(सज्जाद हुसैन)
इस्लामाबाद, छह नवंबर (भाषा) पाकिस्तान ने बृहस्पतिवार को उन आरोपों को खारिज कर दिया कि सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक जी का प्रकाश पर्व मनाने के लिए भारत से आए समूह के कुछ हिंदु सदस्यों को देश में प्रवेश करने नहीं दिया गया। उसने इन आरोपों को ‘‘निराधार और भ्रामक’’ बताया है।
प्रकाश पर्व के लिए लगभग 1,900 सिख तीर्थयात्रियों का एक समूह मंगलवार को अटारी-वाघा सीमा पार करके पाकिस्तान पहुंचा था। एक हिंदू व्यक्ति ने बताया था कि उसे और उसके परिवार के छह सदस्यों को उनके धर्म के कारण वापस भेज दिया गया।
विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर हुसैन अंद्राबी ने मीडिया के सवालों के जवाब में कहा, ‘‘पाकिस्तान स्पष्ट रूप से निराधार और भ्रामक आरोपों को खारिज करता है कि हिंदू समुदाय के सदस्यों को देश में प्रवेश से मना किया गया।’’
उन्होंने कहा कि बहुत कम संख्या में ऐसे लोग थे जिनके पास अधूरे दस्तावेज थे और वे आव्रजन अधिकारियों को संतोषजनक जवाब नहीं दे पाए। इसलिए, उनसे मानक प्रक्रियाओं के अनुसार भारत लौटने का अनुरोध किया गया।
प्रवक्ता ने कहा, ‘‘यह कहना कि इन व्यक्तियों को धार्मिक आधार पर प्रवेश नहीं करने दिया गया, पूरी तरह से गलत और शरारतपूर्ण है।’’ उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने हमेशा सभी धर्मों के तीर्थयात्रियों का स्वागत किया है।
प्रवक्ता ने स्पष्ट किया कि संबंधित कार्रवाई पूर्णतः प्रशासनिक थी, जो पाकिस्तान के अपने क्षेत्र में प्रवेश को विनियमित करने के संप्रभु अधिकार के अनुरूप थी।
अमर चंद नामक व्यक्ति को उनके परिवार के छह सदस्यों के साथ पाकिस्तान जाने के बाद वापस भेज दिया गया था। चंद ने दावा किया कि उन्होंने सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली थीं।
दिल्ली निवासी चंद ने यह भी दावा किया कि लखनऊ के रहने वाले सात और भारतीयों को पाकिस्तान ने वापस भेज दिया।
भाषा धीरज सुभाष
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