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Monday, 30 March, 2026
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मणिपाल ग्रुप ने थिंक एंड लर्न की दिवाला प्रक्रिया में भाग लेने के लिए रूचि पत्र दिया

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नयी दिल्ली, 13 नवंबर (भाषा) रंजन पई के नेतृत्व वाली मणिपाल एजुकेशन एंड मेडिकल ग्रुप इंडिया ने संकट में फंसी शिक्षा प्रौद्योगिकी कंपनी बायजू की मूल कंपनी थिंक एंड लर्न की कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया में शामिल होने के लिए रुचि पत्र (ईओआई) दिया है।

ईओआई के अनुसार, मणिपाल एजुकेशन एंड मेडिकल ग्रुप इंडिया (एमईएमजी) ने समाधान योजना तैयार करने और प्रस्तुत करने की व्यावहारिकता का आकलन करने के लिए सूचना ज्ञापन, डिजिटल डेटा रूम, मूल्यांकन और अन्य जानकारी तक पहुंच का अनुरोध किया है।

समाधान पेशेवेर (आरपी) के पास दायर दस्तावेज के अनुसार, एमईएमजी इंडिया ने संभावित समाधान आवेदकों (पीआरए) की सूची में शामिल करने का आग्रह किया है और संभावित समाधान योजना के मूल्यांकन के उद्देश्य से कंपनी के वित्तीय और परिचालन विवरणों की जांच करने की इच्छा जतायी है।

वास्तव में, यह एमईएमजी द्वारा दूसरी बार ईओआई दिया गया है। इससे पहले, समाधान पेशेवर द्वारा इस तरह की प्रस्तुति की समय-सीमा 13 नवंबर, 2025 तक बढ़ाया गया था।

कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) में, परिचालन और वित्तीय लेनदारों से ऋण एकत्र करने के बाद, समाधान पेशेवर बोली प्रक्रिया में भाग लेने के लिए इच्छुक पक्षों से ईओआई आमंत्रित करता है।

एमईएमजी इंडिया के रुचि पत्र में दिवाला एवं ऋण शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) के तहत निर्धारित सभी वैधानिक प्रतिबद्धताएं शामिल हैं।

एमईएमजी के बयान के अनुसार, कंपनी ने प्रमाणित किया है कि वह संभावित समाधान आवेदकों के लिए पात्रता मानदंडों को पूरा करती है।

ईओआई प्रस्तुत करने के बाद, समाधान प्रदाता पात्रता का मूल्यांकन करता है, पीआरए (संभावित समाधान आवेदनकर्ता) की एक अस्थायी सूची जारी करता है, जिसके बाद बोलियों के साथ एक अंतिम सूची जारी की जाती है। चयनित समाधान योजनाओं को ऋणदाताओं के निकाय, कर्जदाताओं की समिति के समक्ष रखा जाता है, जो उस पर मतदान करती है।

अंत में, इसे राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण की संबंधित पीठ से मंजूरी लेना भी आवश्यक है।

भाषा रमण अजय

अजय

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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