scorecardresearch
Thursday, 30 April, 2026
होमखेलविश्वविद्यालय स्तर के खेलों में किक-बॉक्सिंग को फिर से शामिल करें: माकपा सांसद

विश्वविद्यालय स्तर के खेलों में किक-बॉक्सिंग को फिर से शामिल करें: माकपा सांसद

Text Size:

नयी दिल्ली, 17 नवंबर (भाषा) मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास ने खेल मंत्री मनसुख मांडविया से तत्काल हस्तक्षेप कर मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय स्तर के आयोजनों की सूची में किक-बॉक्सिंग को फिर से शामिल करने की मांग की है।

किक-बॉक्सिंग को इस साल की शुरुआत में वार्षिक कैलेंडर से हटा दिया गया था।

भारतीय विश्वविद्यालय संघ (एआईयू) खेल बोर्ड ने 26 अगस्त को आयोजित अपनी 34वीं वार्षिक आम बैठक (एजीएम) में, ‘छात्रों की न्यूनतम भागीदारी’ का हवाला देते हुए किक-बॉक्सिंग को 2025-26 के विश्वविद्यालय खेल कैलेंडर से बाहर कर दिया।

ब्रिटास ने इस फैसले का कड़ा विरोध करते हुए कहा कि यह खेल के विकास और इसकी राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा की उपेक्षा करता है।

ब्रिटास ने कहा, ‘‘किक-बॉक्सिंग भारत में तेजी से बढ़ते ‘कॉम्बैट’ खेलों में से एक है। इसमें स्कूल, विश्वविद्यालय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अच्छी-खासी भागीदारी है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘विश्वविद्यालय खेल कैलेंडर से किक-बॉक्सिंग को बाहर करने से खिलाड़ियों के लिए गंभीर कठिनाई पैदा हो गई है।’’

ब्रिटास ने कहा कि कई युवा खिलाड़ियों ने उनसे संपर्क किया है जिनकी अखिल भारतीय अंतर-विश्वविद्यालय चैंपियनशिप की तैयारियां एआईयू के इस कदम से प्रभावित हुई हैं।

उन्होंने आगे कहा, ‘‘इनमें से कई छात्रों के लिए अंतर-विश्वविद्यालय प्रतियोगिता केवल एक टूर्नामेंट नहीं है बल्कि मान्यता, छात्रवृत्ति और भविष्य की संभावनाओं के लिए उम्मीद की किरण है।’’

ब्रिटास ने खेल मंत्री से इस मामले की समीक्षा करने और संबंधित अधिकारियों को एआईयू के वार्षिक खेल कैलेंडर में किक-बॉक्सिंग को तुरंत बहाल करने का निर्देश देने का आग्रह किया।

एआईयू बोर्ड ने अपनी वार्षिक आम बैठक में सर्वसम्मति से वार्षिक कैलेंडर से 16 खेलों को हटा दिया, जिनमें किक-बॉक्सिंग, ड्रैगन बोट रेसिंग, सॉफ्ट बेसबॉल और मिनी गोल्फ आदि शामिल हैं।

बोर्ड ने कहा कि ये संशोधन खेल कैलेंडर को सुव्यवस्थित करने और उन खेल स्पर्धाओं पर ध्यान केंद्रित करने के उद्देश्य से किए गए हैं जिनमें छात्रों की व्यापक भागीदारी हो और जो राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रासंगिक हों।

भाषा आनन्द पंत

पंत

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

share & View comments