नयी दिल्ली,12 जनवरी (भाषा) कांग्रेस सांसद मनीष तिवारी ने सोमवार को कहा कि भारत को अपनी रणनीतिक स्वायत्तता की रक्षा के लिए आंतरिक रूप से एकजुट रहना आवश्यक है क्योंकि देश की एकजुटता ही बाहरी चुनौतियों का सामना करने का सबसे बड़ा उपाय है।
पूर्व केंद्रीय मंत्री तिवारी ने कहा कि अगर भारत अपनी शर्तों पर दुनिया के साथ जुड़ना चाहता है, तो उसकी ताकत अंदरूनी एकता से आनी चाहिए, न कि किसी बाहरी स्रोत से।
तिवारी ने ये टिप्पणियां रूपा पब्लिकेशंस द्वारा प्रकाशित उनकी नयी पुस्तक ‘ए वर्ल्ड एड्रिफ्ट: ए पार्लियामेंटेरियन्स पर्सपेक्टिव ऑन द ग्लोबल पावर डायनेमिक’ के विमोचन के अवसर पर कीं। पूर्व विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा ने इस पुस्तक का विमोचन किया।
कांग्रेस सांसद ने कहा,“यदि भारत को अपनी रणनीतिक स्वायत्तता की रक्षा करनी है, तो उसे आंतरिक रूप से एकजुट रहना होगा। बहुलवाद अब कोई ऐसी विलासिता नहीं है जिसे हल्के में लिया जा सके। भारत की एकजुटता ही बाहरी चुनौतियों का सबसे बड़ा प्रतिकार है।”
तिवारी ने कहा, “ऐसे समय में जब कई राष्ट्र झुक चुके हैं, भारत, अपनी तमाम समस्याओं, विरोधाभासों और पिछले एक दशक से चली आ रही राजनीति के बावजूद, एक मार्गदर्शक बना हुआ है।”
उन्होंने कहा, ‘‘ लेकिन मुझे सबसे ज्यादा चिंता इस बात की है कि धार्मिक ध्रुवीकरण के खतरे को इस हद तक बढ़ा देना कि यह हमारे सामाजिक ताने-बाने को इतना कमजोर कर दे कि हम उसे फिर से संवार न सकें।’’
पिछले साल मई में हुए भारत-पाकिस्तान सैन्य संघर्ष का जिक्र करते हुए तिवारी ने कहा कि इसने पूरी तरह से परिदृश्य बदल दिया है और अब वर्तमान की लड़ाइयों को अतीत की मानसिकता एवं हथियारों से नहीं लड़ा जा सकता।
पूर्व विदेश मंत्री सिन्हा ने कहा कि वेनेजुएला में जो कुछ हुआ है, उससे कई मुद्दे उठे हैं तथा उसने दुनिया के सबसे शक्तिशाली लोकतंत्र के साम्राज्यवाद को एक बार फिर से स्थापित कर दिया है।
सिन्हा ने कहा,‘‘स्पष्ट रूप से, खतरे और जोखिम मौजूद हैं। हमें इन मुश्किल परिस्थितियों से कुशलतापूर्वक निपटना होगा।’’
भाषा
राजकुमार सिम्मी
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