मुंबई: पिछले कुछ दिनों में महाराष्ट्र के शहरों और राजनीतिक दलों के गलियारों में एक वाक्य आम हो गया है, “कॉरपोरेटर संपर्क में नहीं हैं”.
कई नगर निगमों में त्रिशंकु जनादेश आने और खासकर महायुति सहयोगियों के बीच सत्ता को लेकर खींचतान तेज होने के कारण, शहरी स्थानीय निकायों में सत्ता का दावा पेश करने के लिए लगातार बैठकों का दौर चल रहा है. इसके लिए राजनीतिक दल गठबंधनों के अलग-अलग विकल्पों पर विचार करने को तैयार हैं.
कल्याण-डोंबिवली में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने प्रतिद्वंद्वी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना यानी एमएनएस के साथ गठबंधन किया है. उल्हासनगर में प्रकाश आंबेडकर की वंचित बहुजन आघाड़ी एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना का समर्थन कर रही है. वहीं शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट ने स्थानीय सरकारों में “अस्थिरता से बचने” के लिए बीजेपी के साथ भी संभावित गठबंधन के संकेत दिए हैं.
गुरुवार को उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने पत्रकारों से कहा, “हमें कोई प्रस्ताव नहीं मिला है और अगर मिलता भी है तो हम उसे कूड़ेदान में फेंक देते हैं. लेकिन कुछ जगहों पर बीजेपी के साथ… मतलब, हम कभी शिंदे के साथ नहीं जाएंगे. लेकिन अगर वहां कोई दूसरा विकल्प मौजूद है, तो पार्टी प्रमुख फैसला लेंगे. कोई भी फैसला अकेले नहीं लेगा”.
‘संपर्क से बाहर’ कॉरपोरेटर
राजनीतिक दल अपने चुने हुए कॉरपोरेटरों को तब तक एकजुट और सुरक्षित रख रहे हैं, जब तक वे अपने गुट को संभागीय आयुक्त के पास पंजीकृत नहीं करा लेते.
कुछ मामलों में, गुट के पंजीकरण के बाद भी कॉरपोरेटरों को जनता और दूसरे राजनीतिक दलों की नजरों से दूर रखा जा रहा है.
चंद्रपुर में जब कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार से पार्टी के कॉरपोरेटरों के बारे में पूछा गया, तो विधायक ने हल्के-फुल्के अंदाज में कहा, “मैं आपको गूगल लोकेशन भेज दूंगा”.
मुंबई में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना के लिए उस समय तनाव की स्थिति बन गई, जब पार्टी के 65 चुने हुए कॉरपोरेटरों में से एक सरिता म्हास्के बुधवार को कोंकण संभागीय आयुक्त के पास गुट का पंजीकरण कराते समय संपर्क में नहीं थीं.
हालांकि, म्हास्के गुरुवार को सामने आईं और कहा कि वह शहर से बाहर मंदिरों के दर्शन के लिए गई थीं और उनका फोन बंद था.
उन्होंने कहा, “जब मैं वापस आई, तो मैंने पार्टी नेताओं से बात की. मेरी सुरक्षा को देखते हुए पार्टी ने मुझे उनसे मिलने तक फोन बंद रखने को कहा था”. म्हास्के गुरुवार को बांद्रा स्थित ठाकरे परिवार के निवास मातोश्री पहुंचीं.
मुंबई नगर निगम में भी त्रिशंकु जनादेश आया है. बीजेपी 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी है. इसके बाद उद्धव ठाकरे गुट की शिवसेना को 65 सीटें मिलीं, एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना को 29 सीटें और कांग्रेस को 24 सीटें मिलीं.
बीजेपी और एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना ने मिलकर चुनाव लड़ा था. शिंदे गुट नगर निगम में सत्ता साझा करने पर जोर देने की तैयारी में है, जिसमें आधे कार्यकाल के लिए महापौर पद की मांग भी शामिल है.
पिछले हफ्ते नतीजों के एक दिन बाद, शिंदे गुट की शिवसेना अपने 29 चुने हुए कॉरपोरेटरों को मुंबई के ताज लैंड्स एंड होटल ले गई. आधिकारिक तौर पर पार्टी ने कहा कि उन्हें नगर निकाय के कर्तव्यों पर एक कार्यशाला के लिए एक साथ लाया गया था.
एक नवनिर्वाचित कॉरपोरेटर ने नाम न बताने की शर्त पर दिप्रिंट से कहा, “हम मंगलवार सुबह तक वहां थे. योजना यह थी कि सीधे संभागीय आयुक्त के पास जाकर गुट का पंजीकरण कराया जाए. लेकिन हमारी पार्टी और बीजेपी के बीच बातचीत चल रही थी कि रुककर शायद साथ में पंजीकरण कराया जाए. इस बीच हमारी पार्टी ने सभी कागजात, हलफनामे और हस्ताक्षर तैयार कर लिए”.
कल्याण-डोंबिवली नगर निगम में शिवसेना उद्धव गुट के कम से कम दो चुने हुए कॉरपोरेटर संपर्क में नहीं बताए जा रहे हैं और पार्टी ने उन्हें नोटिस जारी किया है.
बीजेपी और शिंदे गुट की शिवसेना ने कल्याण-डोंबिवली में गठबंधन में चुनाव लड़ा था. 122 सदस्यीय निकाय में दोनों को क्रमशः 50 और 53 सीटें मिलीं और मुकाबला बेहद करीबी रहा.
कल्याण से सांसद और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के बेटे श्रीकांत शिंदे ने बीजेपी के मुकाबले अपनी सौदेबाजी की स्थिति मजबूत करने के लिए एमएनएस के पांच कॉरपोरेटरों का समर्थन हासिल किया.
सत्ता के लिए खींचतान
कल्याण-डोंबिवली में हुए घटनाक्रम के बाद महाराष्ट्र बीजेपी अध्यक्ष और डोंबिवली विधानसभा क्षेत्र से विधायक रविंद्र चव्हाण ने एक बयान में कहा कि महायुति ठाणे, कल्याण-डोंबिवली और उल्हासनगर नगर निगमों में महापौर पद हासिल करेगी.
उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर उन्होंने पिछले हफ्ते उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से चर्चा की थी और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के दावोस से लौटने के बाद सभी मतभेद सुलझा लिए जाएंगे.
इस बीच उल्हासनगर नगर निगम में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने वंचित बहुजन आघाड़ी के दो कॉरपोरेटरों, एक निर्दलीय और अपने स्थानीय सहयोगी साई पार्टी के एक कॉरपोरेटर का समर्थन हासिल कर लिया है. इससे पार्टी आराम से बहुमत के आंकड़े को पार कर चुकी है.
इस नगर निगम में बीजेपी 37 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, जबकि शिंदे गुट की शिवसेना 36 सीटों के साथ उसके ठीक पीछे है.
चंद्रपुर में 66 सदस्यीय नगर निगम में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनी है, लेकिन उसे बहुमत नहीं मिला है. कांग्रेस ने 27 सीटें जीती हैं, जबकि बीजेपी को 23 सीटें मिली हैं. कांग्रेस की स्थानीय सहयोगी भारतीय शेतकरी कामगार पक्ष ने तीन सीटें जीतीं, जिससे कांग्रेस का कुल आंकड़ा 30 हो गया.
शिवसेना उद्धव बालासाहेब ठाकरे गुट ने छह सीटें जीती हैं, जो कांग्रेस के लिए बहुमत पार करने में अहम साबित होंगी. AIMIM, बहुजन समाज पार्टी और शिंदे गुट की शिवसेना ने एक-एक सीट जीती है, जबकि वंचित बहुजन आघाड़ी को दो सीटें मिली हैं. दो अन्य निर्दलीय उम्मीदवार, जो कांग्रेस के बागी हैं, भी जीते हैं. यहां शिवसेना उद्धव गुट और वंचित बहुजन आघाड़ी एक साथ एक गुट के रूप में आए हैं.
हालांकि, चंद्रपुर में कांग्रेस की जीत जिला स्तर पर उसके दो नेताओं, विधायक विजय वडेट्टीवार और सांसद प्रतिभा धनोरकर, के बीच मतभेदों से प्रभावित रही है.
गुरुवार को पत्रकारों से बात करते हुए विजय वडेट्टीवार ने कहा, “लोग जो कहना चाहें कह सकते हैं, लेकिन चंद्रपुर में कांग्रेस का ही महापौर होगा. पार्टी के अंदर मतभेद हो सकते हैं. बीजेपी में भी फूट है, लेकिन कोई उस पर बात नहीं करता. महापौर और उपमहापौर किसे बनाना है, इसका पूरा अधिकार मैंने प्रदेश अध्यक्ष को दे दिया है”.
उन्होंने आगे कहा, “जो भी हमारा समर्थन करेगा, हम उसे संतुष्ट करेंगे और सरकार का हिस्सा बनाएंगे. हमें पूरा भरोसा है कि शिवसेना उद्धव गुट सौ प्रतिशत हमारे साथ आएगी. इस पर बातचीत हो चुकी है”.
इस बीच चंद्रपुर में बीजेपी द्वारा उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना से संपर्क करने की भी चर्चा है.
बुधवार को शिंदे गुट की शिवसेना को एमएनएस के समर्थन को सही ठहराते हुए एमएनएस नेता संदीप देशपांडे ने कहा, “चंद्रपुर में वे यानी उद्धव गुट की शिवसेना बीजेपी से बातचीत कर रहे हैं. वे अपने स्थानीय हालात के अनुसार फैसला ले रहे हैं. हमने भी अपने स्थानीय हालात के हिसाब से फैसला लिया”.
चंद्रपुर में उद्धव गुट की शिवसेना के जिला अध्यक्ष संदीप गिरहे ने सोमवार को पत्रकारों से कहा कि पार्टी कांग्रेस के साथ गठबंधन करना चाहती है.
उन्होंने कहा, “लेकिन कांग्रेस को हमारी मांग पूरी करनी होगी. अगर पार्टी ऐसा नहीं करती, तो हमारे लिए सभी रास्ते खुले हैं. हम उसी के साथ जाएंगे, जो हमें शिवसेना का महापौर देगा”.
उन्होंने आगे कहा, “जो भी फैसला लिया जाएगा, वह चर्चा के बाद और उद्धवसाहेब ठाकरे के आदेश पर ही होगा”.
शिवसेना उद्धव गुट के प्रवक्ता हर्षल प्रधान ने दिप्रिंट से कहा, “हम किसी भी हालत में बीजेपी के साथ नहीं जाएंगे. हम कांग्रेस के साथ रहेंगे”.
भिवंडी में भी 90 सदस्यीय नगर निगम में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. कांग्रेस ने यहां 30 सीटें जीती हैं. बहुमत का आंकड़ा 46 है.
कांग्रेस ने अपना गुट पंजीकृत करा लिया है और इसके बाद अपने कॉरपोरेटरों को एकजुट कर लिया है. शरद पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी के पास 12 कॉरपोरेटर हैं, जबकि समाजवादी पार्टी के पास छह हैं. कांग्रेस अपने पारंपरिक सहयोगियों समाजवादी पार्टी और शरद पवार गुट की एनसीपी के समर्थन से नगर निगम पर दावा पेश कर सकती है.
मालेगांव में, जो कांग्रेस का पारंपरिक गढ़ रहा है, एक नई पार्टी इस्लाम, यानी इंडियन सेक्युलर लार्जेस्ट असेंबली ऑफ महाराष्ट्र, 84 में से 35 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है.
समाजवादी पार्टी, जिसने इस्लाम पार्टी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था, पांच सीटें जीत सकी और बहुमत से सिर्फ तीन सीट पीछे रह गई.
यहां कांग्रेस की स्थानीय इकाई, जिसने तीन सीटें जीती हैं, ने इस्लाम-समाजवादी पार्टी गठबंधन को समर्थन देने की इच्छा जताई है.
मंगलवार को AIMIM नेता इम्तियाज जलील ने पत्रकारों से कहा कि शिंदे गुट की शिवसेना ने मालेगांव में किसी समझौते की संभावना को लेकर उनकी पार्टी से संपर्क किया था, लेकिन AIMIM ने बीजेपी या शिंदे गुट की शिवसेना, किसी के साथ न जाने का फैसला किया है. एआईएमआईएम इस्लाम पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन को समर्थन देने पर बातचीत कर रही है.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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