नयी दिल्ली, 26 नवंबर (भाषा) पिछले एक दशक में घरेलू उत्पादन में धीरे-धीरे बढ़ोतरी के बावजूद भारत की एलपीजी जरूरतों का 55 से 60 प्रतिशत हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा हुआ है। क्रिसिल इंटेलिजेंस की एक रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।
रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत-अमेरिका के बीच नया दीर्घकालिक एलपीजी आपूर्ति समझौता आपूर्ति स्रोतों में महत्वपूर्ण विविधता लाने वाला कदम है और इससे पारंपरिक पश्चिम एशियाई आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम होगी।
हालांकि, आयातित एलपीजी की लागत पेट्रोलियम विपणन कंपनियों की निकट अवधि की आर्थिक स्थिति का प्रमुख निर्धारक कारक होगा।
रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में एलपीजी खपत बढ़कर लगभग 3.13 करोड़ टन हो गई, जो वित्त वर्ष 2016-17 के 2.16 करोड़ टन से अधिक है। वित्त वर्ष 2025-26 में इसके 3.3 से 3.4 करोड़ टन तक पहुंचने का अनुमान है।
रिपोर्ट में कहा गया कि घरेलू खपत में भी लगातार वृद्धि हो रही है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के उपभोक्ताओं का औसत वार्षिक रिफिल 2016-17 के 3.9 सिलेंडर से बढ़कर वित्त वर्ष 2024-25 में लगभग 4.5 सिलेंडर हो गया है।
गैर-पीएमयूवाई परिवारों ने पिछले पांच वर्षों में प्रति वर्ष 6-7 सिलेंडर के स्थिर रीफिल स्तर को बनाए रखा है।
वाणिज्यिक और औद्योगिक उपयोग अब कुल मांग का लगभग 16 प्रतिशत है, जो वित्त वर्ष 2026-17 में लगभग 10 प्रतिशत था।
वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का घरेलू एलपीजी उत्पादन मामूली बढ़कर 1.28 करोड़ टन हुआ, जो 2016-17 में 1.12 करोड़ था। लेकिन मांग की रफ्तार के सामने यह बढ़ोतरी नाकाफी साबित हुई। नतीजतन, आयात वित्त वर्ष 2016-17 के 1.11 करोड़ टन से बढ़कर 2.07 करोड़ टन पर पहुंच गया।
भाषा योगेश अजय
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