ईटानगर, 24 जनवरी (भाषा) गुवाहाटी उच्च न्यायालय की ईटानगर पीठ ने आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले में आरोपी भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) के अधिकारी तालो पोटोम को दी गई जमानत रद्द कर दी और निर्देश दिया कि उन्हें तत्काल प्रभाव से हिरासत में लिया जाए।
न्यायमूर्ति यारेनजुंगला लोंगकुमेर ने शुक्रवार को जारी आदेश में कहा कि अधीनस्थ अदालत ने पिछले साल नवंबर में आरोपी को जमानत देते समय महत्वपूर्ण सबूतों और कानूनी सिद्धांतों की अनदेखी की।
अदालत ने पूर्व के आदेश को ‘‘विकृत’’ करार देते हुए कहा कि इसे समुचित विचार किए बिना पारित किया गया था।
यह मामला लेखी गांव में किराये के मकान में अक्टूबर 2025 में गोमचू येकार द्वारा की गई आत्महत्या से जुड़ा है। उसके पिता तागोम येकार ने अधिकारी की जमानत रद्द करने का अनुरोध करते हुए उच्च न्यायालय का रुख किया था और आरोपी पर व्यवस्थित तरीके से मानसिक उत्पीड़न एवं यौन शोषण करने तथा भ्रष्टाचार संबंधी दबाव बनाने के आरोप लगाए थे, जिनका उल्लेख मृतक द्वारा छोड़े गए ‘सुसाइड नोट’ में किया गया था।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि आरोपी को गिरफ्तारी के सात दिन के भीतर जमानत दे दी गई जबकि जांच प्रारंभिक चरण में थी। उन्होंने कहा कि ‘डिलीट’ किए गए व्हाट्सऐप संदेशों और ‘वॉइस’ संदेशों की अब भी फॉरेंसिक जांच की जा रही है।
विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अदालत से कहा कि फॉरेंसिक विश्लेषण से पुष्टि हुई है कि ‘सुसाइड नोट’ में लिखावट मृतक की ही है। इसने कहा कि कानून-व्यवस्था संबंधी चिंताओं के कारण पहले हिरासत में पूछताछ नहीं की जा सकी।
उच्च न्यायालय ने कहा कि अधीनस्थ अदालत ने जमानत के चरण में ‘मिनी ट्रायल’ (संक्षिप्त सुनवाई) किया था और गोमचू के मानसिक स्वास्थ्य के बारे में बिना सबूत के अटकलें भी लगाई थीं, इसलिए ऐसे निष्कर्ष अनुचित और कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण थे।
अदालत ने कहा, ‘‘इस अपराध ने समाज की सामूहिक चेतना को झकझोर दिया और इसमें एक प्रभावशाली व्यक्ति का नाम आया। जांच के इतने प्रारंभिक चरण में उसे रिहा करने से जांच पटरी से उतर सकती है।’’
पीठ ने नवंबर 2025 के जमानत आदेश को रद्द कर दिया और आरोपी की तत्काल गिरफ्तारी का निर्देश दिया। पीठ ने हालांकि आरोपी को अधीनस्थ अदालत के समक्ष नयी जमानत के लिए आवेदन करने की छूट दे दी।
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सिम्मी नेत्रपाल
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