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Tuesday, 13 January, 2026
होमदेशअखलाक लिंचिंग मामला: आरोप वापस लेने की यूपी सरकार की अर्जी खारिज, रोजाना सुनवाई के आदेश

अखलाक लिंचिंग मामला: आरोप वापस लेने की यूपी सरकार की अर्जी खारिज, रोजाना सुनवाई के आदेश

अखलाक के परिवार के वकील यूसुफ सैफी ने पीटीआई-भाषा को बताया कि अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने अभियोजन पक्ष की ओर से दायर आवेदन को बेबुनियाद बताते हुए खारिज कर दिया.

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नोएडा: उत्तर प्रदेश के नोएडा में सूरजपुर की एक अदालत ने मंगलवार को राज्य सरकार की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें 2015 में मोहम्मद अखलाक की मॉब लिंचिंग के आरोपियों के खिलाफ आरोप वापस लेने की मांग की गई थी.

अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि मामले की सुनवाई प्रतिदिन के आधार पर की जाए.

अखलाक के परिवार के वकील यूसुफ सैफी ने पीटीआई-भाषा को बताया कि अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने अभियोजन पक्ष की ओर से दायर आवेदन को बेबुनियाद बताते हुए खारिज कर दिया.

उन्होंने बताया कि मामले की अगली सुनवाई छह जनवरी को तय की गई है.

सैफी ने कहा कि अदालत ने अखलाक की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या के मामले में आरोपियों के खिलाफ सभी आरोप वापस लेने की राज्य सरकार की अर्जी खारिज कर दी है और सुनवाई में तेजी लाने तथा रोजाना सुनवाई करने का आदेश दिया है.

इससे पहले इस मामले की सुनवाई 18 दिसंबर को होनी थी और बाद में इसे 23 दिसंबर के लिए तय किया गया था.

उत्तर प्रदेश सरकार ने सामाजिक सद्भाव बनाए रखने का हवाला देते हुए सभी आरोपियों के खिलाफ मामला वापस लेने की अनुमति मांगते हुए अदालत में याचिका दायर की थी.

राज्य सरकार और अभियोजन के संयुक्त निदेशक के निर्देशों के बाद सहायक जिला सरकारी अधिवक्ता, आपराधिक, द्वारा यह आवेदन दायर किया गया था.

मोहम्मद अखलाक की सितंबर 2015 में भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी. ग्रेटर नोएडा के जारचा पुलिस थाना क्षेत्र के अंतर्गत बिसहदा गांव में स्थित उनके घर पर भीड़ ने हमला किया था. यह हमला गोमांस रखने की अफवाह के बाद किया गया था.

इस घटना की देशभर में चर्चा हुई थी. इसकी व्यापक आलोचना भी हुई थी. पुलिस ने जांच के बाद इस मामले में कुल 19 लोगों को आरोपी बनाया था. सभी के खिलाफ हत्या, दंगा भड़काने और जान से मारने की धमकी जैसी गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया था.

यह खबर भाषा न्यूज़ एजेंसी से ऑटो-फीड के जरिए ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.


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