नयी दिल्ली, 20 जनवरी (भाषा) दिल्ली की एक अदालत ने तुर्कमान गेट स्थित फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास अतिक्रमण हटाने के अभियान के दौरान हुए पथराव की घटना के एक आरोपी को मंगलवार को जमानत दे दी।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश जोगिंदर प्रकाश नाहर ने रेहड़ी-पटरी लगाने वाले उबैदुल्ला को 25,000 रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि की एक जमानत पर राहत दी।
अभियोजन पक्ष ने मुख्य रूप से सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और एक सह-आरोपी के बयान पर भरोसा किया और आरोप लगाया कि उबैदुल्ला उस हिंसक भीड़ का हिस्सा था जिसने पुलिस को रोका, पथराव किया और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया।
आरोपी के वकील एम. के. मलिक और ए. एफ. फ़ैज़ी ने ज़ोर देकर कहा कि प्राथमिकी में कई अन्य लोगों के नाम दर्ज हैं, लेकिन उबैदुल्लाह का नाम नहीं है। उन्होंने दलील दी कि उसके खिलाफ पूरा मामला केवल एक ऐसे सामान्य पहचान गवाह के बयान पर आधारित है, जिसने सभी को एक साथ पहचानने का दावा किया है, और यह बिना ठोस सबूत के अनुमान के आधार पर की गई एक तरह की तुक्केबाज़ी भरी जांच है। साथ ही, सीसीटीवी कैमरों की फुटेज पर पक्षपातपूर्ण भरोसा किया गया है, जिसमें उसके द्वारा कोई प्रत्यक्ष आपराधिक कृत्य दिखाई नहीं देता।
इसके अलावा, उन्होंने तर्क दिया कि उस क्षेत्र का निवासी होने के नाते, सीसीटीवी कैमरे की फुटेज में उबैदुल्ला को केवल अपनी नाबालिग बहन की तलाश में अपने घर से बाहर निकलते हुए देखा गया था और इसमें आसपास की हिंसा में उसकी संलिप्तता की पुष्टि नहीं हुई।
अदालत के आदेश में कहा गया, ‘यह संज्ञान में लिया गया है कि आरोपी दिल्ली के तुर्कमान गेट का निवासी है। आरोपी की ओर से यह दलील दी गई है कि उसका घर घटनास्थल से मात्र 50 मीटर दूर है और उसने वर्तमान मामले में कोई अपराध नहीं किया है। इसलिए यह स्वाभाविक है कि आरोपी अपने घर के पास मौजूद हो।’
अदालत ने गौर किया कि आरोपी अपने परिवार का एकमात्र कमाने वाला सदस्य है और अपने लकवाग्रस्त पिता की देखभाल की जिम्मेदारी उसी पर है। यह भी पाया गया कि आरोपी का कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है।
बचाव पक्ष के वकील ने अदालत को आश्वासन दिया कि आरोपी के फरार होने का कोई खतरा नहीं है और वह सबूतों के साथ छेड़छाड़ नहीं कर सकता, क्योंकि सभी भौतिक साक्ष्य पुलिस के पास हैं और मुख्य गवाह पुलिस अधिकारी हैं, ‘जिन्हें मामूली आय वाला एक युवा रेहड़ी-पटरी वाला प्रभावित नहीं कर सकता।”
अदालत ने उबैदुल्ला को इस शर्त पर जमानत दी कि वह जांच में सहयोग करेगा, बुलाए जाने पर सुनवाई के लिए उपस्थित होगा, सबूतों के साथ छेड़छाड़ नहीं करेगा और वह किसी भी गवाह को प्रभावित करने की कोशिश नहीं करेगा।
तुर्कमान गेट के पास हुई हिंसा के सिलसिले में अब तक 18 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। 14 जनवरी को एक अलग मजिस्ट्रेटी अदालत ने पांच आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
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नोमान माधव
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