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Saturday, 10 January, 2026
होमदेशधामी सरकार ने नए प्रदर्शनों के आगे झुकते हुए 2022 के अंकिता भंडारी केस में CBI जांच की सिफारिश की

धामी सरकार ने नए प्रदर्शनों के आगे झुकते हुए 2022 के अंकिता भंडारी केस में CBI जांच की सिफारिश की

उत्तराखंड की बीजेपी सरकार पर 19 साल की रिसेप्शनिस्ट की 2022 में हुई हत्या में एक 'VIP' के शामिल होने के नए आरोप सामने आने के बाद से दबाव बढ़ गया है.

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नई दिल्ली: उत्तराखंड सरकार ने शुक्रवार को 19 वर्षीय अंकिता भंडारी की 2022 में हुई हत्या की नए सिरे से जांच के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को हरी झंडी दे दी. यह फैसला “वीआईपी” की संलिप्तता के आरोप सामने आने के बाद हुए विरोध प्रदर्शनों और मांगों को देखते हुए लिया गया है.

सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया, “मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दिवंगत अंकिता भंडारी के माता-पिता की मांग और भावनाओं का सम्मान करते हुए अंकिता भंडारी मामले में सीबीआई जांच की सिफारिश को मंजूरी दी है.”

बयान में यह भी कहा गया कि शुरू से ही सरकार का उद्देश्य निष्पक्ष, पारदर्शी और संवेदनशील तरीके से न्याय सुनिश्चित करना रहा है और यह प्रतिबद्धता आगे भी जारी रहेगी.

मुख्यमंत्री धामी ने शुक्रवार को जारी एक वीडियो बयान में कहा, “मैंने दिवंगत अंकिता भंडारी के माता-पिता से मुलाकात की और उनसे बात की. उनकी मांग और भावनाओं का सम्मान करते हुए हम इस मामले में सीबीआई जांच की सिफारिश कर रहे हैं.”

1946 के दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम के तहत, जो सीबीआई के अधिकार क्षेत्र को नियंत्रित करता है, राज्य पुलिस द्वारा दर्ज मामले की जांच के लिए राज्य सरकार की सहमति जरूरी होती है. अब केंद्र सरकार का कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग एक अधिसूचना जारी करेगा, जिससे सीबीआई औपचारिक रूप से जांच शुरू कर सकेगी.

अंकिता भंडारी ऋषिकेश के पास एक रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के तौर पर काम करती थीं, जब सितंबर 2022 में उनकी हत्या कर दी गई. मामले की जांच के लिए गठित उत्तराखंड पुलिस की विशेष जांच टीम ने रिसॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य, जो एक पूर्व बीजेपी विधायक का बेटा है, और उसके दो सहयोगियों को जल्द ही गिरफ्तार किया था. स्थानीय अदालत ने पिछले साल मई में तीनों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी.

हाल के हफ्तों में यह मामला फिर चर्चा में आया, जब अभिनेत्री उर्मिला सनावर, जो अब निष्कासित भाजपा नेता सुरेश राठौर की अलग रह रही साथी हैं, ने दोनों के बीच हुई कथित बातचीत के ऑडियो क्लिप जारी किए. इन क्लिप्स में एक व्यक्ति रिसॉर्ट में मौजूद “वीआईपी” की पहचान भाजपा महासचिव और उत्तराखंड प्रभारी दुष्यंत गौतम के रूप में करता हुआ सुनाई देता है.

इसके बाद गौतम ने आरोपों से इनकार किया और हत्या से जोड़ने को लेकर सनावर, राठौर और तीन विपक्षी दलों के खिलाफ मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया.

फिर भी, इन दावों के बाद एक बार फिर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए और अंकिता के माता-पिता ने सीबीआई जांच की मांग दोहराई. भाजपा के भीतर भी कई नेताओं ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा मामले को संभालने के तरीके पर सवाल उठाए और सीबीआई जांच की मांग का समर्थन किया.

एक भाजपा नेता ने कहा, “इस विवाद से धामी की एक निर्णायक नेता की छवि को नुकसान पहुंचा. यह तथ्य कि उन्होंने कई विरोध प्रदर्शनों के बाद ही माता-पिता से मुलाकात की, दिखाता है कि वह समस्या की गंभीरता को नहीं समझ पाए.”

पूर्व कैबिनेट मंत्री विजया बर्थवाल ने इस हफ्ते की शुरुआत में “सीबीआई द्वारा निष्पक्ष जांच” की मांग की, ताकि “किसी भी तरह के राजनीतिक दबाव या सबूत छिपाने की कोई संभावना न रहे”.

एक अन्य वरिष्ठ बीजेपी नेता ने कहा कि यह “बहुत संवेदनशील मामला” है.

उन्होंने कहा, “जिस तरह से इसे संभाला गया, वह बिल्कुल सही नहीं था. पारदर्शिता की मांग हर कोई कर रहा था और चुनाव नजदीक होने के कारण विपक्ष भी इसे राजनीतिक मुद्दा बना रहा था.” उन्होंने कांग्रेस के राज्यव्यापी प्रदर्शन का जिक्र किया.

उत्तराखंड में अगले साल की शुरुआत में चुनाव होने की संभावना है.

गायब कड़ियां

हालांकि उत्तराखंड पुलिस की जांच के बाद दोष सिद्ध हुए, लेकिन विशेष जांच टीम ने अंकिता के दोस्तों द्वारा लगाए गए उन आरोपों की विस्तार से जांच नहीं की, जिनमें कहा गया था कि उस पर वीआईपी को “अतिरिक्त सेवाएं” देने का दबाव बनाया जा रहा था और उसने इससे इनकार कर दिया था.

पुलिस द्वारा हत्या के आरोप में पुलकित आर्य को गिरफ्तार किए जाने के कुछ घंटे बाद ही मुख्यमंत्री धामी ने उसके वनंत्रा रिसॉर्ट को गिराने का आदेश दे दिया था. कांग्रेस का आरोप है कि यह सबूत नष्ट करने के लिए जल्दबाजी में किया गया.

पुलिस अंकिता का मोबाइल फोन भी बरामद नहीं कर सकी, जिससे कथित तौर पर उसने अपने दोस्तों को व्हाट्सएप संदेश भेजे थे, जिनमें “रिसॉर्ट में वीआईपी के आने” का जिक्र था.

इस हफ्ते देहरादून में मुख्यमंत्री से हुई बैठक में अंकिता के माता-पिता ने कथित तौर पर मामले में शामिल “वीआईपी” की पहचान की मांग भी की. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने उन्हें आश्वासन दिया है कि उनकी मांगों पर विचार किया जाएगा.

(इस रिपोर्ट को अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें)


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