नयी दिल्ली, एक दिसंबर (भाषा) गोवा में कथित जमीन धोखाधड़ी मामले में धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत कई प्रमुख जगहों पर पांच लाख वर्ग मीटर से अधिक क्षेत्र में फैली अचल संपत्तियों को कुर्क किया गया है। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को यह जानकारी दी।
ईडी ने एक बयान में बताया कि जिन संपत्तियों को कुर्क किया गया है, वे अंजुना, असगांव और उकासिम जैसे क्षेत्रों में स्थित हैं तथा उनका बाजार मूल्य 1,268.63 करोड़ रुपये आंका गया है।
बयान के मुताबिक, पीएमएलए के तहत इन संपत्तियों को कुर्क करने का अनंतिम आदेश 27 नवंबर को जारी किया गया था।
बयान में कहा गया है, “शिवशंकर मायेकर के नेतृत्व वाले समूह ने इन संपत्तियों को फर्जी और जाली भू स्वामित्व दस्तावेजों का इस्तेमाल करके अवैध रूप से हासिल किया था। इन दस्तावेजों में जाली आवंटन प्रमाण पत्र, कब्जा प्रमाण पत्र, ऑटो डी डिमार्को (सीमांकन प्रमाण पत्र), मूल बिक्री विलेख, उपहार विलेख और अन्य फर्जी रिकॉर्ड शामिल थे।”
इसमें कहा गया है कि धनशोधन का यह मामला गोवा पुलिस की ओर से दर्ज प्राथमिकी से उपजा है, जो यशवंत सावंत सहित कुछ अन्य लोगों के खिलाफ अंजुना में सर्वेक्षण संख्या 496/1-ए स्थित भूमि के संबंध में अंजुना कम्यूनिटी के साथ धोखाधड़ी करने के आरोप में दर्ज की गई थी।
बयान के अनुसार, “आरोपियों ने संबंधित अधिकारियों के समक्ष कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज पेश करके अपने नाम पर भूमि का फर्जी दाखिल-खारिज करवा लिया और उसके बाद उक्त भूमि के कुछ हिस्सों को तीसरे पक्ष को बेच दिया, जिससे अपराध की अतिरिक्त आय अर्जित हुई।”
ईडी ने आरोप लगाया कि मायेकर “मुख्य साजिशकर्ता” था, जिसके पास गोवा में कई भूखंड का मलिकाना हक था, जो उसने अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के नाम पर “अवैध रूप से” हासिल किया था।
ईडी ने मायेकर को अक्टूबर में गिरफ्तार किया था और वह फिलहाल न्यायिक हिरासत में जेल में बंद है।
केंद्रीय जांच एजेंसी ने आरोप लगाया कि यह एक ऐसा मामला है, जिसमें मायेकर के नेतृत्व वाले समूह ने एक “सुनियोजित” रणनीति अपनाकर विवादित भूखंडों की पहचान की और फर्जी बिक्री विलेख, जाली उपहार विलेख और जाली प्रमाण पत्र सहित अन्य दस्तावेज तैयार किए।
ईडी ने बताया कि उसने इस मामले में अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है और स्थानीय पुलिस से प्राथमिकी दर्ज करने को कहा है, ताकि एजेंसी अपनी जांच को मजबूत कर सके।
भाषा पारुल सुरेश
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