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Thursday, 15 January, 2026
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गुजरात: अदालत ने सामूहिक दुष्कर्म-हत्या मामले में मृत्युदंड पाए तीन लोगों को बरी किया

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अहमदाबाद, 15 जनवरी (भाषा) गुजरात उच्च न्यायालय ने 2018 के सामूहिक दुष्कर्म-हत्या मामले में मृत्युदंड पाए तीन लोगों को बरी कर दिया और कहा कि अभियोजन पक्ष मामले को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा।

न्यायमूर्ति इलेश वोरा और न्यायमूर्ति आरटी वच्छानी की खंडपीठ ने कहा कि डीएनए रिपोर्ट पर भरोसा नहीं किया जा सकता, क्योंकि नमूने फॉरेंसिक प्रयोगशाला में भेजने में 14 दिन की देरी हुई थी।

गोपी देवीपूजक, लाला वादी और जयंती वादी को एक महिला से कथित सामूहिक दुष्कर्म और उसकी हत्या करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

महिला का शव 29 अक्टूबर, 2018 को खेड़ा जिले के एक गांव में मिला था।

एक सत्र न्यायालय ने अप्रैल 2022 में डीएनए रिपोर्ट सहित विभिन्न साक्ष्यों और गवाहों के बयानों पर विचार करने के बाद आरोपियों को दोषी ठहराया और मौत की सजा सुनाई।

उच्च न्यायालय में बचाव पक्ष के वकीलों ने दलील दी कि अभियोजन पक्ष डीएनए नमूनों को सही तरीके से रखने की आवश्यकता को साबित करने में विफल रहा और नमूनों के जिस किसी भी चीज में ले जाया गया था, उसकी सील की जांच सही तरीके से की गयी थी या नहीं, यह साबित नहीं हो पाया।

पीठ ने कहा कि उच्चतम न्यायालय का मानना है कि डीएनए साक्ष्य राय के तौर पर इस्तेमाल किये जाने वाले होते हैं और इसका महत्व प्रयोगशाला में गुणवत्ता नियंत्रण और गुणवत्ता आश्वासन प्रक्रिया पर निर्भर करता है।

अदालत ने कहा, “यह स्वीकार किया जाता है कि 14 दिनों की देरी के बाद नमूने अहमदाबाद स्थित प्रयोगशाला भेजे गए थे और देरी का कारण स्पष्ट नहीं है। उक्त अवधि के दौरान नमूनों को किस स्थिति में संरक्षित किया गया था, यह भी रिकॉर्ड में नहीं है।”

पीठ ने कहा हालांकि अदालत अपराध की गंभीरता से अवगत है लेकिन ‘आरोपियों द्वारा अपराध किए जाने की संभावना और अपराध किए जाने की निश्चितता के बीच बहुत बड़ा अंतर है, जिसे अभियोजन पक्ष को ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत करके स्पष्ट करना होगा।

उच्च न्यायालय ने कहा कि अभियोजन पक्ष अपने मामले को साबित करने में विफल रहा, क्योंकि आरोपी के अपराध की ओर इशारा करने वाली सिलसिलेवार परिस्थितियां स्थापित नहीं हो सकी।

भाषा जितेंद्र सुरेश

सुरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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