(कुणाल दत्त)
(फोटो के साथ)
तिरुवनंतपुरम, तीन दिसंबर (भाषा) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को कहा कि भारत हिंद महासागर क्षेत्र के केंद्र में स्थित है, इसलिए ‘‘हमारे ऊपर एक विशेष जिम्मेदारी’’ है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश महासागरों को ”खुला, स्थिर और नियम-आधारित” बनाए रखने के विचार को लेकर प्रतिबद्ध है।
मुर्मू ने नौसेना की समुद्री शक्ति और युद्ध क्षमताओं के संचालनात्मक प्रदर्शन से जुड़े एक कार्यक्रम में अपने संबोधन में यह बात कही। उन्होंने भारत की समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने में नौसेना की युद्ध क्षमताओं और व्यावसायिकता की भी सराहना की।
मुर्मू ने कहा कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करती है। उन्होंने विश्वास जताया कि नौसेना स्वदेशी प्रौद्योगिकी का विकास जारी रखेगी और भारत को ‘विकसित भारत’ बनने की दिशा में आगे ले जाएगी।
भारतीय नौसेना ने केरल के तट पर शंगुमुघम समुद्र तट पर एक परिचालन प्रदर्शन के साथ अपनी समुद्री शक्ति और बहु-क्षेत्रीय युद्ध क्षमताओं का प्रदर्शन किया।
राष्ट्रपति मुर्मू नौसेना दिवस समारोह के तहत आयोजित इस कार्यक्रम में शामिल हुईं।
नौसेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत, एक पनडुब्बी, चार तीव्र हस्तक्षेप नौकाएं और 32 विमान-लड़ाकू जेट, निगरानी विमान और हेलीकॉप्टर-सहित 19 प्रमुख युद्धपोत इस प्रदर्शन का हिस्सा रहे।
भारत ने अपने कुछ अत्याधुनिक नौसैनिक प्लेटफॉर्म प्रदर्शित किए, जिनमें स्वदेशी अग्रिमपंक्ति के जंगी जहाज आईएनएस उदयगिरि और कुछ प्रमुख विमान शामिल थे।
मुर्मू ने अपने संबोधन में कहा कि हिंद महासागर क्षेत्र (आईओआर) एक “अत्यधिक रणनीतिक और महत्वपूर्ण समुद्री क्षेत्र” है।
राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार का एक माध्यम है। चूंकि, भारत इसके केंद्र में स्थित है, इसलिए हमारी विशेष जिम्मेदारी है। हम महासागरों को खुला, स्थिर और नियम-आधारित बनाए रखने के विचार को लेकर प्रतिबद्ध हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘हमारे ‘वसुधैव कुटुंबकम’ दृष्टिकोण के अनुसार, भारत का दृष्टिकोण प्रतिस्पर्धी के बजाय सहयोगात्मक है। हमारा देश साझा जागरूकता, क्षमता निर्माण और समुद्रों के शांतिपूर्ण इस्तेमाल को बढ़ावा दे रहा है।’’
राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय नौसेना समुद्रों की सुरक्षा के लिए दृढ़ता के साथ खड़ी है।
मुर्मू ने कहा कि खतरों को रोकने से लेकर समुद्री डकैती से निपटने तक, हमारे विशेष आर्थिक क्षेत्र को सुरक्षित करने से लेकर नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने तक, नौसेना की भूमिका कहीं अधिक व्यापक है।
राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘मुझे विश्वास है कि भारतीय नौसेना स्वदेशी प्रौद्योगिकी का विकास जारी रखेगी और भारत को ‘विकसित भारत’ बनाने की यात्रा में योगदान देगी।’’
उन्होंने नौसेना और सभी हितधारकों से समुद्र की सुरक्षा के लिए मिलकर काम करने का आग्रह किया।
मुर्मू ने कहा, ‘‘हमें मिलकर अपने समुद्रों की रक्षा करने, जहाज निर्माताओं को सशक्त बनाने, नाविकों का समर्थन करने और उस समुद्री भावना को पोषित करने की प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि करनी चाहिए, जो सदैव हमारी महान सभ्यता को परिभाषित करती रही है।’’
इससे पहले, केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने मुख्यमंत्री पिनराई विजयन और नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी की मौजूदगी में मुर्मू का हवाई अड्डे पर स्वागत किया।
राष्ट्रपति को हवाई अड्डे के तकनीकी क्षेत्र में ‘गार्ड ऑफ ऑनर’ दिया गया और प्रमुख विध्वंसक आईएनएस कोलकाता द्वारा औपचारिक रूप से तोपों की सलामी दी गई।
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पारुल
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