गुरुग्राम: आमतौर पर कोई पुलिसकर्मी जिस चीज़ पर जोश से बात करता है, वह गीज़र नहीं होती, लेकिन हरियाणा पुलिस के कांस्टेबल अमित यादव के लिए यह बेहद गंभीर मामला है और यह उनके सार्वजनिक सेवा वाले काम का ही विस्तार है.
सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में हरियाणा पुलिस के कांस्टेबल अमित यादव पूरी वर्दी में दिखाई देते हैं. हाथ में इलेक्ट्रिक टेस्टर लेकर वह बताते हैं कि खराब इलेक्ट्रिक गीज़र जानलेवा साबित हो सकता है. इस वीडियो को उनके इंस्टाग्राम हैंडल vardiwala007 पर 49 लाख से ज्यादा व्यूज़ और लाइक्स मिल चुके हैं. ऐसे समय में जब पुलिस और सिविल सर्विस के अधिकारी सोशल मीडिया के नियमों को लेकर अब भी असमंजस में हैं, यादव की ऑनलाइन मौजूदगी एक अलग मिसाल बनकर सामने आई है.
वीडियो की शुरुआत एक खबर से होती है—एक महिला की गीजर से करंट लगने से मौत. इसके बाद अमित यादव सीधे सुरक्षा से जुड़ी जानकारी देने लगते हैं.
अमित यादव ने कहा, “आपको महीने में कम से कम एक बार स्विचबोर्ड और गीज़र के आसपास की जगह ज़रूर चेक करनी चाहिए, ताकि कहीं करंट लीकेज तो नहीं है.” वह कैमरे पर सॉकेट टेस्ट करते हुए यह समझाते हैं.
यह उन कई जनहित वीडियो में से एक है, जो 32 साल के अमित यादव बना रहे हैं. उनके वीडियो साइबर फ्रॉड से लेकर महिलाओं की सुरक्षा तक के मुद्दों पर होते हैं. सधी हुई आवाज़, साफ भाषा और हमेशा वर्दी में नज़र आने वाले यादव ने सिर्फ दो महीनों में इंस्टाग्राम पर करीब 18 लाख फॉलोअर्स बना लिए हैं. वे रोज़मर्रा के खतरों को छोटे और आसान सेफ्टी लेसन में बदल देते हैं.
अमित यादव ने कहा, “जब मैं साइबर क्राइम सेल में था, तब मैंने देखा कि लोग किस तरह ठगे जा रहे हैं और उनका पैसा लूटा जा रहा है. अगर उन्हें बेसिक डिजिटल सुरक्षा की जानकारी होती, तो वे अपना पैसा बचा सकते थे. पुलिस अपना काम कर रही है, लेकिन इस तरह के प्लेटफॉर्म और पहुंच से मैं ज्यादा से ज्यादा लोगों को जानकारी और अलर्ट दे पा रहा हूं.”
सात साल से पुलिस बल में तैनात यादव ने दो साल पहले छोटे-छोटे जानकारी वाले वीडियो पोस्ट करने शुरू किए थे. शुरुआत एक प्रयोग के तौर पर हुई, लेकिन धीरे-धीरे उनकी कम्युनिकेशन स्किल्स बेहतर होती गईं और वह एक प्रोफेशनल कंटेंट क्रिएटर बन गए.
आज वह कंट्रोल्ड लाइटिंग में शूट करते हैं, साफ-सुथरे थंबनेल बनाते हैं और ऐसे विषय चुनते हैं, जिनके जवाब लोग जानना चाहते हैं. उनके इंस्टाग्राम फॉलोअर्स में कॉमेडियन बस्सी और रवि गुप्ता और व्लॉगर सौरभ जोशी जैसे नाम शामिल हैं. उनका इनबॉक्स अब एक अनऑफिशियल कम्पलेंट बॉक्स बन चुका है, जहां लोग धोखाधड़ी और साइबर स्कैम की शिकायतें भेजते हैं. पुलिस के सीनियर अधिकारी उनके काम को मान्यता देते हैं, यूनिवर्सिटीज उन्हें अवेयरनेस टॉक के लिए बुलाती हैं और इसके बावजूद यादव अपनी नियमित पुलिस ड्यूटी निभाते रहते हैं.
सोशल मीडिया से अभी तक उन्हें कोई आर्थिक लाभ नहीं मिला है.
अमित यादव ने कहा कि यह सब सिर्फ जागरूकता और जनसेवा के लिए है. जैसे-जैसे वह यूट्यूब और फेसबुक पर भी सक्रिय हो रहे हैं और हर प्लेटफॉर्म के एल्गोरिदम के हिसाब से खुद को ढाल रहे हैं, वह लगभग हर दिन नया कंटेंट पोस्ट करते हैं—कुछ वीडियो चेतावनी होते हैं, तो कुछ सलाह.
लेकिन आज जो पहचान और प्रभाव उन्हें मिला है, वह हमेशा उनकी ज़िंदगी का हिस्सा नहीं था.
अमित यादव ने कहा, “मैंने कभी नहीं सोचा था कि मैं यह सब करूंगा. मैं बस लोगों की मदद करता था, जितनी जानकारी मेरे पास होती थी. एक दिन मेरे दो दोस्त, जो ब्लॉगर हैं, उन्होंने कहा कि अगर मैं सोशल मीडिया का इस्तेमाल करूं तो डिजिटल सुरक्षा के बारे में बहुत से लोगों को सिखा सकता हूं. वहीं से मेरी कंटेंट क्रिएशन की शुरुआत हुई.”
पहचान और लोकप्रियता
सोशल मीडिया पर वर्दी में पुलिसकर्मियों के वीडियो की भरमार है. कोई डांस करता दिखता है, कोई स्टंट करता है, कोई जीप से उतरते वक्त ऐविएटर पहनकर एंट्री लेता है, तो कोई फिल्मों के डायलॉग पर लिप-सिंक करता है. कई पुलिसकर्मियों को इसके लिए विभागीय कार्रवाई का सामना भी करना पड़ा है, लेकिन अमित यादव इन सब बातों से बेपरवाह हैं.
उनका मानना है कि उनका कंटेंट उनके रोज़मर्रा के पुलिस काम का ही विस्तार है. यह पूरी तरह साइबर क्राइम और सार्वजनिक सुरक्षा को लेकर जागरूकता फैलाने पर केंद्रित है. अब तक उन्हें विभाग की ओर से किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा है.
अमित यादव ने कहा, “मेरे सीनियर अधिकारियों ने मुझे बहुत सपोर्ट किया है और कई लोग मेरे काम की सराहना भी करते हैं. जब भी अवेयरनेस टॉक के लिए कोई निमंत्रण आता है, तो विभाग खुद मुझे भेजता है.”
कुछ दिन पहले ही अमित यादव जीडी गोयनका यूनिवर्सिटी छात्रों से बात करने पहुंचे थे. वहां मौजूद युवा छात्रों के पास कई सवाल थे. उन्होंने मुख्य रूप से साइबर फ्रॉड, डेटा सुरक्षा और निजी तस्वीरों से जुड़े खतरों पर बात की. हॉल में सैकड़ों छात्र मौजूद थे. कार्यक्रम के अंत में उन्हें फूलों और एक पौधा भेंट कर सम्मानित किया गया.
छात्रों ने उनसे कई तरह के सवाल पूछे. सोशल मीडिया अकाउंट और मोबाइल फोन को सुरक्षित कैसे रखें, घर बैठे शिकायत कैसे दर्ज करें, अगर गलती से पैसे किसी गलत अकाउंट में ट्रांसफर हो जाएं तो क्या करें और निजी तस्वीरों को सुरक्षित कैसे रखा जाए. अमित यादव ने एक घंटे से ज्यादा समय तक एक-एक सवाल का जवाब दिया.
अमित यादव ने कहा, “इन युवाओं के मन में बहुत सारे सवाल हैं. हम सब एक डिजिटल दुनिया में जी रहे हैं और डिजिटल जानकारी अब बेहद ज़रूरी है. मैंने उन्हें बताया कि कैसे वे सरकारी वेबसाइट पर IMEI नंबर डालकर यह जांच सकते हैं कि उनका फोन किसी आपराधिक गतिविधि में इस्तेमाल तो नहीं हुआ है, सोशल मीडिया अकाउंट पर टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन कैसे एक्टिवेट करें और ऐसी कई जरूरी बातें.”
इस दौरान उन्होंने अपने फोन पर यूनिवर्सिटी टॉक की तस्वीरें भी दिखाईं.
पिछले साल की शुरुआत में अमित यादव को चंडीगढ़ में आयोजित दैनिक जागरण क्रिएटर लेंस अवॉर्ड्स में बेस्ट सोशल इम्पैक्ट कंटेंट क्रिएटर का अवॉर्ड मिला.
अमित ने कहा कि उनका मकसद लोगों को साइबर फ्रॉड से बचाना है, “अभी जो हो रहा है, वह सिर्फ ट्रेलर है. पूरी फिल्म आना अभी बाकी है.”
अमित यादव ने आगे कहा, “इसे रोकने का सिर्फ एक तरीका है—जागरूकता. अगर आप जागरूक नहीं हैं, तो आप आसानी से शिकार बन जाते हैं, खासकर वे लोग जो ज्यादा सामाजिक नहीं हैं. अपने वीडियो के जरिए मैं उन लोगों तक भी पहुंचना चाहता हूं, जो ऑफलाइन ज्यादा बातचीत नहीं करते, लेकिन सोशल मीडिया के जरिए जानकारी हासिल कर सकते हैं.”
अभी लंबा रास्ता
इस तरह के वीडियो बनाने का विचार अमित यादव को तब आया, जब उनके एक दोस्त के पिता साइबर फ्रॉड का शिकार हो गए. उन्होंने अपने फोन में एक एंड्रॉयड पैकेज किट इंस्टॉल कर ली थी, जिसके बाद फोन अपने आप चलने लगा, बिना किसी के छुए. अमित यादव की तुरंत कार्रवाई की वजह से कोई आर्थिक नुकसान नहीं हुआ. घटना की जानकारी मिलते ही वह कुछ ही मिनटों में उनके घर पहुंचे और सभी बैंक अकाउंट फ्रीज करवा दिए.
अमित यादव ने कहा, “अकाउंट फ्रीज़ कराने से पहले मैंने उनसे कहा कि जितना कैश निकाल सकते हैं, निकाल लें. सभी आईडी डिजिलॉकर के जरिए लॉक करवाई गईं. उसी दिन मैंने तय कर लिया था कि अब मुझे जागरूकता वाले वीडियो बनाने हैं.”
अमित यादव ने जून 2024 में वीडियो पोस्ट करना शुरू किया. उन्होंने कहा, “मेरा लक्ष्य कभी फॉलोअर्स बढ़ाना नहीं था. मैं बस आसान भाषा में ऐसे वीडियो बनाता था, जिन्हें लोग समझ सकें.”
उनका पहला वायरल वीडियो उन लोगों को लेकर था, जो अपने पुराने मोबाइल फोन सड़क किनारे दुकानदारों को बेच देते हैं. इस वीडियो में अमित यादव ने चेतावनी दी थी कि ऐसे फोन से निजी डेटा निकाला जा सकता है और उसका इस्तेमाल आपराधिक गतिविधियों में हो सकता है.
अमित यादव ने कहा, “लोग सोचते हैं कि डेटा डिलीट करना काफी है, लेकिन सिर्फ इंटरनेट कनेक्शन से कोई भी डेटा वापस निकाला जा सकता है. डेटा कभी पूरी तरह डिलीट नहीं होता. इसलिए कभी भी अपना फोन किसी अनजान व्यक्ति को नहीं बेचना चाहिए. यह मेरे शुरुआती वीडियो में से एक था, शायद आठवां या नौवां और यह वायरल हो गया.”
इसके बाद से अमित यादव रोज़मर्रा की ज़िंदगी से जुड़े मुद्दों पर वीडियो बनाते आ रहे हैं.
एक वीडियो में वह सड़क पर एक टैक्सी के पास खड़े होकर रात में सफर करने वाली महिलाओं के लिए सेफ्टी टिप्स देते नज़र आते हैं. यह वीडियो उन्होंने दूसरे कंटेंट क्रिएटर गौरव यादव के साथ मिलकर बनाया था, जिनके पांच लाख से ज्यादा फॉलोअर्स हैं.
वीडियो के कैप्शन में लिखा था, “रात में टैक्सी से सफर करते समय महिलाओं को इन पांच ज़रूरी सुरक्षा बातों का ध्यान रखना चाहिए: अपनी लाइव लोकेशन भरोसेमंद लोगों के साथ शेयर करें, गाड़ी में बैठने से पहले ड्राइवर और वाहन की जानकारी जांच लें, ऐप के सेफ्टी फीचर्स जैसे SOS और ट्रिप ट्रैकिंग का इस्तेमाल करें, पीछे की सीट पर बैठें, बेहतर होगा ड्राइवर के पीछे वाली सीट, सतर्क रहें, ध्यान भटकाने वाली चीज़ों से बचें और फोन हमेशा हाथ में रखें.”
शुरुआत में अमित यादव को वीडियो के आइडिया अपने काम के दौरान देखे गए मामलों से मिलते थे. अब उन्हें आइडिया खबरों और सोशल मीडिया ट्रेंड्स से भी मिल जाते हैं, जैसे पायल गेमिंग वीडियो या पाकिस्तानी जासूस से जुड़ा ट्रेंड.
अमित यादव ने कहा, “एक पुलिसवाले के तौर पर मुझे ज्यादा रिसर्च करने की ज़रूरत नहीं होती. साइबर अवेयरनेस की ट्रेनिंग मैं पहले ही ले चुका हूं. मुझे पता है कि किस स्थिति में क्या करना है और धोखाधड़ी से कैसे बचा जा सकता है. मैं वही जानकारी लोगों तक पहुंचा देता हूं.”
ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी होने के चलते उनका शेड्यूल तय नहीं रहता, लेकिन वह ऑनलाइन और ऑफलाइन काम के साथ अपनी निजी ज़िंदगी को संतुलित कर लेते हैं. अमित यादव शादीशुदा हैं और उनका पांच साल का बेटा है. वह ज्यादातर वीडियो घर पर ही बनाते हैं. वह पैसों के लिए कोलैबोरेशन नहीं करते, लेकिन जिन सैलून में वह जाते हैं, उनके रिव्यू या महिला सुरक्षा को लेकर दूसरे क्रिएटर्स के साथ अवेयरनेस वीडियो ज़रूर पोस्ट करते हैं.
वह यूट्यूब पर भी अपनी पहुंच बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि, यूट्यूब पर कमाई वॉच टाइम के आधार पर होती है और लंबे वीडियो पर ज्यादा पैसे मिलते हैं, लेकिन अमित यादव फिलहाल शॉर्ट वीडियो ही ज्यादा पोस्ट करते हैं.
उन्होंने कहा, “अब तक मैंने यूट्यूब से सिर्फ 1,800 रुपये कमाए हैं.” यह कहते हुए उन्होंने अपने फोन पर कमाई का स्क्रीनशॉट भी दिखाया. उन्होंने अब तक 690 वीडियो पोस्ट किए हैं और उनके 3.4 लाख सब्सक्राइबर हैं.
1.8 मिलियन फॉलोअर्स होने की वजह से उन्हें एंडोर्समेंट के कई ऑफर आते हैं, लेकिन वह बहुत सोच-समझकर ही किसी को चुनते हैं और कुछ ही पर आगे बढ़ते हैं. कुछ हफ्ते पहले नजफगढ़ में प्रोटीन पाउडर बेचने वाली एक दुकान के मैनेजर ने उन्हें स्टोर विजिट के लिए बुलाया था.
अमित यादव पैसों के लिए नहीं, बल्कि जागरूकता और पहुंच बढ़ाने के लिए कोलैबोरेशन करते हैं.
नजफगढ़ के स्टोर मैनेजर ने कहा, “अमित भाई बहुत अच्छा और लोगों के काम आने वाला कंटेंट बनाते हैं. बाजार में नकली प्रोटीन ब्रांड्स की भरमार है. हम चाहते थे कि वह हमारे स्टोर आकर खुद देखें कि हम किस तरह की क्वालिटी बेचते हैं और अगर उन्हें सही लगे तो उसका समर्थन करें.”
पद से आगे की इज़्ज़त
सोशल मीडिया की वजह से अमित यादव अपने विभाग के भीतर भी एक पहचाना नाम बन चुके हैं. आमतौर पर पुलिस व्यवस्था में कांस्टेबल सबसे निचले पायदान पर होता है. इस पद के साथ कई तरह की सीमाएं और प्रोटोकॉल जुड़े होते हैं, लेकिन अमित यादव की पहचान अब सिर्फ उनकी पोस्टिंग या रैंक तक सीमित नहीं है. एक कंटेंट क्रिएटर के तौर पर उनकी पहुंच इतनी बढ़ चुकी है कि उसमें सीनियर अधिकारी भी शामिल हैं. कांस्टेबल होने के बावजूद अब उनका आईपीएस अधिकारियों से भी सहज रिश्ता है, जो कभी-कभी उनके काम की सराहना भी करते हैं.
अमित यादव ने कहा, “एक बार हम शूटिंग सेशन कर रहे थे, तभी हमारे सीनियर ऑफिसर वसीम अकरम आए और उन्होंने मेरे काम की तारीफ की. वहां मौजूद सभी लोग थोड़ा हैरान रह गए थे. लेकिन ऐसे पलों से बहुत मोटिवेशन मिलता है.”
देश भर के कई सीनियर अधिकारी उन्हें सोशल मीडिया पर फॉलो करते हैं, जिनमें आईपीएस सैफिन हसन, आईपीएस फैसल राजा और आईपीएस अर्पित जैन शामिल हैं. हालांकि, इन अधिकारियों से उनकी कोई सीधी बातचीत नहीं हुई है.
लेकिन पुलिस विभाग के भीतर उनका काम चर्चा का विषय ज़रूर रहता है.
उत्तर प्रदेश कैडर के 2019 बैच के एक आईपीएस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “मैं भी उन्हें इंस्टाग्राम पर फॉलो करता हूं और उनकी रील्स अपने ग्रुप्स में शेयर करता हूं. मैं अपने जूनियर्स को उनका उदाहरण भी देता हूं, जो बेवजह की रील्स बनाते हैं. मैं कहता हूं कि इंस्टाग्राम का इस्तेमाल ऐसे करना चाहिए.”
कई सीनियर आईपीएस अधिकारियों ने सार्वजनिक मंचों पर भी उनकी तारीफ की है. ऐसे पल अमित यादव के प्रोफेशनल जीवन के खास लम्हों में शामिल हैं.
एक आईजी रैंक के अधिकारी ने उनसे कहा था, “आप सोशल मीडिया पर हमें गर्व महसूस करा रहे हैं. आपकी अवेयरनेस वीडियो के चलते विभाग भी आपको अलग-अलग जगहों और प्लेटफॉर्म्स पर बातचीत के लिए भेजता है.”
एक कॉमेडी शो में कॉमेडियन रवि गुप्ता ने अमित यादव को लेकर मज़ाक किया था. उन्होंने कहा था, “आप तो वही पुलिस वाले हैं जो वर्दी पहनकर हमें ऑनलाइन डराते हैं.”
एक अन्य स्टैंडअप शो में रवि गुप्ता ने उन्हें पहचानते हुए कहा, “अगर मैं गलत नहीं हूं, तो यही वह आदमी है, जिसने मेरी रातों की नींद उड़ा रखी है.”
अमित यादव से होने वाली लगभग हर बातचीत साइबर अवेयरनेस सेशन में बदल जाती है. उनके गांव में उन्हें अक्सर हुक्का बैठक में बोलने के लिए बुलाया जाता है, जहां लोग बैठकर हुक्का पीते हैं और बातचीत करते हैं. पुलिस में आने से पहले अमित यादव एक डिलीवरी ड्राइवर के तौर पर भी काम कर चुके हैं.
अमित यादव का जन्म 1993 में मानेसर में हुआ था. वह सिर्फ पांच साल के थे, जब उनके पिता का निधन हो गया. उनकी मां ने दूध बेचकर उनका पालन-पोषण किया. अमित यादव भी दूध की डिलीवरी और आसपास के गांवों में छोटे-मोटे काम करके मां की मदद करते थे. उन्होंने पास के एक स्कूल से पढ़ाई पूरी की और हिसार की जामदेश्वर यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया.
डिग्री पूरी करने के बाद उन्होंने गोआईबिबो और कुछ अन्य कंपनियों में इंजीनियर के तौर पर काम किया, लेकिन उन्हें वहां संतोष नहीं मिला.
हरियाणा पुलिस में सिलेक्शन के बाद उन्हें कुछ हद तक संतुष्टि मिली, लेकिन वह और कुछ करना चाहते थे. कंटेंट क्रिएशन के जरिए.
उन्होंने कहा कि उन्हें अब अपनी असली दिशा मिल गई है.
अमित यादव ने कहा, “पुलिस की नौकरी ठीक थी, लेकिन अब मुझे अपना मकसद मिल गया है. मैं ज्यादा लोगों की मदद करना चाहता हूं और ज्यादा लोगों तक पहुंचना चाहता हूं.”
वह वर्दी से आगे भी अपनी पहचान बनाना चाहते हैं. उनकी ऑनलाइन मौजूदगी का बड़ा हिस्सा पुलिस की वर्दी से जुड़ा है, जो वह हर वीडियो में पहनते हैं, लेकिन आने वाले साल में वह कुछ वीडियो सिविल कपड़ों में भी बनाने की योजना बना रहे हैं, ताकि लोग उन्हें वर्दी से अलग भी पहचानें.
अमित यादव ने कहा, “लोग मुझ पर भरोसा करते हैं क्योंकि मैं एक पुलिसवाला हूं, लेकिन धीरे-धीरे मैं सिविल कपड़ों में भी वीडियो बनाना शुरू करूंगा. लोग मुझे बिना वर्दी के भी पहचानें, यही मेरी कोशिश है और मुझे लगता है कि यह काम करेगा.”
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