ढाका/नयी दिल्ली, 17 नवंबर (भाषा) बांग्लादेश की अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के सहयोगी, पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को पिछले वर्ष के छात्र विद्रोह के दौरान मानवता के विरुद्ध अपराध के लिए सोमवार को एक न्यायाधिकरण ने उनकी अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई।
अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण-बांग्लादेश (आईसीटी-बीडी) ने पूर्व पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) चौधरी अब्दुल्ला अल-मामुन, जो सरकारी गवाह बन गए थे, को भी इसी मामले में पांच वर्ष के कारावास की सजा सुनाई।
कमाल को मौत की सजा सुनाते हुए न्यायाधिकरण ने सरकार के पक्ष में उसकी सभी चल और अचल संपत्तियों को जब्त करने का आदेश दिया।
माना जाता है कि कमाल भारत में निर्वासन में रह रहे हैं और उन पर उनकी अनुपस्थिति में मुकदमा चलाया गया।
अभियोजन पक्ष ने कहा कि पूर्व गृह मंत्री ने 2024 की कार्रवाई के समन्वय में “मुख्य भूमिका” निभाई।
मामुन फिलहाल हिरासत में है। मामुन ने कार्यवाही के दौरान अपना अपराध स्वीकार कर लिया और सरकारी गवाह बन गये।
न्यायाधिकरण ने कहा कि मामुन के सहयोग से अभियोजन पक्ष को कमान और जिम्मेदारी की कड़ी जोड़ने में “काफी मदद” मिली।
तीन सदस्यीय पीठ ने फैसला सुनाते हुए कहा कि सजाएं “निहत्थे नागरिकों पर की गई समन्वित हिंसा की गंभीरता” को दर्शाती हैं।
भाषा प्रशांत दिलीप
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