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Saturday, 25 April, 2026
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भारत की जीडीपी वृद्धि अगले वित्त वर्ष में 6.8 प्रतिशत रहने का अनुमानः रिपोर्ट

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मुंबई, सात जनवरी (भाषा) विदेशी ब्रोकरेज कंपनी गोल्डमैन शैक्स ने वित्त वर्ष 2026-27 में भारत की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि दर के 6.8 प्रतिशत रहने का अनुमान जताया है, जो चालू वित्त वर्ष के लिए अनुमानित 7.3 प्रतिशत दर से कम होगी।

हालांकि, सरकार की तरफ से बुधवार को जारी राष्ट्रीय लेखा आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2025-26 में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 7.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है।

गोल्डमैन शैक्स की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि महंगाई बढ़ने की आशंका को देखते हुए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पास आगे ब्याज दरों में कटौती की सीमित गुंजाइश बचेगी।

रिपोर्ट कहती है, ‘हमें वर्ष 2026 में भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 6.7 प्रतिशत और वित्त वर्ष 2026-27 में 6.8 प्रतिशत रहने की उम्मीद है।’

ब्रोकरेज फर्म ने कहा कि आर्थिक वृद्धि को रफ्तार देने वाले निजी पूंजीगत व्यय या नए निवेश पिछले कुछ वर्षों में सुस्त रहे हैं। इसके अलावा वर्ष 2025 में अमेरिका की ओर से लगाए गए उच्च शुल्क का भी पूंजीगत व्यय पर असर पड़ा।

नीतिगत मोर्चे पर ‘बाधाओं’ का उल्लेख करते हुए रिपोर्ट कहती है कि 2026 में खुदरा मुद्रास्फीति दर 3.9 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो आरबीआई के चार प्रतिशत के लक्ष्य के करीब है। इससे केंद्रीय बैंक के लिए दरों में और कटौती की गुंजाइश कम हो जाती है।

हालांकि रिपोर्ट के मुताबिक, ‘अमेरिकी शुल्क से जुड़ी अनिश्चितता अगर पहली तिमाही के बाद भी बनी रहती है और वृद्धि पर असर डालती है, तो नीतिगत दर में 0.25 प्रतिशत की एक और कटौती संभव है।’

रिपोर्ट के अनुसार, दरों में कटौती और जीएसटी दरों को युक्तिसंगत बनाए जाने से शहरी मांग को सहारा मिलेगा और 2026 में बैंक ऋण वृद्धि 13 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।

राजकोषीय सख्ती को 2026 में जीडीपी वृद्धि पर “कम असर डालने वाला” बताया गया है और सरकार अगले वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटे को चार से 4.2 प्रतिशत के दायरे में लाने पर टिकी रह सकती है।

इसके साथ ही ब्रोकरेज कंपनी ने कहा कि रुपये के लिए सबसे खराब दौर संभवतः पीछे छूट चुका है। इसने अगले तीन, छह और 12 महीनों में डॉलर के मुकाबले रुपये का स्तर क्रमशः 89.5, 91 और 91 रहने का अनुमान जताया है।

हालांकि गोल्डमैन शैक्स ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के संपन्न में अधिक विलंब होने पर भुगतान संतुलन का परिदृश्य बिगड़ सकता है और रुपये पर भी दबाव बन सकता है।

भाषा प्रेम

प्रेम रमण

रमण

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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