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Saturday, 28 March, 2026
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आईपीओ मूल्यांकन पर खुदरा निवेशकों के लिए और सुरक्षा उपायों की जरूरत: सेबी अधिकारी

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मुंबई, सात नवंबर (भाषा) सेबी के पूर्णकालिक सदस्य कमलेश वार्ष्णेय ने शुक्रवार को कहा कि आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) के मूल्यांकन को लेकर कोई नियामकीय कमी नहीं है, लेकिन ‘‘हमें यह देखना होगा कि खुदरा निवेशकों के हितों की रक्षा के लिए हम और सुरक्षा उपाय कैसे कर सकते हैं।”

उन्होंने कंपनी संचालन से संबंधित शिखर सम्मेलन ‘गेटकीपर्स ऑफ गवर्नेंस’ के 10वें संस्करण में कहा कि बाजार नियामक का पूंजी निर्गम के नियंत्रण से हटना एक सही कदम है, लेकिन साथ ही यह सुनिश्चित करना होगा कि मूल्यांकन उचित, प्रभावी और कुशलतापूर्वक हो।

वार्ष्णेय ने कहा, ”मैं यह नहीं कह रहा कि इसमें नियामकीय कमी है, लेकिन इस बात पर विचार करना अच्छा होगा कि जो मूल्यांकन किया जा रहा है वह सही है या नहीं। हमने देखा है कि बहुत सारे आईपीओ आ रहे हैं, जहां खुदरा निवेशक मूल्यांकन को चुनौती दे रहे हैं।”

सेबी (भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने बृहस्पतिवार को साफ किया था कि पूंजी बाजार नियामक आईपीओ मूल्यांकन में हस्तक्षेप नहीं करेगा। उन्होंने कहा था, ”हम मूल्यांकन तय नहीं करते। यह निवेशकों के ऊपर निर्भर करता है।”

हाल में लेंसकार्ट के 7,200 करोड़ रुपये के आईपीओ की कीमत को लेकर चिंता जताई गई थी। इससे पहले नायका और पेटीएम जैसे आईपीओ पर कई हितधारकों ने मूल्यांकन संबंधी चिंताएं उठाई थीं।

वार्ष्णेय ने कहा, ”अब हमारा मानना ​​है कि जब बड़े निवेशक मूल्यांकन कर रहे हों, तो सेबी को खुद को इससे दूर रखना चाहिए।”

उन्होंने कहा कि कॉरपोरेट व्यवस्थाओं के दौरान मूल्यांकन में ऐसे मामले सामने आए हैं, जहां प्रवर्तक शेयरधारक बढ़ी हुई कीमत पर मूल्यांकन करते हैं, जिससे अल्पसंख्यक शेयरधारकों को नुकसान होता है।

वार्ष्णेय ने कहा कि यह एक नियामकीय कमी है और शायद सेबी को भविष्य में इस पर काम करना होगा।

भाषा पाण्डेय रमण

रमण

यह खबर ‘भाषा’ न्यूज़ एजेंसी से ‘ऑटो-फीड’ द्वारा ली गई है. इसके कंटेंट के लिए दिप्रिंट जिम्मेदार नहीं है.

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