(तस्वीरों के साथ)
(लेमुएल लाल)
भोपाल, 31 दिसंबर (भाषा) मध्यप्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान (केएनपी) में चीता को बसाने की तीन साल पुरानी परियोजना 2025 में पूरी गति से आगे बढ़ी, जिसमें 12 शावकों का जन्म हुआ, हालांकि उनमें से तीन को बचाया नहीं जा सका। भारत में अब इनकी संख्या 30 हो गई है।
अधिकारियों ने बताया कि तीन शावकों सहित कुल छह चीतों की साल के दौरान मौत हो गई।
चीता परियोजना के क्षेत्र निदेशक उत्तम शर्मा ने बताया कि तीन मादा चीतों ने 12 शावकों को जन्म दिया, जिनमें से तीन अलग-अलग कारणों से जीवित नहीं बचे।
उन्होंने बताया कि इसके अलावा नामीबिया से लाए गए एक वयस्क और दो उप-वयस्क चीतों की मौत हो गई।
चीते करीब सात दशक पहले भारत में विलुप्त हो गए थे।
प्रजातियों को पुनर्जीवित करने के सरकारी प्रयासों के रूप में सितंबर 2022 में आठ चीतों को नामीबिया से भारत लाया गया था, इसके बाद दक्षिण अफ्रीका से 12 के एक और जत्थे को फरवरी 2023 में श्योपुर जिले के कूनो राष्ट्रीय उद्यान (केएनपी) में स्थानांतरित कर दिया गया था।
जानवरों की कुल आबादी में से तीन चीतों को मंदसौर जिले के गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में स्थानांतरित कर दिया गया है, जबकि 27 को वर्तमान में केएनपी में रखा गया है।
अधिकारियों ने कहा कि चीतों को अब भारत में तीसरा ठिकाना मिलने वाला है, जो कि मध्यप्रदेश के सागर जिले में नौरादेही वन्यजीव अभयारण्य होगा।
वर्तमान में भारत में 30 चीते है, जिनमें 19 ऐसे हैं जिनका जन्म भारतीय धरती पर हुआ है।
शर्मा ने कहा कि केंद्र और मध्यप्रदेश सरकार के प्रयासों का ही फल है कि भारत में चीते फलने फूलने लगे हैं और चीता परियोजना सफल साबित हो रही है।
भारत में जल्द ही बोत्सवाना से आठ और चीतों को लाए जाने की जोर-शोर से तैयारी हो रही है।
अधिकारियों के अनुसार फरवरी तक इन चीतों को भारत लाया जा सकता है।
भाषा ब्रजेन्द्र गोला
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