नयी दिल्ली, आठ जनवरी (भाषा) केंद्र सरकार ने दिल्ली उच्च न्यायालय में उस जनहित याचिका का विरोध किया है जिसमें एयर प्यूरिफायर को ‘चिकित्सा उपकरणों’ के रूप में वर्गीकृत करने और उस पर जीएसटी दरों को कम करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है। इसके साथ ही केंद्र ने कहा कि कर से संबंधित मामलों में न्यायिक हस्तक्षेप संवैधानिक रूप से अस्वीकार्य है।
केंद्र ने कहा कि यह एक स्थापित कानून है कि अदालतें खुद को संवैधानिक रूप से नामित निर्णय निर्माताओं के लिए प्रतिस्थापित नहीं करती हैं, खासकर आर्थिक नीति और राजकोषीय संरचना से जुड़े मामलों में।
केंद्र ने याचिका के जवाब में दायर अपने हलफनामे में कहा, ‘इस अदालत द्वारा जीएसटी दरों को संशोधित करने, जीएसटी परिषद की बैठक बुलाने या जीएसटी परिषद को किसी विशेष परिणाम पर विचार करने या अपनाने के लिए मजबूर करने का कोई भी निर्देश जीएसटी के कार्यक्षेत्र में अदालत का हस्तक्षेप होगा।
याचिका मुख्य न्यायाधीश देवेन्द्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ के समक्ष शुक्रवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है।
हलफनामा एक जनहित याचिका (पीआईएल) मामले के जवाब में दायर किया गया था, जिसमें केंद्र को एयर प्यूरीफायर को ‘चिकित्सा उपकरणों’ के रूप में वर्गीकृत करने और मशीनों पर लगाए गए माल एवं सेवा कर (जीएसटी) दरों को कम करने तथा उन्हें पांच प्रतिशत के दायरे में लाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था। एयर प्यूरिफायर पर फिलहाल 18 फीसदी कर लगता है।
भाषा तान्या रंजन
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