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Thursday, 15 January, 2026
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स्थानीय उपचार, घर-घर आपूर्ति – 100 प्रतिशत स्वच्छ पेयजल अपनाने के लिए लागत प्रभावी तरीके: अध्ययन

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नयी दिल्ली, पांच दिसंबर (भाषा) भारत में स्वच्छ पेयजल को लगभग सार्वभौमिक रूप से अपनाने के लिए जल का स्थानीयकृत उपचार और घर-घर आपूर्ति एक अत्यधिक लागत प्रभावी तरीका है। शिकागो विश्वविद्यालय के ऊर्जा नीति संस्थान (ईपीआईसी) के एक नए अध्ययन से यह जानकारी सामने आई है।

शोधकर्ताओं ने अपने परीक्षण में ओडिशा में 120 गांवों के 60,000 घरों को शामिल किया गया।

अध्ययन के अनुसार दो अरब से अधिक लोगों के पास सुरक्षित पेयजल के विश्वसनीय स्रोत नहीं हैं तथा निम्न एवं मध्यम आय वाले देशों में केवल 14 प्रतिशत ग्रामीण परिवारों को ही अपने घरों में नल का पानी मिल पाता है। जब नल मौजूद भी होते हैं, तब भी इनसे मिलने वाला पानी अक्सर स्थानीय भूजल और सतही जल स्रोतों जितना ही दूषित होता है।

इस प्रकार, स्वच्छ जल की सार्वभौमिक पहुंच दुनिया की सबसे गंभीर जन स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक बनी हुई है। अध्ययन में एक किफायती, प्रभावी और सरल समाधान प्रस्तावित किया गया है – जल का स्थानीय उपचार और घर-घर जल की आपूर्ति।

हैरिस स्कूल ऑफ पब्लिक पॉलिसी में सहायक प्रोफेसर और अध्ययन की सह-लेखिका फियोना बर्लिग ने कहा, ‘‘हमारा शोध दर्शाता है कि स्वादहीन और स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य आसानी से उपलब्ध हो और जिसे महंगे पाइप ढांचे पर निर्भर हुए बिना भी प्राप्त किया जा सकता है।’’

बर्लिग और उनके सह-लेखक, हैरिस पब्लिक पॉलिसी के सहायक प्रोफेसर अमीर जीना एवं वारविक विश्वविद्यालय के प्रोफेसर अनंत सुदर्शन ने ‘स्प्रिंग हेल्थ वाटर’ के साथ साझेदारी की। ‘स्प्रिंग हेल्थ वाटर’ एक स्थानीय व्यवसाय है जिसके जल उपचार संयंत्र सौर ऊर्जा से संचालित होते हैं और इसका परीक्षण करने के लिए एक प्रयोग के माध्यम से ओडिशा के 120 गांवों में 60,000 घरों को शामिल किया गया।

शोधकर्ताओं ने यह जानने के लिए तीन अलग-अलग अनुबंध बनाए कि लोग पानी को कितना महत्व देते हैं, जैसे कुछ परिवारों ने घर पर मिलने वाले पानी के लिए अलग-अलग कीमत चुकाई, कुछ को हर महीने एक निश्चित मात्रा में मुफ्त बोतलबंद पानी मिला, कुछ को पानी का अधिकार दिया गया और अगर वे इसका पूरा उपयोग नहीं करना चाहते तो उन्हें इसके बदले नकद छूट मिल सकती है।

कम कीमत पर, लगभग 90 प्रतिशत परिवारों ने स्वच्छ जल मंगवाना पसंद किया जो कि क्लोरीन टैबलेट जैसे विकल्पों की 40 से 50 प्रतिशत की दर से कहीं अधिक है तथा संभवत: स्वाद और असुविधा के कारण मुफ्त में दिए जाने पर भी ये लगातार अलोकप्रिय साबित हुए हैं।

जैसे-जैसे कीमतें बढ़ीं मांग कम होती गई लेकिन ऊंची कीमतों पर भी जिन परिवारों ने पानी खरीदा उन्होंने अपनी पीने की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी खरीदा।

अध्ययन से यह निष्कर्ष निकला कि घर पर पानी पहुंचाना और क्लोरीन की गोलियां स्वास्थ्य सुधारने के लिए अत्यधिक लागत प्रभावी तरीके हैं, लेकिन घर पर पानी पहुंचाना समग्र रूप से और भी अधिक लाभ प्रदान कर सकता है।

भाषा सुरभि नरेश

नरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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