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Tuesday, 17 March, 2026
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सिगरेट पर उत्पाद शुल्क बढ़ाने से गैरकानूनी कारोबार, तस्करी को बढ़ावाः उद्योग निकाय

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नयी दिल्ली, एक जनवरी (भाषा) तंबाकू उद्योग निकाय टीआईआई ने बृहस्पतिवार को कहा कि एक फरवरी से सिगरेट पर उत्पाद शुल्क में प्रस्तावित बढ़ोतरी से अवैध एवं गैरकानूनी कारोबार को बढ़ावा मिलेगा और इस शुल्क वृद्धि का समग्र प्रभाव राजस्व के लिहाज से तटस्थ ही रहेगा।

‘टोबैको इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया’ (टीआईआई) ने एक बयान में कहा कि वह शुल्क ‘अभूतपूर्व वृद्धि’ के इस फैसले से ‘हैरान और स्तब्ध’ है।

आईटीसी, गॉडफ्रे फिलिप्स इंडिया और वीएसटी इंडस्ट्रीज जैसी प्रमुख सिगरेट कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाले इस संगठन में तंबाकू किसान, निर्यातक और सहायक उद्योग भी शामिल हैं।

संगठन ने सरकार से इस अत्यधिक कर वृद्धि के पीछे की गणनाओं की समीक्षा करने और इसके व्यापक प्रभावों को देखते हुए निर्णय पर पुनर्विचार का अनुरोध किया है।

टीआईआई ने कहा, “शुल्क में इतनी बड़ी बढ़ोतरी से लाखों किसानों, एमएसएमई, खुदरा विक्रेताओं और स्थानीय मूल्य शृंखलाओं को गंभीर नुकसान होगा। साथ ही यह अवैध उद्योग को बड़ा प्रोत्साहन देगी और राष्ट्रीय उद्यमों को क्षति पहुंचाएगी।”

संगठन ने कहा कि देश में हर तीन वैध सिगरेट पर एक तस्करी वाली या अवैध सिगरेट बिकती है और कर में यह तेज बढ़ोतरी अवैध गतिविधियों को और बढ़ाएगी। इससे सरकारी खजाने को नुकसान होगा और असामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा।

फिलहाल सिगरेट पर 28 प्रतिशत जीएसटी और अलग-अलग दरों पर क्षतिपूर्ति उपकर लगता है। जीएसटी लागू होने के बाद पिछले सात वर्षों से कर दरें लगभग स्थिर रही हैं।

वित्त मंत्रालय ने एक फरवरी से सिगरेट की लंबाई के आधार पर 1,000 स्टिक पर 2,050 रुपये से लेकर 8,500 रुपये तक उत्पाद शुल्क अधिसूचित किया है। यह पहले से लग रहे 40 प्रतिशत जीएसटी के अतिरिक्त होगा।

टीआईआई ने कहा कि भारत में सिगरेट पर पहले से ही अत्यधिक कर लगता है। कुल तंबाकू खपत में वैध सिगरेट की हिस्सेदारी केवल 10 प्रतिशत है, लेकिन यह 80 प्रतिशत तंबाकू कर राजस्व देती है।

भाषा प्रेम

प्रेम रमण

रमण

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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