससे वे इस्पात उत्पादन के लिए उपयुक्त हो जाते हैं।

भारत में इस्पात की मांग 2030 तक 30 करोड़ टन तक पहुंचने का अनुमान है। इसलिए संवर्धन के जरिये निम्न-श्रेणी के भंडार का उपयोग घरेलू आपूर्ति सुरक्षा को बढ़ावा दे सकता है, रोजगार पैदा कर सकता है और सरकारी राजस्व में अरबों रुपये की वृद्धि कर सकता है।

कंपनी ने कहा कि इसके लिए शुल्क और नियामक देरी जैसी नीतिगत बाधाओं को दूर किया जाए।

सेसा गोवा के सीईओ नवीन जाजू ने एक बातचीत के दौरान कहा, ”भारत के पास निम्न-श्रेणी के लौह अयस्क का विशाल भंडार है। हालांकि संवर्धन संयंत्रों और सहायक बुनियादी ढांचे के लिए अधिक लागत के चलते इसका उपयोग कम बना हुआ है।”

घरेलू इस्पात उत्पादन के लिए निम्न-श्रेणी के अयस्क को उच्च-श्रेणी के कच्चे माल में बदलने करने के लिए दीर्घकालिक निवेश की आवश्यकता पर जोर देते हुए जाजू ने कहा, ”इस सामग्री के संवर्धन के लिए किसी प्रकार की लाभकारी शुल्क संरचना या प्रोत्साहन संरचना लाने की तत्काल बहुत आवश्यकता है।”

उन्होंने निम्न-श्रेणी के अयस्क पर निर्यात शुल्क का विरोध करते हुए कहा कि भारत को निर्यात शुल्क की कतई आवश्यकता नहीं है, क्योंकि हमारे पास प्रचुर मात्रा में सामग्री है।

भाषा पाण्डेय

पाण्डेय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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