इंदौर, 20 जनवरी (भाषा) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने शहर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पेयजल से उल्टी-दस्त प्रकोप के कारण कई लोगों की मौत के मामले की न्यायिक जांच कराए जाने और इसके जिम्मेदार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने को लेकर याचिकाकर्ताओं की गुहार पर मंगलवार को अपना आदेश सुरक्षित रख लिया।
उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी की पीठ भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से लोगों की मौत को लेकर दायर अलग-अलग जनहित याचिकाओं की एक साथ सुनवाई कर रही है।
प्रदेश सरकार की ओर से उच्च न्यायालय को बताया गया कि उसने भागीरथपुरा में दूषित जल की आपूर्ति के घटनाक्रम की विस्तृत समीक्षा करने और निष्कर्ष, सुझाव व अनुशंसाएं प्रस्तुत करने के लिए सामान्य प्रशासन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय कुमार शुक्ल की अध्यक्षता में समिति का गठन किया है।
याचिकाकर्ताओं के वकील अजय बागड़िया ने इस समिति पर घोर अविश्वास जताते हुए युगल पीठ के सामने कहा कि यह समिति पेयजल त्रासदी की सच्चाई पर परदा डालने के लिए गठित की गई है।
बागड़िया ने अदालत से गुहार की कि उच्च न्यायालय के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति गठित करके इस त्रासदी की न्यायिक जांच कराई जानी चाहिए।
उन्होंने उच्च न्यायालय से यह गुहार भी की कि दूषित पेयजल से लोगों की मौत के लिए जिम्मेदार अधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों पर प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश दिया जाना चाहिए।
राज्य के मुख्य सचिव अनुराग जैन ऑनलाइन माध्यम से उच्च न्यायालय के सामने हाजिर हुए और कहा कि भागीरथपुरा मामले में अदालत के तमाम निर्देशों का पालन किया जा रहा है।
जैन ने अदालत को यह भी बताया कि भागीरथपुरा में 51 नलकूपों में दूषित पानी मिला और पानी की जांच रिपोर्ट में इसमें ‘ई-कोलाई’ बैक्टीरिया के बारे में पता चला। मुख्य सचिव ने कहा कि ‘ई-कोलाई’ के कारण ही इस इलाके में बड़े पैमाने पर लोग संक्रमित हुए।
उच्च न्यायालय ने सभी संबद्ध पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया और अगली सुनवाई के लिए 28 जनवरी की तारीख तय की।
जानकारों के मुताबिक ‘ई-कोलाई’ आमतौर पर सीवेज या मल से पानी में मिलता है और इस बैक्टीरिया के कारण दूषित पानी पीने के कारण लोगों को उल्टी-दस्त, पेट दर्द और बुखार जैसी समस्याएं होती हैं।
भागीरथपुरा में दूषित पेयजल से लोगों के बीमार पड़ने का सिलसिला दिसंबर के आखिर में शुरू हुआ था। स्थानीय नागरिकों ने इस प्रकोप में अब तक 24 लोगों के दम तोड़ने का दावा किया है।
मृतकों के आंकड़े को लेकर विरोधाभासी दावों के बीच राज्य सरकार ने मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ में 15 जनवरी को पेश स्थिति रिपोर्ट में भागीरथपुरा में उल्टी-दस्त प्रकोप के दौरान पांच माह के बालक समेत सात लोगों की मौत का जिक्र किया है।
बहरहाल, शहर के शासकीय महात्मा गांधी स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय की एक समिति के किए गए ‘डेथ ऑडिट’ की रिपोर्ट में संकेत दिया गया है कि भागीरथपुरा के 15 लोगों की मौत इस प्रकोप से किसी न किसी तरह जुड़ी हो सकती है।
प्रशासन ने भागीरथपुरा में उल्टी-दस्त का प्रकोप शुरू होने के बाद जान गंवाने वाले 21 लोगों को दो-दो लाख रुपये का मुआवजा दिया है।
अधिकारियों का दावा है कि इनमें से कुछ लोगों की मौत दूसरी बीमारियों और अन्य कारणों से भी हुई है, लेकिन सभी मृतकों के परिवारों को मानवीय आधार पर आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।
भाषा
हर्ष रवि कांत
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