नयी दिल्ली, 26 नवंबर (भाषा) नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) ने बिजली नियामक सीईआरसी से नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए अपने विनियमन के मसौदे की समीक्षा करने को कहा है। सूत्रों ने कहा कि प्रस्तावित मानदंड इस क्षेत्र में निवेश को हतोत्साहित कर सकते हैं।
इससे पहले सितंबर में, केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (सीईआरसी) ने विचलन निपटान तंत्र के भीतर स्वच्छ ऊर्जा उत्पादकों (पवन और सौर) के लिए एक मसौदा रूपरेखा जारी की थी।
अप्रैल, 2026 में कार्यान्वयन के लिए योजनाबद्ध ढांचे का लक्ष्य प्रतिबद्ध आपूर्ति और वास्तविक उत्पादन के बीच अनुमत अंतर के बीच अंतर को कम करना है।
मामले से जुड़े एक सूत्र ने पीटीआई-भाषा को बताया कि एमएनआरई ने इस मुद्दे की समीक्षा के लिए सीईआरसी को पत्र लिखा है और बिजली नियामक से सुझाव मांगे हैं।
यह वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा के भारत के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को देखते हुए महत्वपूर्ण है।
विशेषज्ञों के अनुसार, लक्ष्य को पूरा करने के लिए भारत को वर्ष 2030 तक हर साल कम से कम 50 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता जोड़ने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि कड़े नियमों से इस क्षेत्र में निवेश पर असर पड़ सकता है।
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) के अनुसार, 31 अक्टूबर, 2025 तक भारत की नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता 250 गीगावाट है, जिसमें 50 गीगावॉट बड़ी पनबिजली परियोजनाएं (25 मेगावाट से ऊपर की), 130 गीगावाट सौर ऊर्जा, 54 गीगावाट पवन ऊर्जा और 10 गीगावाट बायोमास बिजली शामिल है।
मौजूदा समय में, सरकार लगभग 40 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं के लिए बिजली बिक्री समझौतों पर हस्ताक्षर न करने की समस्या से जूझ रही है।
इन परियोजनाओं के लिए वित्त प्राप्त करने को बिजली बिक्री समझौते आवश्यक हैं।
इससे पहले, कई मौकों पर, मंत्रालय के शीर्ष अधिकारियों ने इस मुद्दे को उठाया था और वर्ष 2030 तक 500 गीगावाट के महत्वाकांक्षी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए शीघ्र समाधान की मांग की थी।
भाषा राजेश राजेश अजय
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