अनूपपुर (मध्यप्रदेश), 15 जनवरी (भाषा) मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले के अमरकंटक स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (आईजीएनटीयू) के छात्रावास में असम के 22 वर्षीय स्नातकोत्तर छात्र के साथ कथित तौर पर पांच साथियों ने मारपीट की। घटना के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने पांचों आरोपियों को निष्कासित कर दिया है और उनके खिलाफ मामला भी दर्ज किया गया है। एक अधिकारी ने यह जानकारी दी।
यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब पिछले महीने उत्तराखंड के देहरादून में त्रिपुरा की रहने वाली छात्रा अंजेल चकमा की हत्या के बाद देशभर में आक्रोश है और इस तरह के घृणा अपराधों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और कानून बनाने की मांग उठ रही है।
अनूपपुर के अनुविभागीय पुलिस अधिकारी (एसडीओपी) नवीन तिवारी ने बताया कि आईजीएनटीयू में अर्थशास्त्र के स्नातकोत्तर छात्र हिरोस ज्योति दास की शिकायत पर बुधवार आधी रात से कुछ देर पहले पांच आरोपी छात्रों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई।
उन्होंने बताया कि आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 115 (2) (स्वेच्छा से चोट पहुंचाना), 296 (अश्लील कृत्य और शब्द), 351 (3) (आपराधिक धमकी) और 3 (5) (साझा इरादा) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
तिवारी ने कहा, “विश्वविद्यालय प्रशासन ने हमें सूचित किया कि अनुशासन समिति ने एक दिन पहले ही पांचों छात्रों को विश्वविद्यालय से निष्कासित कर दिया था। दास की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज की।”
उन्होंने दास के हवाले से बताया कि जब छात्र शौचालय से अपने छात्रावास के कमरे में लौट रहा था, तभी आरोपियों ने उससे कथित तौर पर पूछा कि वह कहां से है और विश्वविद्यालय में क्या कर रहा है।
उन्होंने बताया कि इसके बाद मंगलवार शाम करीब चार बजे आरोपियों ने दास के साथ मारपीट की। अधिकारी के अनुसार, पीड़ित ने बताया कि उसने आरोपियों को कहा था कि वह पिछले तीन वर्षों से विश्वविद्यालय में अध्ययन कर रहा है।
प्राथमिकी के अनुसार, मारपीट के कारण दास की आंख, होंठ, नाक और कनपटी में चोटें आई हैं। शिकायत में उसने अनुराग पांडे, जतिन सिंह, रजनीश त्रिपाठी, विशाल यादव और उत्कर्ष सिंह के नाम दर्ज कराए हैं।
यह पूछे जाने पर कि क्या घटना के दौरान नस्लीय अपशब्दों का इस्तेमाल किया गया, तिवारी ने कहा कि इस पहलू की जांच की जा रही है।
उन्होंने बताया, “छात्रों से पूछताछ के बाद हमले के पीछे का मकसद स्पष्ट हो पाएगा। साथ ही पीड़ित के मेडिकल रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है।”
दास और आईजीएनटीयू के रजिस्ट्रार हरि मूर्ति से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनसे संपर्क नहीं हो सका।
इस बीच, मध्यप्रदेश कांग्रेस ने इस घटना को लेकर सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की आलोचना की है। राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने एक बयान में आरोप लगाया कि आईजीएनटीयू छात्रावास में कुछ छात्रों ने दास के खिलाफ नस्लवादी टिप्पणी की और विरोध करने पर उनके साथ मारपीट की।
सिंघार ने आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ पार्टी से जुड़े कुछ युवक परिसर में नशीले पदार्थों का सेवन करते हैं और छात्रों के साथ मारपीट करते हैं, जबकि विश्वविद्यालय प्रशासन केवल औपचारिक कार्रवाई कर अपनी जिम्मेदारी से बचता है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उच्च शिक्षा के लिए स्थापित इस विश्वविद्यालय को भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) का केंद्र बना दिया गया है, जहां आए दिन अनियमितताएं और घटनाएं सामने आती रहती हैं।
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने हमले के विरोध में अनूपपुर के पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपा। एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि असामाजिक तत्वों की बढ़ती मौजूदगी के कारण विश्वविद्यालय में लगातार भय का माहौल बन रहा है, जिससे छात्र असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
एबीवीपी का दावा है कि ऐसे तत्वों के परिसर में प्रवेश से नशीले पदार्थों के सेवन में वृद्धि हुई है, जिसके परिणामस्वरूप अक्सर गंभीर घटनाएं हो रही हैं।
एबीवीपी के अनूपुर जिला संगठनात्मक सचिव शिवेंद्र चतुर्वेदी ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘अगर दो सप्ताह में केंद्रीय विश्वविद्यालय में स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो हम आंदोलन शुरू करेंगे।’’
उत्तराखंड के देहरादून में नौ दिसंबर को एक निजी विश्वविद्यालय में त्रिपुरा की एमबीए अंतिम वर्ष की छात्रा अंजेल चकमा (24) पर कुछ युवकों ने कथित तौर पर चाकू से हमला किया था। गंभीर रूप से घायल चकमा की 17 दिन तक इलाज के बाद 26 दिसंबर को मौत हो गई थी।
भाषा सं ब्रजेन्द्र खारी
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