नई दिल्ली/बेंगलुरु: भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद संभालने के कुछ घंटों बाद ही नितिन नबीन ने बीजेपी के पूर्व महासचिव राम माधव को ग्रेटर बेंगलुरु नगर निगम चुनावों का प्रभारी नियुक्त कर दिया.
माधव की मदद राजस्थान बीजेपी के पूर्व अध्यक्ष सतीश पूनिया और महाराष्ट्र के विधायक संजय उपाध्याय करेंगे, जिन्हें सह-प्रभारी बनाया गया है.
राम माधव ने एक्स पर एक पोस्ट के जरिए नितिन नबीन को उन्हें यह नई जिम्मेदारी देने के लिए धन्यवाद कहा.
माधव ने लिखा, “मई 2026 में होने वाले बृहद बेंगलुरु महानगर पालिका (बीबीएमपी) चुनावों की जिम्मेदारी देने के लिए उनका आभार. स्थानीय निकाय चुनाव पूरी तरह स्थानीय मुद्दों और स्थानीय कार्यकर्ताओं की ताकत और मेहनत के दम पर लड़े और जीते जाते हैं. दो अन्य वरिष्ठ साथियों के साथ मिलकर हम कर्नाटक टीम को यह प्रतिष्ठित चुनाव जिताने के लिए पूरी कोशिश करेंगे.”
Congratulations to @NitinNabin Sh Nitin Nabin ji for assuming the onerous and prestigious responsibility of the National President of the BJP.
Grateful to him for assigning me the responsibility of Bruhad Bengaluru Mahanagar Palika (BBMP) elections scheduled for May 2026. Local… pic.twitter.com/cziWu0mR39— Ram Madhav (@rammadhav_) January 21, 2026
उन्होंने आगे लिखा, “बीबीएमपी बहुत प्रतिष्ठित है क्योंकि यह 5 निगमों का समूह है, जिसमें बेंगलुरु शहर के अलावा कई कस्बे और 120 से ज्यादा गांव शामिल हैं. 90 लाख से ज्यादा मतदाताओं और 369 निगम वार्डों के साथ यह राज्य के लिए किसी विधानसभा चुनाव से कम नहीं है. बेंगलुरु में सभी हितधारकों—राज्य नेतृत्व, स्थानीय सांसदों और विधायकों और सबसे अहम शहर के नेतृत्व और कार्यकर्ताओं—से मिलने की उम्मीद है.”
राम माधव 2020 तक बीजेपी के महासचिव थे, जब नए पार्टी अध्यक्ष जे.पी. नड्डा ने अपनी टीम का पुनर्गठन किया.
2020 में उन्हें वापस राष्ट्रीय स्वयंसेवक (आरएसएस) भेज दिया गया था, लेकिन सक्रिय राजनीति में उनकी वापसी के संकेत तब दिखे, जब उन्हें 2024 के जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनावों का पार्टी प्रभारी बनाया गया.
पार्टी के एक नेता ने बताया कि यह नई जिम्मेदारी बीजेपी के भीतर उनकी बढ़ी हुई भूमिका की ओर इशारा करती है और यह आरएसएस की मंजूरी को भी दर्शाती है.
बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, “बेंगलुरु में बीजेपी का प्रदर्शन काफी अच्छा रहता है. यहां 28 विधानसभा सीटें हैं और राज्य के अन्य हिस्सों में कमजोर प्रदर्शन के बावजूद बीजेपी ने बेंगलुरु में 16 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस ने 12 सीटें हासिल कीं.”
उन्होंने आगे कहा, “2024 के लोकसभा चुनावों में बीजेपी ने बेंगलुरु की सभी चार सीटें जीतीं. बेंगलुरु में चाहे राज्य में कोई भी सरकार रही हो, यहां बीजेपी की सत्ता रही है; इसलिए ये चुनाव और भी ज्यादा अहम हो जाते हैं.”
राम माधव को अक्सर पूर्वोत्तर और जम्मू-कश्मीर में बीजेपी के उभार के पीछे एक अहम रणनीतिकार माना जाता है.
अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद 2024 के जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनावों में बीजेपी राज्य की दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. पार्टी ने 29 सीटें जीतीं और 2014 के चुनावों में जीती गई 25 सीटों के अपने अब तक के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन को भी पीछे छोड़ दिया. पार्टी ने जम्मू क्षेत्र में अपना दबदबा बनाए रखा.
राम माधव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारतीय प्रवासियों से संपर्क अभियान में भी अहम भूमिका निभाते रहे हैं.
बेंगलुरु क्यों है अहम
आरएसएस के वरिष्ठ नेता को ग्रेटर बेंगलुरु नगर निगम चुनावों की जिम्मेदारी देना इस बात को दिखाता है कि पार्टी इन चुनावों को कितनी अहमियत दे रही है.
पिछले साल नवंबर में ग्रेटर बेंगलुरु अथॉरिटी (जीबीए) ने बृहद बेंगलुरु महानगर पालिका (बीबीएमपी) की जगह ली, जिससे बेंगलुरु को एक निगम के बजाय बेहतर प्रबंधन और सेवाओं के लिए पांच निकायों में बांट दिया गया.
इस बदलाव से जीबीए को शहर निगम की सीमा लगभग 800 वर्ग किलोमीटर से बढ़ाकर करीब 1,400 वर्ग किलोमीटर तक करने की गुंजाइश मिली, जिसमें शहर के बाहरी इलाकों के क्षेत्र, कस्बे और गांव शामिल हैं.
अगर बीजेपी यह चुनाव जीतती है, तो इससे इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) में कथित छेड़छाड़ और तकनीकी खामियों को लेकर कांग्रेस के लगातार हमलों पर भी विराम लग सकता है.
‘वोट-चोरी’ के आरोप बेंगलुरु के महादेवपुरा इलाके से शुरू हुए, जहां अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई भी हुई है. यहां अक्सर उन्हें सफाईकर्मी के तौर पर काम पर रखा जाता है.
कर्नाटक में बीजेपी की मजबूत मौजूदगी है, जिसे वह दक्षिण भारत का प्रवेश द्वार मानती है. यह राज्य अन्य दक्षिणी राज्यों से आए बड़ी संख्या में प्रवासियों का भी ठिकाना है, जिनमें से दो राज्यों में इस साल के अंत में चुनाव होने हैं.
बेंगलुरु की पांच नई बनाई गई निगम इकाइयों में 88.41 लाख से ज्यादा मतदाता हैं. नए जीबीए में 369 वार्ड हैं, जबकि पहले एकल निगम में 198 वार्ड थे. मतदाता सूची के मसौदे में 45,69,193 पुरुष, 43,20,583 महिलाएं और 1,635 अन्य शामिल हैं.
राज्य निर्वाचन आयोग ने जीबीए, जिला पंचायत और तालुक पंचायत में बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मंजूरी दे दी है.
बेंगलुरु निगम चुनाव सितंबर 2020 के बाद से नहीं हुए हैं और जिला पंचायत/तालुक पंचायत चुनाव 2021 के मध्य से लंबित हैं.
कर्नाटक का ताज कहे जाने वाला बेंगलुरु राज्य के जीएसडीपी का लगभग आधा योगदान देता है और करीब 7 करोड़ की आबादी वाले राज्य की लगभग एक-चौथाई आबादी यहां रहती है. देश के आईटी निर्यात का बड़ा हिस्सा यहीं से आता है, लेकिन हाल के समय में शहर जर्जर बुनियादी ढांचे, गड्ढों से होने वाले सड़क हादसों और अधूरी व लंबे समय से लटकी जन परिवहन परियोजनाओं जैसी नकारात्मक खबरों में रहा है.
कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के पास बेंगलुरु डेवलपमेंट का भी प्रभार है. उन्होंने 40,000 करोड़ रुपये की टनल रोड, स्काई डेक और डबल-डेकर फ्लाईओवर जैसी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं का प्रस्ताव रखा है और इनके लिए केंद्र सरकार से 1 लाख करोड़ रुपये की मांग की है.
हालांकि, पिछले दो कार्यकालों (2010-2015 और 2015-2020) में बीबीएमपी परिषद में कांग्रेस सत्ता में नहीं रही. सितंबर 2020 से बीबीएमपी में कोई निर्वाचित प्रतिनिधि नहीं है, जिससे अधिकतर अधिकार लगातार राज्य सरकारों और अधिकारियों के पास रहे हैं और इससे भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं.
(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)
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