मुंबई, 12 नवंबर (भाषा) नियोक्ता अब हुनर को प्राथमिकता दे रहे हैं। लगभग 59 प्रतिशत कंपनियां ‘सबसे पहले कौशल’ दृष्टिकोण अपना रही हैं जो पिछले साल की तुलना में 26 प्रतिशत अधिक है। पारंपरिक ‘रिज्यूमे’ आधारित भर्ती प्रक्रिया से हटते हुए अब अधिक कंपनियां ‘स्किल-फर्स्ट’ यानी नियुक्ति में हुनर को प्राथमिकता दे रही हैं।
कृत्रिम मेधा-समर्थित कौशल आकलन मंच ‘इक्विप’ की ‘स्किल-फर्स्ट हायरिंग’ रिपोर्ट के अनुसार 59 प्रतिशत कंपनियां कौशल-आधारित भर्ती दृष्टिकोण अपना रही हैं। यह पिछले साल की तुलना में 26 प्रतिशत और 2022 से 78 प्रतिशत अधिक है।
रिपोर्ट में कहा गया कि कृत्रिम मेधा (एआई) उपकरणों की मदद से वास्तविक कौशल का बड़े पैमाने पर मूल्यांकन आसान हो गया है जिससे पारंपरिक ‘रिज्यूमे’ आधारित भर्ती प्रक्रिया की जगह कौशल-आधारित मूल्यांकन ने ले ली है।
इक्विप के संस्थापक एवं मुख्य कार्यपालक अधिकारी जयंत नीलकंठ ने कहा, ‘‘ कौशल-आधारित भर्ती की ओर यह बदलाव इस बात का संकेत है कि संगठन अब प्रतिभा की पहचान और उसे विकसित करने के नए तरीके अपना रहे हैं। कृत्रिम मेधा और वास्तविक कौशल प्रमाणीकरण के संयोजन से कंपनियां डिग्री या प्रमाणपत्र आधारित भर्ती से आगे बढ़कर योग्यता-आधारित भर्ती की ओर बढ़ रही हैं। इससे तेजी से भर्ती, कर्मचारियों को बनाए रखने की बेहतर स्थिति और अधिक निष्पक्ष दल निर्माण संभव हो पा रहा है।’’
रिपोर्ट के अनुसार, इसके निष्कर्ष 1,700 से अधिक भर्तीकर्ताओं एवं नियोक्ताओं के जवाबों और 600 संगठनों के 2,50,000 उम्मीदवारों के मूल्यांकन आंकड़ों पर आधारित हैं।
भाषा निहारिका रमण
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