scorecardresearch
Saturday, 24 January, 2026
होमदेशकैलाश सत्यार्थी ने सोशल मीडिया के नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए नियमन की वकालत की

कैलाश सत्यार्थी ने सोशल मीडिया के नकारात्मक प्रभाव को कम करने के लिए नियमन की वकालत की

Text Size:

हैदराबाद, 24 जनवरी (भाषा) नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित कैलाश सत्यार्थी ने सोशल मीडिया के नियमन का समर्थन करते हुए शनिवार को कहा कि ऐसा करने से इसके नकारात्मक प्रभाव को कम किया जा सकता है।

हालांकि, सत्यार्थी ने यह भी कहा कि इसके सकारात्मक पहलू भी हैं, जैसे कि यह नैतिक मूल्यों के प्रसार और समुदायों के निर्माण में मदद कर सकता है।

सत्यार्थी की यह टिप्पणी ऑस्ट्रेलिया द्वारा 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाए जाने के निर्णय के संदर्भ में आई है।

हैदराबाद साहित्य महोत्सव में भाग लेने पहुंचे सत्यार्थी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, “मेरा मानना है कि दुनिया में कहीं भी सोशल मीडिया को प्रतिबंधित नहीं किया जाना चाहिए, बल्कि इसे नियमन के तहत रखा जाना चाहिए क्योंकि सोशल मीडिया के माध्यम से झूठ, नफरती विचार, हिंसा, और फर्जी खबरें फैलाई जाती हैं।”

यह पूछे जाने पर कि क्या वह ऑस्ट्रेलिया की तरह भारत में भी बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के पक्ष में हैं, उन्होंने कहा, “हम यह भी देखते हैं कि सोशल मीडिया का दुरुपयोग बच्चों की तस्करी और बाल यौन शोषण के लिए किया जाता है; इन चीजों को नियमन के तहत लाना जरूरी है। सोशल मीडिया के दुरुपयोग को रोका जाना चाहिए।”

आंध्र प्रदेश सरकार ने एक समिति का गठन किया है, जो 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों की ऑनलाइन मंच तक पहुंच को नियंत्रित या पूरी तरह रोकने की संभावना सहित कई चीजों का अध्ययन करेगी।

ऑस्ट्रेलिया 10 दिसंबर 2025 से 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध लगाने वाला पहला देश बन गया है, जिससे विभिन्न मंचों तक उनकी पहुंच अवरुद्ध हो गई।

सत्यार्थी ने कहा कि उनका संगठन ऑनलाइन माध्यम से बाल यौन शोषण को रोकने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।

उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर कोई अंतरराष्ट्रीय कानून नहीं है और उन्होंने संयुक्त राष्ट्र संधि के लिए 20 से अधिक राष्ट्रपतियों, प्रधानमंत्रियों तथा अन्य शीर्ष नेताओं से मुलाकात की।

सत्यार्थी ने कहा, “यह मामला केवल ऑनलाइन (बाल यौन शोषण से जुड़ी) सामग्री देखने का नहीं है। कई देशों में इसके लिए प्रासंगिक कानून हैं और इंटरपोल भी इस पर सक्रिय है। लेकिन इंटरनेट प्रदाताओं को रोकने के लिए कोई विशिष्ट अंतरराष्ट्रीय कानून या संयुक्त राष्ट्र संधि नहीं है। क्योंकि वे स्रोत से ही जांच कर सकते हैं।’’

उन्होंने कहा कि बाल यौन शोषण से जुड़ी ऑनलाइन सामग्री अपलोड और डाउनलोड इंटरनेट प्रदाताओं के माध्यम से होती है, इसलिए इंटरनेट और वाई-फाई प्रदाताओं (दूरसंचार कंपनियों) को इसके लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।

सत्यार्थी ने शुक्रवार को हैदराबाद साहित्य महोत्सव में अपनी पुस्तक ‘करुणा: द पावर ऑफ कम्पैशन’ का विमोचन किया। यह पुस्तक पाठकों के लिए इस बात पर बल देती है वे करुणा को केवल एक कोमल भावना के रूप में नहीं, बल्कि समाजों को बदलने में सक्षम एक क्रियाशील शक्ति के रूप में देखें।

भाषा खारी नेत्रपाल

नेत्रपाल

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

share & View comments