नयी दिल्ली, 12 नवंबर (भाषा) एमएसएमई क्षेत्र ने बुधवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को बजट-पूर्व सुझावों के तहत विभिन्न क्षेत्रों के लिए उन्नत प्रौद्योगिकी उन्नयन कोष के संदर्भ में सरकार से समर्थन की मांग की।
सूत्रों ने बताया कि बैठक के दौरान, सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यमों (एमएसएमई) ने ऋण तक आसान पहुंच और उनके लिए निर्यात बाजार तलाशने में मदद की भी मांग की।
बैठक का उद्देश्य एक फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट 2026-27 के लिए विचार और सुझाव प्राप्त करना था।
इसमें लघु उद्योग भारती, चमड़ा निर्यात परिषद, तिरुपुर निर्यातक एवं निर्माता संघ, भारत एसएमई फोरम, अखिल भारतीय प्लास्टिक निर्माता संघ और महिला उद्यमी परिसंघ के प्रतिनिधि शामिल हुए।
एमएसएमई भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और कृषि के बाद दूसरे सबसे बड़ा रोजगाार देने वाला (नियोक्ता) क्षेत्र हैं। यह क्षेत्र, जो 12 करोड़ लोगों को रोजगार देता है, भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 30 प्रतिशत, विनिर्माण उत्पादन में 45 प्रतिशत और निर्यात में 40 प्रतिशत का योगदान देता है।
बैठक में केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी, आर्थिक मामलों के विभाग के सचिव और वित्त मंत्रालय तथा एमएसएमई मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए।
यह बजट पूर्व परामर्श की श्रृंखला का तीसरा सत्र है जो वित्त मंत्रालय बजट को अंतिम रूप देने से पहले प्रतिवर्ष आयोजित करता है।
इस सप्ताह की शुरुआत में, वित्त मंत्री ने क्रमशः पहले और दूसरे दौर की चर्चाओं के तहत अर्थशास्त्रियों और कृषि क्षेत्र के प्रमुख प्रतिनिधियों से मुलाकात की थी।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, जो लगातार अपना नौवां बजट पेश करेंगी, भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और भारत से आयात पर लगाए गए 50 प्रतिशत के भारी अमेरिकी शुल्क की पृष्ठभूमि में बजट पेश करेंगी।
अगले वित्त वर्ष के बजट में मांग बढ़ाने, रोजगार सृजन और अर्थव्यवस्था को आठ प्रतिशत से अधिक की निरंतर वृद्धि दर के पथ पर लाने के मुद्दों पर ध्यान देना होगा। सरकार का अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था 6.3-6.8 प्रतिशत की सीमा में बढ़ेगी।
भाषा राजेश राजेश अजय
अजय
यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.
