नयी दिल्ली, एक दिसंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने महाराष्ट्र में स्थानीय निकायों के लिए परिसीमन प्रक्रिया की वैधता के खिलाफ दायर एक याचिका सोमवार को खारिज कर दी और कहा कि ऐसा लगता है कि यह 2022 से लंबित चुनाव को टालने की एक चाल है।
उच्चतम न्यायालय ने 28 नवंबर को एक अलग मामले की सुनवाई करते हुए महाराष्ट्र सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को स्थानीय निकाय चुनाव जल्द से जल्द कराने को कहा था। साथ ही यह स्पष्ट भी किया था कि जिन निकायों में आरक्षण की 50 प्रतिशत सीमा का उल्लंघन हुआ है, उनके चुनाव परिणाम उसके फैसले पर निर्भर करेंगे।
शीर्ष अदालत ने कहा था कि स्थानीय निकायों में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आरक्षण से संबंधित 27 याचिकाओं पर 21 जनवरी, 2026 को तीन न्यायाधीशों की पीठ द्वारा अंतिम सुनवायी की जाएगी।
सोमवार को, परिसीमन प्रक्रिया की वैधता से संबंधित एक नयी याचिका प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष सुनवायी के लिए आयी।
पीठ ने कहा, ‘‘यह चुनाव में देरी करने की एक चाल लगती है।’ साथ ही, पीठ ने कहा कि स्थानीय निकाय चुनावों के आयोजन में अब और कोई बाधा नहीं डाली जा सकती।
शीर्ष अदालत ने बंबई उच्च न्यायालय के सितंबर के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया।
उच्च न्यायालय ने राज्य में स्थानीय निकायों के लिए परिसीमन प्रक्रिया की वैधता के खिलाफ याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया था।
इससे पहले एक अलग मामले में, शीर्ष अदालत ने अपने आदेश का पालन नहीं करने के लिए राज्य निर्वाचन आयोग की खिंचाई की थी और निर्देश दिया था कि 2022 से लंबित स्थानीय निकाय चुनाव बिना किसी और देरी के 31 जनवरी, 2026 तक पूरे किए जाएं।
भाषा अमित दिलीप
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