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Tuesday, 31 March, 2026
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प्रवासी भारतीय सम्मान पाने वाले पहले इजराइली शख्स बेजालेल का निधन

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(हरिंदर मिश्रा)

यरुशलम, 17 नवंबर (भाषा) इजराइल में एक चरवाहे के रूप में काम करने से लेकर अपने अथक परिश्रम से कृषि क्षेत्र में जाना पहचाना नाम बनने, साथ ही प्रवासी भारतीय सम्मान प्राप्त करने वाले भारतीय मूल के उद्यमी एलियाहू बेजालेल का रविवार को 95 वर्ष की आयु में निधन हो गया।

बेजालेल मूल रूप से केरल के गांव चेन्दमंगलम के रहने वाले थे लेकिन 1955 में 25 वर्ष की आयु में वह इजराइल आ गए थे। लेकिन यहां आने के बाद भी उनका अपनी मातृभूमि के साथ मजबूत भावनात्मक संबंध बना रहा था। वह कहते थे कि ‘‘उन्हें सह-अस्तित्व की भावना की समझ’’ मातृभूमि से ही मिली।

उन्हें 2006 में प्रवासी भारतीय सम्मान प्रदान किया गया था जो भारत द्वारा प्रवासी भारतीयों को दिया जाने वाला सर्वोच्च नागरिक सम्मान है।

बेजालेल ने तब ‘पीटीआई’ से बातचीत में कहा था, ‘‘ मुझे भारतीय होने पर गर्व है। मेरे बच्चे और नाती-पोते गर्व से खुद को कोचीन के निवासी और भारतीय कहते हैं, और कहते हैं कि वे एक ऐसी संस्कृति से आते हैं जो सभी धर्मों के प्रति सहिष्णु है और जहां उनके पूर्वजों ने किसी भी प्रकार की यहूदी-विरोधी भावना महसूस नहीं की।’’

बेजालेल ने इजराइल के नेगेव रेगिस्तान में बागवानी की तथा 1964 में पूर्व इजराइली प्रधानमंत्री लेवी एशखोल से सर्वश्रेष्ठ निर्यातक का पुरस्कार जीता। उन्होंने बागवानी के क्षेत्र में अपनी विशेषज्ञता को भारतीय किसानों के साथ भी साझा किया था।

इजराइली संसद (नेसेट) ने उन्हें 1994 में कपलान पुरस्कार से सम्मानित किया था।

इजराइल के दक्षिण में बेजालेल के खेत हैं और ये भारतीय कृषकों और राजनेताओं के बीच एक प्रमुख आकर्षण हैं। पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा, कृषि मंत्री शरद पवार और कृषिविद् एम.एस. स्वामीनाथन आदि उनके खेतों में आ चुके हैं।

उन्होंने 1971 से बागवानी पर व्याख्यान देने और तकनीक सिखाने के लिए भारत में कई स्थानों की यात्रा की थी।

उन्होंने इजराइल प्रवास के कुछ वर्ष बाद नेगेव क्षेत्र में जाने का निर्णय लिया और यह वह समय था जब बहुत कम लोग वहां रहने के बारे में सोचते थे।

जब उस क्षेत्र में 1958 में पहली पाइपलाइन आई तो उन्होंने बहुत छोटे पैमाने पर कृषि शुरू की। बेजालेल ने 1959 में ग्लेडियोली फूलों के ‘बल्ब’ उगाना और हॉलैंड को निर्यात करना शुरू किया।

उन्होंने बताया था, ‘‘ नेगेव की मिट्टी ‘बल्ब’ उगाने के लिए अच्छी थी। हॉलैंड के लोगों को इसमें विशेष रुचि थी और यह एक बड़ी सफलता साबित हुई।’’

इसके बाद भारतीय उद्यमी ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा और रेगिस्तान में उनकी पहल के लिए जल्द ही पुरस्कारों की झड़ी लग गई।

इजराइली कृषि मंत्रालय ने उन्हें 1969 में बागवानी सीखने के लिए इंग्लैंड भेजा। वापस लौटने पर, उन्होंने दो साझेदारों के साथ मिलकर इजराइल में पहला आधुनिक ग्रीनहाउस स्थापित किया, जो दुनिया भर में इजराइली विशेषज्ञता के क्षेत्र के रूप में पहचाना जाने लगा।

इसके बाद उन्होंने हॉलैंड को गुलाब निर्यात करना शुरू किया, और इजराइल उस देश का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक बन गया।

भारतीय यहूदी विरासत केंद्र और कोचीन यहूदी विरासत केंद्र ने ‘मालाबारी यहूदी समुदाय के प्रिय पुत्र’ के लिए लिखे गए श्रद्धांजलि संदेश में कहा, ‘‘ उनका जीवन विनम्रता, दृढ़ता और परिवार तथा काम के प्रति समर्पण से भरा था। एलियाहू भारत की अपनी जड़ों को कभी नहीं भूले।’’

बेजालेल अपनी बेटी के साथ किद्रोन में रहते थे और कुछ समय से उनकी तबियत ठीक नहीं थी।

भाषा शोभना नरेश

नरेश

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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